Ashtavinayak Yatra in Maharashtra: भारत के भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध और सिद्ध मंदिर हैं। गणपति उत्सव के मौके पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए पहुंचती है। 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी है, इस दिन से गणपति उत्सव की शुरुआत हो जाती है। सबसे अधिक गणपति उत्सव की धूम महाराष्ट्र में होती है। महाराष्ट्र में ही सबसे प्रसिद्ध गणपति मंदिर सिद्धिविनायक स्थित है। इसके अलावा अष्टविनायक मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है, जो महाराष्ट्र में ही है।
Ganpati Utsav: गणपति उत्सव पर तस्वीरों में करें अष्टविनायक के दर्शन, यहां विराजते हैं 8 स्वरूपों में गणपति
मोरगांव में मयूरेश्वर
महाराष्ट्र के पुणे जिले में बारामती तालुका में मोरगांव नाम का स्थान है, जहां मयूरेश्वर विनायक मंदिर है। अष्टविनायक मंदिरों में से एक मयूरेश्वर विनायक का आकार मोर के जैसा है, इस कारण इसे मोरगांव कहते हैं। त्रेता युग में सिंधु नाम के राक्षस सिंधुरासुर का वध करने के लिए भगवान गणेश ने मयूरेश्वर के रूप में 6 भुजाओं में श्वेत रंग धारण किया था और मोर को वाहन बनाया था।
इस मंदिर का निर्माण काले पत्थर से हुआ है। दूर से देखने में मंदिर मस्जिद को चित्रित करता है, क्योंकि मुगल काल में मंदिरों को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए यहां मीनारों का निर्माण कराया गया था।
सिद्धटेक में सिद्धिविनायक
अहमदनगर जिले के काराट तालुका के सिद्धटेक में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर आठ अष्टविनायक यात्रा का हिस्सा हैं। मान्यता है कि मधु-कैटभ नाम के दो असुरों का वध जब भगवान विष्णु नहीं कर पा रहे थे, तो उन्होंने शिव जी से मदद मांगी। इस पर भगवान शिव ने उन्हें युद्ध से पहले गणेश जी का आह्वान करने को कहा। विष्णु जी ने इसी स्थान पर भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापित करके पूजा की।
इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान सिद्धटेक मंदिर का निर्माण कराया। सिद्धिविनायक मंदिर एक पहाड़ी पर है, जिसका मुख उत्तर की ओर है। मंदिर के पश्चिम भाग में शंकर जी और देवी शिवी का छोटा सा मंदिर है।
पाली में बल्लालेश्वर
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में अम्बा नदी के पास पाली गांव में स्थित बल्लालेश्वर विनायक मंदिर है। मान्यता है कि भगवान गणेश ने यहां ब्राह्मण वेश में बल्लाल को दर्शन दिया और हमेशा के लिए यहां वास करने का वरदान दिया। इसलिए इस मंदिर का नाम बल्लालेश्वर विनायक के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मंदिर का मूल निर्माण लकड़ी द्वारा किया गया था। मंदिर परिसर में यूरोपियन शैली की विशाल घंटी है, जो पुर्तगालियों के खिलाफ जीत के बाद स्थापित की गई थी। दक्षिणायन के समय सूर्य उदय होने पर सूर्य की किरणें भगवान गणेश पर पड़ती हैं।
लेण्याद्री में गिरिजात्मक
गिरिजात्मक विनायक मंदिर का नाम भगवान गणेश की माता पार्वती (गिरिजा) के नाम पर पड़ा है जो कि पुणे जिले के जुन्नार तालुका में स्थित है। इस गणेश मंदिर के दर्शन के लिए भक्तों को 307 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ी पर जाना होता है।यह वही स्थान है, जहां माता पार्वती ने गणेश जी की मूर्ति को आकार दिया और मिट्टी की मूर्ति जीवित हो गई। यहां गणपति जी की मूर्ति पहाड़ में स्वयं प्रकट हुई। दक्षिण की ओर मुख वाला यह गणपति मंदिर अठारह गुफाओं की श्रृंखला में आठवीं गुफा पर स्थित है। पुणे हवाई अड्डे से 97 किमी और मुंबई से 156 किमी दूरी पर है। गिरिजात्मक गणपति से सबसे निकटतम रेवले स्टेशन 96 किमी दूर पुणे रेलवे स्टेशन है।