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कहीं आपको भी तो नहीं लग गई सेक्स की लत? ये लक्षण हैं तो संभल जाएं

Fri, 13 Dec 2019 12:24 PM IST
बीबीसी Published by: निलेश कुमार Updated Fri, 13 Dec 2019 12:24 PM IST
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sex addiction symptoms know about hypersexuality
सांकेतिक तस्वीर

अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन का एक कथन प्रचलित है। उन्होंने कहा था, "सिगरेट छोड़ना आसान था, मैंने ऐसा 100 बार किया।" हालांकि बहुत मुमकिन है उन्होंने ऐसा कभी ना कहा हो। बाद में उनकी मौत फेफड़ों के कैंसर से हो गई थी।



एक समाज के तौर पर हमने निकोटीन, शराब और ड्रग्स जैसी नशीली चीजों की लत को स्वीकार किया है। हमने इनसे होने वाले नुक़सान को भी स्वीकार किया है। लेकिन अगर बात सेक्स की लत की हो तो विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि सेक्स की लत होती है और कुछ इसे नकारते हैं।

सेक्स की लत फिलहाल बीमारी नहीं है और इसलिए अभी कितने लोगों ने इसे लेकर चिकित्सकीय परामर्श मांगा है, इसका अधिकारिक डेटा भी उपलब्ध नहीं है। पोर्न और सेक्स की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए विकसित की गई एक वेबसाइट ने ब्रिटेन में 21,000 लोगों पर सर्वे किया। इन लोगों ने साल 2013 के बाद से वेबसाइट से मदद के लिए संपर्क किया था। इनमें से 91 फीसदी पुरुष थे और सिर्फ 10 ने ही अपनी परेशानी के लिए डॉक्टर से परामर्श लिया था।

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विशेषज्ञों की राय
सेक्स की लत को 2013 के 'डायग्नोस्टिक एंड स्टेटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसआर्डर्स' (डीएसएम) में शामिल करने पर विचार किया गया था, लेकिन सबूतों के अभाव में इसे शामिल नहीं किया गया। डीएसएम अमरीका और ब्रिटेन में एक अहम डायग्नोस्टिक टूल है।

लेकिन अब कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर (बाध्यकारी यौन व्यवहार) को विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी होने वाले 'मैनुअल इंटरनेशनल क्लासीफिकेशन ऑफ़ डिसीज' (आईसीडी ) में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

नए सबूत सामने आने के बाद जुआ खेलने की लत और ज्यादा खाने की लत को भी 2013 में बीमारी के रूप में स्वीकार कर लिया गया था। पहले जुए को बाध्यकारी व्यवहार ही माना जाता था। थेरेपिस्टों का मानना है कि सेक्स की लत भी ऐसे ही इसमें शामिल हो सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दिमाग में क्या क्या चलता है
एक शोध से पता चलता है कि सेक्स की लत का शिकार कोई व्यक्ति जब पोर्न देखता है तो उसके दिमाग में ऐसी ही गतिविधियां होती हैं जैसी किसी नशे की लत के शिकार व्यक्ति के दिमाग में ड्रग्स दिखने पर होती है। किसी व्यक्ति को सेक्स की लत है या नहीं- ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस चीज को लत मानते हैं और इसकी कोई निर्धारित आधिकारिक व्याख्या नहीं है।

ओपन यूनिवर्सिटी में एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. फ़्रेडरिक टोएट्स कहते हैं कि अगर ये कोई ऐसी चीज है जिस पर कोई शारीरिक रूप से निर्भर है और जिसे छोड़ने पर शारीरिक चोट पहुंचेगी तो फिर सेक्स लत नहीं हो सकती है।  हालांकि उनका मानना है कि विस्तृत व्याख्या अधिक मददगार होगी।

डॉ. टोएट्स कहते हैं कि किसी भी लत की दो पहचान होती हैं- आनंद या रिवॉर्ड की चाह और इस व्यवहार के इर्द-गिर्द संघर्ष का होना। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिफल की चाह ही लत को बाध्यकारी व्यवहार से अलग करती है। हालांकि दोनों में बहुत हद तक समानताएं हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

प्रोफेसर टोएट्स कहते हैं कि लत के शिकार लोग अल्पकालिक फायदा देखते हैं भले ही दीर्घकाल में उन्हें नुकसान ज़्यादा हो रहा हो। इसके विपरीत बाध्यकारी व्यवहार (आब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) से प्रभावित लोग ऐसा व्यवहार भी करते हैं जिससे उन्हें कोई मज़ा नहीं मिलता। लेकिन आनंद की चाह तो हम सबमें होती है तो फिर सामान्य प्रतिफल की चाह वाले व्यवहार और लत में क्या अंतर होता है?

मनोवैज्ञानिक डॉ. हैरियट गैरॉड मानती हैं कि कोई व्यवहार तब लत बन जाता है जब वो इनता तीव्र हो जाता है कि इससे व्यक्ति और उसके इर्द-गिर्द मौजूद लोगों को नुक़सान पहुंचने लगे। वो कहती हैं कि जुआ खेलने या अधिक खाने की लत को बीमारी मान लिया गया है, लेकिन सेक्स की लत को नहीं क्योंकि वो जनमानस में लंबे समय से हैं।

इसका मतलब ये है कि जुए और अधिक खाने के मामले में ज़्यादा लोग मदद लेने के लिए सामने आए हैं जिससे उनको बीमारी होने के समर्थन में अधिक सबूत मिले हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

डॉ. अबिगेल सान क्लिनिकल साइकॉलजस्ट हैं जो मानती हैं कि सेक्स संबंधी व्यवहार की भी लत हो सकती है, लेकिन जो लोग इस भावना के नियंत्रण से बाहर होने का सामना कर रहे हैं उनके लिए सेक्स किसी और छुपी हुई समस्या की वजह भी हो सकता है जैसे कि वो अवसाद, चिंता या आघात से उबरने के लिए सेक्स का सहारा लिया जाना।

वो कहती हैं, "अलग-अलग गतिविधियां और मादक पदार्थों से जुड़ी गतिविधियां अलग-अलग तरीके से प्रतिफल देती हैं, लेकिन बात ये है कि वो प्रतिफल देती हैं। ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि सेक्स भी इस तरह से काम न करता हो, लेकिन बात ये है कि इसके अभी हमारे पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।"

हालांकि वो इस बात से संतुष्ट नहीं हैं कि सेक्स को लत मान लेने से लोगों की मदद होगी, ख़ासकर उनकी जो सेक्स का इस्तेमाल दूसरी समस्याओं से निबटने के लिए कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे ओवर डायग्नोसिस की समस्या पैदा हो सकता है यानी ग़लत दवाइयां दी जाएं या लक्षण को ठीक से एनालाइज़ न किया जाए।

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