हर साल दुनियाभर में 17 जुलाई को वर्ल्ड इमोजी डे मनाया जाता है। साल 2014 से ही यह डे मनाया जा रहा है। आज के वक्त में टैक्सट मैसेज में इमोजी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। शायद ही कोई होगा जो चैटिंग के दौरान एक-दूसरे को इमोजी न भेजें। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इमोजी के जरिए लोग अपनी भावनाओं को आसानी से समझा पाते हैं। रोने से लेकर गुस्सा और बुखार सब एक इमोजी के जरिए समझाया जा सकता है। अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो अपनी सारी भावनाओं को एक इमोजी के जरिए चंद सेकेंड में उस तक पहुंचा सकते हैं। आइए जानते हैं क्या है इमोजी की कहानी और भारतीय किस इमोजी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं...
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भारतीय सबसे ज्यादा 'खुशी के आंसू और 'ब्लोइंग अ किस' इमोजी का इस्तेमाल करते हैं। इस बात की तस्दीक एक रिपोर्ट में की गई है। इस रिपोर्ट को वर्ल्ड इमोजी डे से ठीक एक दिन पहले टेक कंपनी बोबल एआई ने जारी किया था। दरअसल, इमोजी ने भावनाओं के संप्रषण को इतना आसान कर दिया है कि शब्दों की जरूरत ही एक तरह से कम हो गई है।
छह साल पहले तक किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक दिन वर्ल्ड इमोजी डे मनाया जाएगा। लेकिन इमोजी के जरिए जब से मैसेजिंग की दुनिया में क्रांति आई यह हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया और साल 2014 से बकायदा हम एक दिवस के तौर पर इसका जश्न भी मनाने लगे। क्या आप जानते हैं कि जिस स्माइली को आप आज भेजते हैं उसे सबसे पहले किसने बनाया होगा? बता दें कि दुनिया में सबसे पहले स्माइली फेस अमेरिका में बनाया गया था। इसे 'हार्वी रोस बॉल' ने बनाया था।
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मेरीका में जन्मे हार्वी ने इस स्माइली फेस को जब तैयार किया था, तब उन्हें पता भी नहीं था कि यह लोगों के बीच इतना ज्यादा लोकप्रिय हो जाएगा। उन्होंने कभी इसे पेटेंट भी नहीं करवाया।
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हार्वी 1963 में एक एडवरटाइजिंग और पीआर एजेंसी चलाते थे। इसी दौरान स्टेट म्युचुअल लाइफ एश्योरेंस कंपनी ऑफ अमेरिका उनके सामने अपनी एक परेशानी लेकर पहुंची। उस दौरान इस कंपनी ने किसी दूसरी कंपनी के साथ विलय कर लिया था। इससे कंपनी के कर्मचारी बेहद नाराज थे। हार्वी ने इस समस्या का समाधान करने के लिए ‘स्माइली फेस’ तैयार किया। उन्हें इसे तैयार करने के लिए 45 डॉलर मिले।