राजस्थान के अलवर जिले में स्थित यह है भानगढ़ का किला। इस किले को कुछ लोग प्रेत बाधित तो कुछ तांत्रिक द्वारा शापित मानते हैं। यह किला वर्षों से एक रहस्य है। भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने इस किले में रात के समय प्रवेश वर्जित कर रखा है।लेकिन जानकर हैरानी होगी कि जिसने रानी रत्नावती की कहानी और दुष्ट जादूगर से परे भानगढ़ किले के पास उजड़ चुके गांव एक बार फिर बस चुके हैं और पर्यटकों का आना जाना भी पहले की तरह शुरू हो गया क्योंकि इसके पीछे की वजह दिलचस्प है।
लगभग 100 साल पहले, अजबगढ़ के झिंझड़ गांव में डरावने अनुभवों के किस्से थे। भारत के सबसे प्रेतवाधित स्थानों में से एक भानगढ़ किला के पास होने की वजह से अजबगढ़ गांव में देखे गए अजीब अनुभवों के कारण लोग गांव छोड़कर जाने लगे। इसके अलावा, जादूगर और काला जादू करने वालों ने गांव को शाप दिया, जिससे लोगों को अपने डर से घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। मवेशियों को चारा ना दे पाने और खेतों में पानी ना पहुंचने की वजह से लोग महानगरीय क्षेत्रों में आजीविका की तलाश में निकल गए।
2018 से माना जाता है कि अजबगढ़ का भूत गांव अब वापस पटरी पर आ रहा है। छोड़े हुए गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर एक नई सभ्यता की शुरुआत हुई है जहां एक समुदाय ने निर्माण शुरू किया है। जो दूसरी जगह पर चले गए थे, वे अब घर वापसी कर रहे हैं, किसी तरह का श्राप गांव को फिर बसने से नहीं रोक पाया, गांव अब 'दशकों से सूखे के संकट' से उबर रहा है।
कुछ साहसी लोगों और ’वाटर मैन’ राजेंद्र सिंह द्वारा 35 साल पहले अजबगढ़ में शुरू किए गए जल संचयन और संरक्षण प्रयासों ने असर दिखाया है। ग्रामीण 2,500 परिवारों के लिए न केवल बैंगन, सरसों, भिंडी, टमाटर, गेहूँ उगा रहे हैं, बल्कि शहरों में बेच भी रहे हैं।अब नए अजबगढ़ में मकान, दुकानें और एक सरकारी स्कूल हैं, जिसने रानी रत्नावती की कहानी और दुष्ट जादूगर से परे भानगढ़ किले के आसपास पर्यटकों को उस स्थान और गांव की यात्रा करने की संभावनाएं खोल दी हैं।हालांकि, ग्रामीण अभी भी बुरी आत्माओं से बचाव के लिए सुरक्षा रखते हैं।