भारत तीर्थों का देश है। यहाँ हर क्षेत्र में आपको विभिन्न धर्मों के तीर्थ और उनसे जुड़ी कई अद्भुत कथाएं सुनने को मिलेंगी। धार्मिक और ऐतिहासिक तौर पर तो इन स्थानों का महत्व है ही, इसके साथ ही इनके आस पास मौजूद प्राकृतिक परिवेश मन को शांति देने का काम भी करता है। चाहे वह फिर केदारनाथ हो, बद्रीनाथ, रामेश्वरम, महेश्वर, वैष्णोदेवी या कोई भी अन्य तीर्थ। सात पहाड़ियों के ऊपर बसा विष्णु स्वरूप भगवान वेंकटेश का भव्य और अद्भुत मंदिर तिरुपति बालाजी भी ऐसा ही एक तीर्थस्थल है। यहां प्रभु दर्शन के साथ ही आपको प्रकृति के मनमोहक नजारे भी दिखेंगे और दक्षिण भारतीय स्वाद का आनंद भी मिलेगा।
Tirupati Tirumala Tour: प्रभु दर्शन और खूबसूरत नजारों की सौगात
जहाँ भगवान बहुत कम विश्राम करते हैं
पहाड़ों के ऊपर बिराजे भगवान वेंकटेश के दर्शन करने लोग देश-विदेश से बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसी मान्यता है कि ये दुनिया के सबसे अमीर भगवान हैं। इसका प्रमाण आपको तब मिलता है जब दर्शन के लिए लाइन में लगे हुए लोग आपके सामने वेंकटेश्वरा वेंकटेश्वरा, गोविंदा गोविंदा, कहते हुए अपने पहने हुए गहने और जेब से पूरा का पूरा बटुआ निकाल कर दान पात्र में निसंकोच डाल देते हैं। भगवान सुबह से लेकर लगभग पूरी रात भक्तों को दर्शन देते हैं और इसलिए यह मान्यता भी है कि यहाँ भगवान महज एक घंटे का ही विश्राम करते हैं क्योंकि उन्हें दर्शन के लिए आतुर हर भक्त को दर्शन देने होते हैं।
मनमोहक नजारों और प्राकृतिक उपहारों से सजा
मंदिर प्रांगण से जो खुले आसमान का नजारा आपको दिखाई देता है वह तो अद्भुत है ही, खासकर रात के दर्शनों के दौरान। इसके अलावा मंदिर की ओर पहाड़ी रास्ते से जाते समय, शहर में घूमते हुए भी आपको प्रकृति का संगीत सुनाई देगा। अगर आपको दर्शनों का समय रात 1-सुबह 5 के बीच का मिला है तो भी यह महसूस होगा ही नहीं कि आप आधी रात से लाइन में लगकर चल रहे हैं। दर्शन करके जब बाहर निकलेंगे तो आसमान में बिखरे रंग आपको एक अलग ही तरह ही संतुष्टि, शांति और सकारात्मकता से भर देंगे। ठंडी और ताज़ी हवा आपको ख़ुशी से भर देगी।
बादलों की टोलियां
सात पहाड़ियों की ऊंचाई पर होने के कारण कई बार आपको बादल भी यहाँ घूमते-फिरते मिल जायेंगे। दर्शनों के लिए मंदिर की ओर जाते समय रास्ते में छोटे छोटे बादलों की टुकड़ियां आपसे मुलाक़ात करने आ सकती हैं। खासकर रात में तो यह नजारा और भी अद्भुत बन जाता है। ऐसा लगता है जैसे परियों की कहानियों या धार्मिक कहानियों में पढ़े चित्र साकार हो गए हों। रुई के फाहों से आस पास उड़ते बादल आपको रोमांच की सिहरन से भर जाते हैं। ऊपर से देखने पर रौशनी से जगमगाते पहाड़ और मंदिर का प्रांगण भी बेमिसाल दृश्य प्रस्तुत करता है। ऐसा लगता है मानो किसी ने पूरी तस्वीर में हीरे बिखेर दिए हों।
सात पहाड़ों के ऊपर
आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में मौजूद तिरुपति तक पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं। तिरुपति शहर नीचे बसा है जबकि तिरुमला सात पहाड़ों के ऊपर मौजूद है जहाँ मंदिर स्थित है। बैंगलोर सहित आस पास के कई स्थानों से लोग वीएंड में भी तिरुपति के लिए निकल आते हैं। सामान्य समय में लाइन में लगकर दर्शन भी दिनभर में हो जाते हैं लेकिन अच्छा यह होगा कि आप पहले से इसके लिए पूरी प्लानिंग और इंतज़ाम करके यहाँ आएं। यदि आपने अचानक कार्यक्रम बनाया है तो आप तिरुपति में रुकने का विकल्प चुन सकते हैं क्योंकि तिरुमला में मौजूद रुकने के स्थान अक्सर भरे होते हैं और इनके लिए बहुत पहले से इंतज़ाम करना होता है।