Signs Of Over Caring Relationship: रिश्ते में प्यार, देखभाल और परवाह, ये सभी जरूरी हैं, लेकिन जब ये जरूरत से ज्यादा हो जाएं, तो कई बार सामने वाले को घुटन, दबाव, या बोझ महसूस होने लग सकता है। आज के दौर में जहां व्यक्ति स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता है, वहां हर वक्त सवाल करना, हर चीज में टोकना या हर समय साथ रहना प्यार नहीं, बल्कि ओवर केयरिंग माना जाता है। प्यार में परवाह हर किसी को अच्छी लगती है लेकिन जरूरत से ज्यादा परवाह साथी को आपसे दूर कर सकती है। पार्टनर की देखभाल दबाव बन जाती है और पता भी नहीं चलता कि कब प्यार रिश्ते पर बोझ बनने लग जाता है। इस लेख में बताया जा रहा है कि किस हद तक परवाह करना सही है और कब यह रिश्ते को नुकसान पहुंचाने लगता है।
Relationship Advice: प्यार में दम घुटने लगा है? वजह हो सकती है आपकी जरूरत से ज्यादा परवाह
Signs Of Over Caring Relationship: पार्टनर की देखभाल दबाव बन जाती है और पता भी नहीं चलता कि कब प्यार रिश्ते पर बोझ बनने लग जाता है। इस लेख में बताया जा रहा है कि किस हद तक परवाह करना सही है और कब यह रिश्ते को नुकसान पहुंचाने लगता है।
ज्यादा परवाह करने के पांच संकेत
बार-बार काॅल या मैसेज करना
जब कपल दिनभर नौकरी या किसी अन्य काम के कारण एक दूसरे से दूर होते हैं तो उन्हें एक दूसरे की याद आती है। एक-दो बार अपने पार्टनर को काॅल या मैसेज करना, उनका हाल-चाल पूछना सामान्य है लेकिन कई पार्टनर्स अपने साथी को दिन में कई बार, या 10-15 मिनट के अंतराल में मैसेज भेजने लगें या हर आधे व एक घंटे में काॅल करें तो साथी परेशान हो जाता है। वह अपने काम को सही से करने में सक्षम नहीं होता और बार-बार पार्टनर के मैसेज या काॅल से डिस्टर्ब होने लगता है।
पार्टनर की हर गतिविधि पर नजर रखना
कई बार आपका परवाह पार्टनर के जीवन में अत्यधिक हस्तक्षेप करने लगती है। कई लोग अपने साथी की फिक्र में इतना गंभीर हो जाते हैं कि वह उनकी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। साथी सुबह कब उठा, कितने बजे घर से निकला, कब दफ्तर पहुंचा, किससे मिला, दिनभर क्या किया और कब सोया, ऐसी दिनभर की हर एक्टिविटी के बारे में जानना चाहता है। पार्टनर की इस कद्र की परवाह सामने वालों को परेशान कर सकती है।
उनके फैसलों में दखल देना
परवाह करना सामान्य है लेकिन जब आपकी यही फिक्र उनके फैसलों पर हावी होने लगे तो रिश्ते में दूरियां संभव है। आप पार्टनर को सलाह दे सकते हैं लेकिन उनके हर फैसले में दखल देना परवाह करना नहीं, दबाव बनाना है। आप उनके फैसलों को मान्यता नहीं दे रहे या आप उनके फैसलों का सपोर्ट नहीं करते।
बिना पूछे मदद करना या सलाह देना
कुछ लोग हर वक्त अपने पार्टनर को प्रोटेक्ट करना चाहते हैं। इसके लिए वह एक साधारण सी बात को भी नजरअंदाज कर देते हैं कि मदद या सलाह मांगने पर दी जानी चाहिए। बिना कहे साथी की मदद करना, हो सकता है कि उसे पसंद न आए। पार्टनर को लग सकता है कि आपको उनकी क्षमताओं पर भरोसा नहीं है।
अपनी इच्छाएं उन पर थोपना
कई बार रिश्ते में एक साथी सारे फैसले लेने लगता है। वह अपनी इच्छाएं पार्टनर पर थोपता है, क्योंकि उसे महसूस होता है कि जो वह चाहता है वही उन दोनों के और रिश्ते के लिए बेहतर है। अपनी इच्छाओं को रिश्ते के भविष्य के लिए जरूरी मानकर वह साथी की इच्छाओं, उसके फैसलों की परवाह करना भूल जाता है। जिससे इस रिश्ते में सिर्फ वह खुद रह जाता है और उसका पार्टनर कब का भावनात्मक रूप से रिश्ते से बाहर हो जाता है।
ओवर केयरिंग पार्टनर के नुकसान
- ओवर केयरिंग पार्टनर के कारण रिश्ते में घुटन या स्वतंत्रता में बंदिश महसूस हो सकती है। साथ ही ओवर केयरिंग पार्टनर रिश्ते में अत्यधिक स्वतंत्रता महसूस करने लगता है।
- पार्टनर के इस तरह के बर्ताव से रिश्ता धीरे-धीरे टॉक्सिक बन सकता है।
- पार्टनर की जरूरत से ज्यादा परवाह साथी के लिए प्यार की जगह झुंझलाहट बन जाती है और वह रिश्ते से उबने लगता है।
- साथी की अत्यधिक फिक्र सामने वाले के आत्म-सम्मान पर असर डालती है। उसे महसूस होता है कि इस रिश्ते में उसकी कोई वैल्यू नहीं है।
- जरूरत से ज्यादा प्यार से पार्टनर दबाव महसूस करने लगता है। वह भावनात्मक रूप से अपने पार्टनर से दूर होने लग सकता है।
रिश्ते में प्यार का संतुलन बनाने के लिए क्या करें
- अत्यधिक प्यार और परवाह पार्टनर पर थोपने की बजाए उसे इस रिश्ते में स्पेस और भरोसा दें
- संवाद के जरिए अपनी भावनाएं साझा करें। आप दोनों एक दूसरे के लिए और एक दूसरे से बर्ताव से क्या महसूस करते हैं, खुलकर इस पर चर्चा करें।
- अत्यधिक फिक्र या प्यार को इस कदर मन पर हावी न होने दें कि खुद को ही भूल जाएं। खुद की पहचान और खुशियों को भी महत्व दें।
- समय-समय पर रिश्ते को रीसेट करें। साथ में क्वालिटी टाइम बिताएं और एक दूसरे को समझें।
- पार्टनर पर टोकाटाकी से बचें। अगर आपके और पार्टनर के विचार में सहमति नहीं बन पा रही है तो विनम्रता से बात करें।