कोरोना के कारण विश्व ने अबतक का सबसे बड़ा लॉकडाउन देखा है। भारत भी लगभग 3 महीने तक बंद रहा। इस दौरान दफ्तर पूरी तरह से बंद रहे। लोगों ने अधिक से अधिक काम घर से ही किए हैं। ये वो स्वर्णिम समय था जब कई बच्चे जो कि पापा से बात करने में भी संकोच करते थे, उन्होंने पापा के साथ खेल खेले। वे युवा जो दादी- नानी की बचपन की कहानियों को बहुत याद करते थे, उन्हें एकबार फिर कहानी सुनने का मौका मिल गया। इतना समय साथ रहने पर परिवार के सदस्य एक-दूसरे को और करीब से जानने लगे। अगली स्लाइड्स के माध्यम से आइए देखते हैं अतीत के झरोखे से कि इस दौरान कई सारे परिवारों ने साथ मिलकर क्या-क्या किया।
Year Ender 2020: लॉकडाउन ने दिया परिवार के साथ कीमती समय बिताने का मौका
बच्चों ने पापा को खाना बनाते देखा
कई सारे घर ऐसे हैं जहां पुरुष बाहर का काम संभालते हैं और महिलाएं घर के काम में ही व्यस्त रहती हैं और यह घर का नियम बन चुका है लेकिन यह नियम लॉकडाउन में टूट गया। लॉकडाउन में कई बार घर के पुरुषों के सदस्यों ने किचन की बागडोर संभाली है। इस बीच कई सारी खूबसूरत यादें और अजीबोगरीब रेसिपीज बनी हैं। जिन्हें सालों तक घर के सभी सदस्य याद करते रहेंगे।
शादी की कैसेट देखी
लॉकडाउन के गर्मी भरे दिनों में अक्सर घरों में दोपहर का समय ऐसा होता था जब पूरा परिवार फ्री होता था। इस समय लोगों ने कई सारी फिल्में देखीं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मम्मी-पापा की शादी की कैसेट देखने में जितना मजा बच्चों को आया है उतना मजा किसी फिल्म को देखने में नहीं आया है। वहीं मम्मी- पापा भी अपने पुराने दिनों को याद करके बहुत खुश हुए हैं।
तरह-तरह की प्रतियोगिता
इस दौरान कई सारे संयुक्त परिवारों में तो अपनी रचनात्मकता को प्रस्तुत करने के लिए तरह-तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ है। जिसमें घर के सभी सदस्य किसी विशेष विषय के अनुसार सज धजकर तैयार हुए हैं। पूरे के पूरे परिवार ने दादी की वो पुरानी डायरी से भजन गाए हैं तो इन्हीं दिनों में बच्चों को घर की महिला सदस्यों का घूमर नाचते हुए वीडियो बनाने का मौका भी मिला है।
पारंपरिक खेल खेले
लॉकडाउन के कारण ही यह संभव हो पाया है कि घर की तीन-तीन पीढ़ियों ने एक साथ लूडो, सांप सीढ़ी एवं लंगड़ी जैसे खेल खेले हैं। इस दौरान नए बच्चे जो कि मोबाइल पर ही अबतक खेल खेल रहे थे, उन्होंने जब ये खेल खेले, अपने पापा और दादू को हराया तो उनकी खुशी सातवें आसमान पर थी। बड़ों को भी बच्चों के साथ इस तरह से खेलकर बहुत आनंद आया।