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World Refugee Day 2019: हर मिनट 25 लोग सुरक्षित जीवन की तलाश में अपना देश छोड़ने को मजबूर होते हैं
Thu, 20 Jun 2019 11:48 AM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Thu, 20 Jun 2019 11:48 AM IST
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दुनिया के हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि अपना घर हो लेकिन सोचिए घर होते हुए भी छिन जाए तो कैसा महसूस होगा। इस वक्त विश्व में 4 करोड़ बेघर लोग ही इस दर्द को समझ सकते हैं। आपको बता दें कि विश्व में 57 प्रतिशत रिफ्यूजी यानी शरणार्थी हैं जो मुख्यता दक्षिण सूडान, अफगानिस्तान और सीरिया से आते हैं। प्रतिवर्ष 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जाता है। युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रहने के लिए हर साल लाखों लोग अपने घरों से भागने को मजबूर होते हैं। जिन लोगों को अपना देश छोड़ना पड़ता है, उन्हें शरणार्थी कहा जाता है और अंतर्राष्ट्रीय विश्व शरणार्थी दिवस का उद्देश्य इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। जिससे दुनिया भर के करोड़ों- लाखों लोग प्रभावित हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के आंकड़े बताते हैं कि हर मिनट, लगभग 25 लोगों को सुरक्षित जीवन की तलाश में सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ता है।
कौन हैं शरणार्थी
शरणार्थी वो लोग होते हैं जिन्हे युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर हैं। हर साल, दुनिया भर में लाखों नए जीवन की तलाश में कहीं सुरक्षित रहने के लिए दूसरे देश शरण कि तलाश में भागते हैं। इनमें से लाखों बच्चे भी हैं। यूएनआरए के अनुसार, दुनिया भर में 1 लाख 70 हजार से अधिक बच्चे बिना माता-पिता के हैं और बिना किसी गार्डियन के संरक्षण के बिना ही यात्रा कर रहे हैं।
शरणार्थी वो लोग होते हैं जिन्हे युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर हैं। हर साल, दुनिया भर में लाखों नए जीवन की तलाश में कहीं सुरक्षित रहने के लिए दूसरे देश शरण कि तलाश में भागते हैं। इनमें से लाखों बच्चे भी हैं। यूएनआरए के अनुसार, दुनिया भर में 1 लाख 70 हजार से अधिक बच्चे बिना माता-पिता के हैं और बिना किसी गार्डियन के संरक्षण के बिना ही यात्रा कर रहे हैं।
शरण तलाशने वाले
एक बार जब कई शरणार्थी कहीं सुरक्षित पहुंच जाते हैं, तो वे उस जगह के शरणार्थी बन सकते हैं या शरण लेने वाले देश में रहने के लिए विशेष अनुमति मांग सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें शरण मिल जाती है। एक शरण लेने वाला एक व्यक्ति अपने देश से जान बचाकर दूसरे देश में प्रवेश करता है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकार और उस देश में रहने के लिए आवेदन करता है।
एक बार जब कई शरणार्थी कहीं सुरक्षित पहुंच जाते हैं, तो वे उस जगह के शरणार्थी बन सकते हैं या शरण लेने वाले देश में रहने के लिए विशेष अनुमति मांग सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें शरण मिल जाती है। एक शरण लेने वाला एक व्यक्ति अपने देश से जान बचाकर दूसरे देश में प्रवेश करता है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के अधिकार और उस देश में रहने के लिए आवेदन करता है।
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यूएनएचसीआर की वार्षिक ग्लोबल ट्रेंड्स रिपोर्ट 19 जून 2018 को जारी की गई जो ये बताती है कि 2017 के अंत में दुनिया भर में 6 करोड़ 85 लाख लोगों को जबरन विस्थापित किया गया था।उसी वर्ष के दौरान 1 करोड़ 62 लाख और लोग विस्थापित हुए थे। दिन के हर मिनट में 31 लोग विस्थापित होते हैं। दुनिया के 52 प्रतिशत शरणार्थी और विस्थापित बच्चे ही हैं। ज्यादातर विकासशील देश के लोग प्रभावित हैं।