World vegetarian day 2019: शाकाहारी खाना क्या दुनिया को बचा सकता है?
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अगर आप हर रोज़ मांस खाते हैं तो कम करने वाली सबसे बड़ी चीज़ तो यही है। अगर आप रेड मीट खाते हैं तो हफ़्ते में एक बर्गर और अगर जानवरों की आंतों से बनी डिश खाते हैं तो महीने में सिर्फ एक बार आपको ऐसी चीज़ें खानी चाहिए। हालांकि, आप मछली से बने कुछ खाने का लुत्फ हफ़्ते में कई बार ले सकते हैं और हफ़्ते में एक बार ही चिकन खा सकते हैं। लेकिन इसके अलावा आपको प्रोटीन की आपूर्ति सब्जियों से करनी पड़ेगी। शोधकर्ता दालें और फलियां खाने की सलाह देते हैं. हालांकि, स्टार्च वाली यानी कार्बोहाइड्रेट की आपूर्ति करने वाली सब्जियां जैसे आलू और अरबी की कटौती करनी होगी। अफ़्रीकी देशों में ये सब्जियां बहुतायत में खाई जाती हैं।
अगर उन सभी चीज़ों की लिस्ट बनाएं जो कि आप किसी सामान्य दिन में खाएंगे तो उस लिस्ट में ये चीज़ें होंगी।
1 - सख्त छिलके वाली चीज़ें जैसे बादाम - 50 ग्राम
2 - सोयाबीन जैसी फलियां - 75 ग्राम
3 - मछली - 28 ग्राम
4 - मांस - 14 ग्राम रेड मीट और 29 ग्राम चिकन
5 - कार्बोहाइड्रेट - रोटी और चावल 232 ग्राम और 50 ग्राम स्टार्च वाली सब्जियां
6 - डेयरी - 250 ग्राम (एक ग्लास दूध)
8 - सब्जियां - 300 ग्राम और फल 200 ग्राम
इस डाइट में 31 ग्राम शुगर और 50 ग्राम ऑलिव ऑइल की गुंजाइश है.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर वॉल्टर विलेट भी इस मुद्दे पर किए गए शोध में शामिल रहे हैं। खेतों के बीच अपना बचपन बिताने वाले प्रोफेसर विलेट कहते हैं कि वह दिन में तीन बार रेड मीट खाते थे लेकिन अब उनके खाने पीने की शैली प्लेनेटरी हेल्थ डाइट के मुताबिक़ ही रही है। विलेट अपनी इस बात को उदाहरण देकर समझाते हैं, "वहां पर खाने की चीज़ों की तमाम किस्में होती थीं। आप इन चीज़ों को अलग अलग तरह से मिलाकर कई डिश तैयार कर सकते हैं."
इस योजना के तहत दुनिया के हर हिस्से में लोगों को अपने खानपान की शैली को बदलना चाहिए। यूरोप और उत्तरी अफ़्रीका को रेड मीट में भारी कटौती करने होगी। वहीं, पूर्वी एशिया को मछली खाने में कटौती करनी होगी। अगर अफ़्रीका की बात करें तो वहां पर लोगों को स्टार्च वाली सब्जियों को खाने में कटौती करनी होगी। स्टॉकहोम युनिवर्सिटी में स्टॉकहॉम रेज़िलेंस सेंटर की निदेशक लाइन गॉर्डन कहती हैं, "मानवता ने कभी भी अपने खानपान को इस स्तर और इस गति से बदलने की कोशिश नहीं की है। अब रही बात इसके काल्पनिक होने या न होने की, तो कल्पनाओं को नकारात्मक होने की ज़रूरत तो नहीं है। अब वो समय आ गया है जब हम एक अच्छी दुनिया बनाने की सपना देखें."