विश्वभर में पिछले ग्यारह वर्षों से गौरैया दिवस मनाया जा रहा है पर प्रश्न यह है कि इस दिन को मनाने की आवश्यकता आन क्यों पड़ी? और यदि मनाते ही तो गौरैयाओं के अस्तित्व के लिए ईश्वर को धन्यवाद प्रेषित करते हुए क्यों नहीं मना सकते हम? गौरैया का न दिखना बिन बोले ही सारे प्रश्नों का जवाब दे देता है। आज गौरैया सिर्फ पुस्तकों, कविताओं में ही है। गांव में यदि कभी कोई गौरैया दिख जाए तो बच्चे झूम उठते हैं लेकिन समस्त मानव समाज के लिए शर्म की बात है कि गौरैया अब विलुप्ति की कगार पर है और इसका संरक्षण हमारा परम कर्तव्य होना चाहिए जो कि आज भी नहीं है, बस इसी बात को याद दिलाने के लिए हम प्रतिवर्ष विश्व गौरैया दिवस मनाते हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए गौरैया दिवस का इतिहास, महत्व और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी।
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World Sparrow Day 2021: जानिए विश्व गौरैया दिवस 2021 का इतिहास, महत्व , विषय एवं 'गौरैया पुरस्कार' से जुड़ी जानकारी
Sat, 20 Mar 2021 03:26 PM IST
तेजस्वी मेहता
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तेजस्वी मेहता
Updated Sat, 20 Mar 2021 03:26 PM IST
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गौरैया अब विलुप्ति की कगार पर है
- फोटो : अमर उजाला
गांवों में रहना इसे अधिक सुहाता है
- फोटो : अमर उजाला
कौन है गौरैया?
गौरैया का वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस है। यह पासेराडेई परिवार का हिस्सा है। विश्व के विभिन्न देशों में यह पाई जाती है। यह लगभग 15 सेंटीमीटर के होती है मतलब बहुत ही छोटी होती है। शहरों के मुकाबलों गांवों में रहना इसे अधिक सुहाता है। इसका अधिकतम वजन 32 ग्राम तक होता है। यह कीड़े और अनाज खाकर अपना जीवनयापन करती है।
गौरैया का वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस है। यह पासेराडेई परिवार का हिस्सा है। विश्व के विभिन्न देशों में यह पाई जाती है। यह लगभग 15 सेंटीमीटर के होती है मतलब बहुत ही छोटी होती है। शहरों के मुकाबलों गांवों में रहना इसे अधिक सुहाता है। इसका अधिकतम वजन 32 ग्राम तक होता है। यह कीड़े और अनाज खाकर अपना जीवनयापन करती है।
पहली बार विश्व गौरैया दिवस 2010 में मनाया गया था
- फोटो : अमर उजाला
विश्व गौरैया दिवस का इतिहास
विश्व गौरैया दिवस को मनाने की शुरुआत भारत के नासिक में रहने वाले मोहम्मद दिलावर के प्रयत्नों से हुई। दिलावर द्वारा गौरैया संरक्षण के लिए नेचर फॉर सोसाइटी नामक एक संस्था शुरू की गई थी। पहली बार विश्व गौरैया दिवस 2010 में मनाया गया था। प्रतिवर्ष पिछले दस सालों से 20 मार्च अर्थात गौरैया दिवस पर उन लोगों को गौरैया पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है जो पर्यावरण एवं गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।
विश्व गौरैया दिवस को मनाने की शुरुआत भारत के नासिक में रहने वाले मोहम्मद दिलावर के प्रयत्नों से हुई। दिलावर द्वारा गौरैया संरक्षण के लिए नेचर फॉर सोसाइटी नामक एक संस्था शुरू की गई थी। पहली बार विश्व गौरैया दिवस 2010 में मनाया गया था। प्रतिवर्ष पिछले दस सालों से 20 मार्च अर्थात गौरैया दिवस पर उन लोगों को गौरैया पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है जो पर्यावरण एवं गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।
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‘आई लव स्पैरो’
- फोटो : अमर उजाला
विश्व गौरैया दिवस 2021 का विषय
विश्व गौरैया दिवस 2021 का विषय ‘आई लव स्पैरो’ रखा गया है जिसकाअर्थ है कि मुझे गौरैया से प्रेम है। पिछले कई सालों से इस एक ही विषय पर इस दिन को मनाया जा रहा है। इस थीम को रखने के पीछे इंसान और पक्षी के बीच के संबंध की सराहना करना है। इस दिन लोग गौरैया की तस्वीरें बनाते हैं, कविताएं लिखते हैं, अपने अनुभव एवं गौरैया से जुड़े किस्से आदि साझा करते हैं।
विश्व गौरैया दिवस 2021 का विषय ‘आई लव स्पैरो’ रखा गया है जिसकाअर्थ है कि मुझे गौरैया से प्रेम है। पिछले कई सालों से इस एक ही विषय पर इस दिन को मनाया जा रहा है। इस थीम को रखने के पीछे इंसान और पक्षी के बीच के संबंध की सराहना करना है। इस दिन लोग गौरैया की तस्वीरें बनाते हैं, कविताएं लिखते हैं, अपने अनुभव एवं गौरैया से जुड़े किस्से आदि साझा करते हैं।
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गौरैया को रेड लिस्ट कर दिया गया है
- फोटो : अमर उजाला
गौरैया संरक्षण के उपाय-
ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ बर्डस द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में किए गए अनुसंधान के आधार पर भारत और कई बड़े देशों में गौरैया को रेड लिस्ट कर दिया गया है जिसका अर्थ है कि यह पक्षी अब पूर्ण रूप से विलुप्ति की कगार पर है। गौरैया संरक्षण के लिए हम यही कर सकते हैं कि अपनी छत पर दाना-पानी रखें, अधिक से अधिक पेड़- पौधे लगाएं, उनके लिए कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करें।
ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ बर्डस द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में किए गए अनुसंधान के आधार पर भारत और कई बड़े देशों में गौरैया को रेड लिस्ट कर दिया गया है जिसका अर्थ है कि यह पक्षी अब पूर्ण रूप से विलुप्ति की कगार पर है। गौरैया संरक्षण के लिए हम यही कर सकते हैं कि अपनी छत पर दाना-पानी रखें, अधिक से अधिक पेड़- पौधे लगाएं, उनके लिए कृत्रिम घोंसलों का निर्माण करें।