इस नंवबर घूम आएं '' वीर लोरिक पत्थर '' रिश्ते में आ जाएगी नई जान
सोनभ्रद के तट पर अगोरी नाम का एक राज्य था। वहां का राजा मोलाभागत बेहद ही क्रूर और हिंसावादी था। वह मेहर नाम के एक व्यक्ति से बेहद ईर्ष्या करता था। मोलाभागत की नजर मेहर की बेटी मंजरी पर थी। जब मंजरी बड़ी हुई तब उसे एक वीर लोरिक नाम के व्यक्ति से प्यार हो गया था। जब इस बात की खबर उसके पिता को लगी तब उसने वीर लोरिक के यहां पत्र भिजवाया और जल्द से जल्द शादी करने को कहा।
अब समय वह समय आ गया था जब वीर और मंजरी एक होने वाले थे। लेकिन वीर लोरिक यह जानता था कि मोलाभागत उसकी शादी सपन्न नहीं होने देगा। मोलाभागत ने भी शादी को रोकने के लिए सारे उपाय किए हुए थे ताकि बारात सोन नदी को पार न कर पाएं। लेकिन भीषण युद्ध और खून -खराबे के बाद बारात अगोरी पहुंच गई थी। इस युद्ध में मोलाभागत और उसके सारे सैनिक समेत बलशाली इंद्रावत नामक हाथी भी मारा गया था। इस हाथी का एक प्रतीक प्रसतर किले के सामने सोन नदी में आज भी नजर आता है। सिर्फ इतना ही नहीं मोलाभागत और कई राजाओं के साथ वीर लोरिक के युद्ध के चिन्ह प्रतीक आज भी किले के आस-पास दिखाई देते हैं।
मंजरी ने अपने पति वीर लोरिक के अपार बल को एक बार और देखने की मांग करते हुए कहा कि कुछ ऐसा करो जिससे यहां के लोग और पूरी दुनिया याद रखें। वीर लोरिक ने यह शर्त मजूंर कर ली और मंजरी से पूछा कि बताओ मुझे क्या करना है ? ऐसे में मजंरी ने एक विशाल चट्टान की तरफ देखते हुए कहा कि अपनी तलवार से इस चट्टान के दो हिस्से कर दें। वीर लोरिक ने अपनी पूरी शक्ति से चट्टान के दो हिस्से कर दिए और अपनी प्रेम की परीक्षा में सफल हो गए।
अगर आप भी इस ऐतिहासिक प्यार की गाथा को देखना चाहते हैं तो आप रेल मार्ग से वीर लोरिक पत्थर जा सकते हैं। सोनभद्र रेल दिल्ली , इलाहाबाद, रांची और पटना से जुड़ी हुई है।