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सेक्स से फैलने वाला वो खतरनाक वायरस, जिसका नहीं है कोई इलाज

Wed, 24 Jun 2020 09:12 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Wed, 24 Jun 2020 09:12 PM IST
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sexually transmitted infections dangerous virus that has no cure
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

एचपीवी यानी ह्यूमन पेपिलोमा वायरस एक बेहद खतरनाक, आम और सबसे तेजी से फैलने वाला वायरस है। इतना ही नहीं अधिकतर मामलों में इस वायरस से होने वाली बीमारी के लक्षण भी मालूम नहीं चलते। जिसके कारण न तो प्रभावित व्यक्ति को बीमारी का पता चलता है और न ये पता चलता है कि उनसे ये बीमारी उनके पार्टनर को भी हो रही है। एचपीवी वायरस कैसे फैलता है और इससे कैसे बचा जा सकता है। ये जानना बेहद जरूरी है।

sexually transmitted infections dangerous virus that has no cure
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

यह वायरस यौनांग और गुदा की त्वचा के एक-दूसरे से संपर्क में आने से फैलता है। मतलब ये जरूरी नहीं कि सेक्सुअल पेनेट्रेशन होगा तभी दो व्यक्ति के बीच ये वायरस फैलेगा। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सेक्स गतिविधियों और ओरल सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल किया जाए तो इस संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

एचपीवी वायरस के बारे में वो पांच बातें, जो जानना जरूरी है...
सबसे पहली बात ये कि यौन रूप से सक्रिय 80 फीसदी महिला और पुरुष जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित होते हैं। यूके पब्लिक हेल्थ सर्विस, एनएचएस और अमेरिक एसोशिएशन ऑफ सेक्सुअल हेल्थ इसकी पुष्टि करते हैं। अमरीका में यह यौन रूप से फैलने वाली सबसे आम बीमारी है। जामा ऑनकोलोजी पत्रिका में छपे राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक सेक्स में शामिल 2000 में से आधे पुरुषों को यह संक्रमण था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दूसरी जरूरी बात कि एचपीवी से 6 तरह के कैंसर हो सकते हैं। एचपीवी गर्भाशय कैंसर के लिए 99 प्रतिशत (एनएचएस की जानकारी के मुताबिक), गुदा कैंसर के लिए 84 प्रतिशत, लिंग कैंसर के लिए 47 प्रतिशत जिम्मेदार होता है। इसके अलावा इसके संक्रमण से योनिमुख, योनि, गले और मुंह का कैंसर भी होता है। एचपीवी वायरस की सौ से अधिक किस्में पाई गई हैं। इनमें से 30 किस्में प्रजनन अंगों को प्रभावित करती हैं। एचपीवी-16 और एचपीवी-18 वायरस सबसे खतरनाक होते हैं। ये गर्भाशय कैंसर के लिए 70 प्रतिशत से अधिक जिम्मेदार होता है। अधिकांश लोग कभी ना कभी एचपीवी से संक्रमित होते हैं, लेकिन उनका प्रतिरक्षा तंत्र इस वायरस से उनकी रक्षा करता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

तीसरी, आमतौर पर एचपीवी संक्रमण का कोई लक्षण नहीं होता। इसलिए इसका पता लगाना आसान नहीं है। महिलाओं में उनके गर्भाशय की कोशिकाओं के नमूने की जांच करके उनमें एचपीवी के संक्रमण का पता लगाने लगाया जा सकता है। इसके लिए दो तरह के जांच की मदद ली जाती है। एक वजाइनल साइटोलॉजी यानी कोशीय जांच और दूसरी पेप टेस्ट या पेपनिकोलाई जांच। लेकिन पुरुषों में अभी भी इस वायरस के संक्रमण का पता लगाने का कोई विश्वसनीय तरीका नहीं मिला है।

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