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वो जगह जहां नानक देव ने बोली थी गुरुवाणी, हसीन वादियों में बने इस गुरूद्वारे जरूर जाएं
Mon, 05 Aug 2019 06:04 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Mon, 05 Aug 2019 06:04 PM IST
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सैर करने की इच्छा तो हर किसी को होती है। पहाड़ों की हसीन वादियों को देखना हो या इतिहास से समृद्ध किले, सबका अपना रोमांच होता हैं। लेकिन अगर आप खूबसूरत नजारों के साथ ही पहाड़ों की हसीन वादियों का मजा लेना चाहते हैं और सोचते हैं कि कुछ वक्त धर्म कर्म में भी बिताना चाहिए तो आपको धरती के स्वर्ग में जरूर जाना चाहिए। भारत का स्विटजरलैंड कहें जाने वाले कश्मीर में ऐसी बहुत सी जगहें हैं जहां आप जा सकते हैं।
अनंतनाग में बना है मटन साहिब गुरुद्वारा
हालांकि पूरा कश्मीर ही घूमने लायक जगह है। लेकिन कुछ जगह ऐसी भी हैं जिनका नाता केवल यहां कि खूबसूरती से ही नहीं हैं बल्कि इन जगहों की धार्मिक मान्यता से भी है। हम बात कर रहें है अनंतनाग की। कश्मीर के इस जिले में बहुत सी खूबसूरत घाटियां है जिन्हें आपको जीवन में एक बार जरूर देखना चाहिए। इन खूबसूरत घाटियों में एक स्थान है जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों में ही महत्व बहुत ज्यादा है। आइए जाने वो कौन सी जगह है।
अनंतनाग जिले में बना है सिखों का परम पवित्र गुरुद्वारा श्री मटन साहिब। इस गुरुद्वारे की खासियत इसकी धार्मिक मान्यता है। कहते हैं कि इस जगह पर नानक साहब ने अपने अमृत वचन बोले थे। पहले ये जगह गुरु नानक देव के थड़े के रूप में जानी जाती थी। बाद में इस जगह पर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया।
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क्या है ऐतिहासिक महत्व
कश्मीर की हसीन वादियों में बसे अनंतनाग में बने इस गुरुद्वारे का दर्शन करने का मौका नही छोड़ना चाहिए। कहते हैं कि नानक देव अपनी तीसरी यात्रा के दौरान भ्रमण करते हुए इस खूबसूरत जगह पर आकर ठहरे। उस स्थान को मटन के नाम से जानते हैं। इसी स्थान पर सबसे पहले गुरू नानक देव ने गुरुवाणी का उच्चारण किया था।
कश्मीर की हसीन वादियों में बसे अनंतनाग में बने इस गुरुद्वारे का दर्शन करने का मौका नही छोड़ना चाहिए। कहते हैं कि नानक देव अपनी तीसरी यात्रा के दौरान भ्रमण करते हुए इस खूबसूरत जगह पर आकर ठहरे। उस स्थान को मटन के नाम से जानते हैं। इसी स्थान पर सबसे पहले गुरू नानक देव ने गुरुवाणी का उच्चारण किया था।
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मटन से 12 किमी दूर बिजवाड़ा नामक जगह पर पंडित ब्रह्म दास नाम के विद्वान रहते थे। जब पंडित ब्रह्म दास को पता चला कि कोई फकीर उस क्षेत्र में उपदेश दे रहा है तो उनसे रहा नहीं गया और वे भी अपने ज्ञान का बखान करने पहुंच गए और नानक देव से संवाद की चुनौती दी क्योंकि उनको अपने ज्ञान का बहुत घमंड हो गया था। नानक देव ने उन्हें समझाया कि ज्यादा ज्ञान के कारण आप अपनी इंद्रियों को अपने वश में नहीं कर पा रहे हैं। गुरू नानक देव ने अपने उपदेश से पंडित ब्रह्म दास का अहंकार तोड़ा।