खाने की आदतों की बुनियाद पर लोग दो तरह के होते हैं, शाकाहारी और मांसाहारी, लेकिन आजकल एक नया शब्द काफी चलन में है 'वीगन'। वेगन आहार में पूर्ण रूप से केवल फल और सब्जियां ही शामिल हैं। वीगन डाइट फॉलो करने वाले लोग दूध और दूध से बने उत्पादों का भी सेवन नहीं करते। आज दुनिया भर में वेगन लोगों की अच्छी ख़ासी संख्या है। सेलिब्रिटी के बीच तो वीगन डाइट का चलन कुछ ज्यादा ही है। कहा जाए कि फिल्मी सितारों और दीगर मशहूर हस्तियों ने ही इस आहार को ज्यादा लोकप्रिय बनाया है, तो गलत नहीं होगा।
ना शाकाहार ना मांसाहार, इस डाइट का बढ़ा चलन, पुरुषों की तुलना में क्यों तेजी से अपना रही महिलाएं?
लेकिन हैरत की बात है कि वीगन लोगों में मर्दों के मुकाबले औरतों की संख्या कहीं ज्यादा है। अमेरिका में वीगन लोगों की संख्या जानने के लिए एक सर्वे किया गया। सर्वे में सैम्पल साइज 11 हजार का था। नतीजे में पाया गया कि वेगन आहार लेने वालों में सिर्फ 24 फीसदी ही पुरुष हैं। वीगन आहार सेहत के लिए काफी फायदेमंद है फिर भी मर्द इसकी तरफ आसानी से आकर्षित क्यों नहीं होते?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि मर्दों को शायद लगता है कि मांस खाना मर्दानगी की निशानी है। जबकि सिर्फ फल-सब्जियां खाने से उनकी मर्दानगी को चोट लगती है। समाज में उन्हें नीची नजर से देखा जाने लगता है। ये बिल्कुल ऐसा ही है जैसे अगर कोई लड़का बचपन में गुड़िया की चोटी गूंथने लगे तो कहा जाता है, उसमें लड़कियों वाली अदाएं हैं। यानी उसे मर्द की श्रेणी में रख दिया जाता है।
ये सोच आखिर पनपी कैसे?
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलम्बिया के मनोवैज्ञानिक प्रोफ़ेसर स्टीवन हाइन का कहना है कि शुरुआत में इंसान पेट भरने के लिए शिकार करता था और मांस खाता था। शिकार करना, मर्दों के हिस्से का काम था। जब समाज जैसी किसी चीज की कल्पना भी इंसान के दिमाग नहीं थी, तब भी वो अप्रत्यक्ष रूप से पितृसत्तातमक समाज में ही जी रहा था। चूंकि मर्द शिकार करते थे, इसीलिए मांस खाना अपनी शान समझते थे।
आगे चलकर बाजार ने भी मर्दों की इस सोच और आदत को और पुख़्ता किया। 19वीं सदी में जब महिलाओं ने अलग पार्टियों में खाना शुरु कर दिया, तो रेस्टोरेंट और विज्ञापन पेश करने वाली कंपनियों ने खानों को दो वर्गों में बांट दिया। दाल, सब्ज़ी, सलाद और दही को महिलाओं का खाना कहा जाने लगा। जबकि, मांस, मछली, अंडे आदि मर्दों का खाना कहलाए जाने लगे। यही सोच हम आज भी अपनी अगली पीढ़ियों तक पहुंचा रहे हैं।
'सॉय बॉय' एक खास तरह का शब्द है, जो उन लड़कों या मर्दों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो सोयाबीन का सेवन ज्यादा करते हैं। माना जाता है कि सोयाबीन का ज्यादा सेवन करने से मर्दों की शारीरिक संरचना बिगड़ जाती है। सेक्स की ख्वाहिश में कमी आ जाती है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन ये सोच बड़े पैमाने पर पाई जाती है। 'सॉय बॉय' शब्द शब्दकोश तक में मौजूद है। प्रोफेसर हाइन का कहना है कि बहुत से मर्द रेस्टोरेंट आदि में खाना खाते समय सलाद या सब्जियां ऑर्डर करने से शरमाते हैं। कहीं भीतर डर रहता है कि उनकी मर्दानगी पर शक तो नहीं किया जाएगा।
औरतें ज्यादा रहमदिल?
रिसर्च में ये भी पाया गया है कि औरतें, मर्दों के मुकाबले ज्यादा दयालु और रहमदिल होती हैं। जानवरों से उन्हें खास लगाव होता है। शायद इसलिए भी महिलाएं पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा संख्या में वीगन हैं। जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वालों में भी महिलाओं की ही संख्या ज्यादा है। लगभग 75 फीसदी। 1940 में अमेरिका में जानवरों के अधिकार की मांग उठाने वाली दो महिलाएं ही थीं। ऐसा भी जरूरी नहीं कि जानवरों से प्यार करने वाली महिलाएं मांस बिल्कुल ही ना खाएं। कई स्टडी से पता चलता है कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो जानवरों से हमदर्दी तो करते हैं, लेकिन मांस खाना भी पसंद करते हैं।