भारत में जितने सैर करने के लिए पर्यटन स्थल हैं उतने ही ऐसे स्थान हैं जहां की कोई न कोई धार्मिक मान्यता है। उत्तर प्रदेश में बसे काशी को तो साक्षात भगवान शिव की नगरी कहा जाता है लेकिन भारत में एक और स्थल है जिसे लोग भारत का दूसरा काशी कहते हैं। तो आइए जाने वो कौन सी पवित्र जगह है जिसकी हम बात कर रहे हैं।
यूपी में काशी के कर चुके हैं दर्शन तो अब रुख करें भारत के 'दूसरे काशी' की ओर
गोकर्ण एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है। इस स्थान की खासियत है कि यह दो नदियों के ऐसे संगम पर बसा है जो देखने से गाय के कान के समान लगता है जिसकी वजह से इसे गोकर्ण नाम दिया गया है।
इस छोटे से गांव के बारे में कथा प्रचलित है कि यहां पर बने सबसे प्राचीन मंदिर महाबलेश्वर की शिवलिंग दैत्यराज रावण के द्वारा लाई गई थी। इस बारे में बड़ी ही रोचक कथा प्रचलित है कि रावण भगवान शंकर को प्रसन्न करके अजेय शक्तियां प्राप्त करके उस शिवलिंग को अपने साथ लंका ले जाना चाहता था। लेकिन रावण की इस योजना से घबराकर देवताओं ने चाल चली और भगवान गणेश के साथ मिलकर धोखे से इस शिवलिंग को यहीं रखवा दिया। तब से यह शिवलिंग यहीं पर स्थापित है।
महाबलेश्वर मंदिर के अलावा यहां पर महागणपति का मंदिर, भद्रकाली मंदिर, वारादराज मंदिर और वेंकटरमण मंदिर प्रमुख है।
गोकर्ण में और भी बहुत से प्राकृतिक नजारे हैं जिन्हें देखा जा सकता है। इनमें कुडेल तट अद्भुत है। यहां के सभी समुद्री तटों में सबसे बड़ा तट है ये। इसके साथ ही ओम तट भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह हिंदू धर्म के प्रतीक ओम की आकृति के समान है।