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भारत के इस गांव में रहते हैं पांडवों और कौरवों के वंशज, इतनी दिलचस्प जगह जाने से रोक नहीं पाएंगे
साल में खुद के लिए एक ट्रिप तो बनती है। व्यस्त जिंदगी में अगर आपको इतना समय भी नहीं मिला कि आप कुछ तय कर सकें तो कोई बात नहीं। आज हम आपको एक ऐसी जगह के विषय में बताने जा रहे हैं जहां पहाड़ हैं, मस्त मौसम है और मन शांत करने के लिए प्रकृति की खूबसूरती भी है। सबसे बड़ी बात कि ये यहां भागमभाग नहीं बल्कि शांति है क्योंकि ये खूबसूरत गांव है। तीन दिन का प्लान बनाकर आराम से मूड फ्रेश कर आ सकते हैं। दिल्ली से लगभग 450 किमी की दूरी पर है।
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शहर की चहल-पहल से दूर ये जगह इतनी मनोरम है कि यहां बस जाने का दिल करेगा। उत्तराखंड की में बसे इस गांव का नाम कलाप है, जो गढ़वाल क्षेत्र में स्थित है। ये गांव रूपिन नदी के किनारे 7800 फीट की ऊचाई पर स्थित है। देवदार लंबे और घने पेड़ गांव के आकर्षण में चार चांद लगा देते हैं।
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यहां पहुंचकर बंदरपूंछ पीक (6316 मीटर) कुछ अद्भुत नजारे देख सकते हैं। जबकि गांव में प्राथमिक व्यवसाय कृषि है और ये स्थान आधुनिक धारणाओं से दूर रहता है, ये काफी रोमांचित है कि सामुदायिक पर्यटन भी होता है। इसी नाम का एक एनजीओ कलाप में स्थानीय समुदाय को स्थायी पर्यटन अनुभव प्रदान करने में मदद करता है, जिसमें होम स्टे, ट्रेक और बहुत कुछ शामिल है।
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माना जाता है कि कलाप के लोग महाभारत के पांडवों और कौरव भाइयों के वंशज हैं। वास्तव में, कलाप में मुख्य मंदिर पांडव भाइयों में से एक कर्ण को समर्पित है।गांव के स्थानीय लोगों से बात करेंगे तो आपको महाभारत से जुड़े आकर्षक किस्से और सुनने को मिलेंगे। कर्ण महाराजा उत्सव नाम का एक त्यौहार भी इस क्षेत्र में मनाया जाता है। जनवरी में, आमतौर पर कलाप में पांडव नृत्य उत्सव देख सकते हैं और आप निश्चित रूप से अपनी यात्रा की योजना बनाने की सोच रहे होंगे।
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कलाप दिल्ली से लगभग 450 किमी और देहरादून से 210 किमी की दूरी पर है। देहरादून से आप गांव के निकटतम रेल स्टेशन सांखरी तक पहुच सकते हैं। फिर, आपको कलाप को दो अलग-अलग मार्गों से ट्रेक करने की आवश्यकता है जिसमें छह औरचार घंटे लगते हैं। दोनों मार्गों के लिए आपको किराए पर कूली मिल जाएंगे, बशर्ते आप कल्प एनजीओ के साथ पहले ही बात कर लें।
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