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Sharenting: क्या होती है शेयरेंटिंग, खुद माता-पिता पहुंचाते हैं बच्चे की निजता और सुरक्षा को नुकसान

Fri, 08 Nov 2024 05:33 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 08 Nov 2024 05:33 PM IST
सार

आप अपने बच्चे की हर तरह की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करती हैं। किसी में वह रो रहा है तो कहीं 99 फीसदी अंकों के साथ पास हुआ है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आपकी इस शेयरेंटिंग का बच्चे के मन पर क्या असर पड़ेगा और यह उसे नुकसान पहुंचा सकती है? जानकार शेयरेंटिंग को डिजिटल ओवर शेयरिंग कहते हैं।
 

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Parenting Tips What is Sharenting Side Effects in hindi Know Risks And Dangers Of Sharenting
शेयरेंटिंग क्या होता है और इससे बचना क्यों जरूरी है - फोटो : Istock

मोनिका अग्रवाल



“दीदी, यह क्या किया आपने? सुहाना की सारी डिटेल्स फेसबुक पर शेयर करने की क्या जरूरत थी?” शिखा ने अपनी बड़ी बहन साधना को कॉल करके कहा तो साधना चहकते हुए बोली, “अरे, क्यों न करूं? मेरी बेटी का मेडिकल एंट्रेंस क्लियर हुआ है, बताना तो पड़ेगा न सबको।” इस बात पर शिखा ने दोबारा से कहा, “माना, बहुत खुशी की बात है, लेकिन अपने बच्चों की हर डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर करना ठीक नहीं। वक्त खराब है, आप समझ नहीं रहीं।” तभी साधना बोली, “अगर सोशल मीडिया पर नहीं डालूंगी तो लोगों को मेरी बेटी के बारे में पता कैसे चलेगा?”

साधना की इस बात पर शिखा ने फिर से दीदी को समझाते हुए कहा, “देखो दीदी, हर माता-पिता की जिंदगी में ऐसे कई पल आते हैं, जब उन्हें अपने बच्चों की उपलब्धियों पर बहुत गर्व महसूस होता है। पिछले दिनों डॉटर्स डे पर लाखों पेरेंट्स ने अपनी बेटियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उनके नाम प्यार भरे संदेश पोस्ट किए थे। ये पेरेंट्स का प्यार जताने का एक तरीका था। वहीं 12वीं और 10वीं बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट आने पर भी माता-पिता अपने बच्चों की तस्वीरें मार्कशीट के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट करना नहीं भूलते। अपने बच्चों की उपलब्धियां हर माता-पिता के लिए अहम होती हैं, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि उनकी फोटोज और जानकारियां सोशल मीडिया पर पोस्ट करें।

साधना की तरह हर चीज बिना सोचे-समझे ऐसे ही सोशल मीडिया पर शेयर कर देने को विशेषज्ञ ‘शेयरेंटिंग’ का नाम देते हैं। शेयरेंटिंग काफी समय से चलन में भी है, जिसका सबसे ज्यादा शिकार हैं बच्चे।

पहले समझें, क्या है ‘शेयरेंटिंग’

सोशल मीडिया के दौर में शेयरेंटिग काफी चलन में है। इसका मतलब है पेरेंट्स की ओर से अपने बच्चों के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर करना। इस जानकारी में फोटो, वीडियो, रिजल्ट और उनकी फ्यूचर प्लानिंग जैसी कई चीजें शामिल हो सकती हैं। अध्ययन बताते हैं कि शेयरेंटिंग एक तरह से डिजिटल ओवर शेयरिंग है। इसमें माता-पिता बच्चों के बारे में अत्यधिक जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर देते हैं।

आमतौर पर हर माता-पिता को यह बात सामान्य लगती है, लेकिन असल में इसके कई दूरगामी परिणाम बच्चे और माता-पिता, दोनों को भुगतने पड़ सकते हैं, क्योंकि एक तरह से शेयरेंटिंग से बच्चे की निजता और सुरक्षा के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कई मामलों में यह माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी का कारण भी बनता है।

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शेयरेंटिंग के नुकसान - फोटो : Freepik.com

बच्चों पर बढ़ता है दबाव

कई बार अति उत्साह में माता-पिता बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने के साथ ही ‘नेक्स्ट गोल’, ‘अगली उपलब्धि’, ‘अभी और पड़ाव पार करने हैं’ और ‘रुकना नहीं है, दूर तक जाना है’ जैसी बातें लिख देते हैं। उनका उद्देश्य बच्चों को प्रेरित करना होता है, लेकिन कभी-कभी यही बातें बच्चों के लिए दबाव बन जाती हैं, जैसा कि रौनक के साथ हुआ।

रौनक ने 10वीं क्लास में 98 प्रतिशत नंबर हासिल किए। उसकी उपलब्धि से खुश होकर रौनक के माता-पिता ने अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल पर उसकी तस्वीर के साथ लिखा, “अब कदम 100 प्रतिशत पर रुकेंगे।” बस, यह देखते ही रौनक परेशान हो गया और धीरे-धीरे उस पर मानसिक दबाव बढ़ने लगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की किसी भी पोस्ट से बच्चे तनाव में आ सकते हैं। अगर बच्चा माता-पिता द्वारा बनाए गए गोल को प्राप्त नहीं कर पाता तो उसके मन में सैकड़ों-हजारों लोगों के सामने शर्मिंदा होने का डर बैठ जाता है। इससे उसका आत्मविश्वास टूट सकता है, क्योंकि जो बातें घर की चहारदीवारी में होनी चाहिए थीं, उन्हें माता-पिता ने सोशल मीडिया पर शेयर कर सार्वजनिक कर दिया। इसलिए बच्चों को अपनी इच्छाएं या गोल आप जितना निजी तौर पर बताएंगी, उतना ही अच्छा रहेगा।
 

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शेयरेंटिंग के नुकसान - फोटो : Istock

सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

“हाय नेहा, पहचाना? सुना है, तुम मॉडलिंग करना चाहती हो। इसमें मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं।” नेहा चौंक गई और उसने पूछा, “आप मुझे कैसे जानते हैं?” इस पर उस लड़के ने बात को घुमाते हुए कहा, “अरे, तुम्हें कौन नहीं जानता! जगह-जगह तुम्हारी खूबसूरती और एक्टिंग के चर्चे हैं। विश्वास नहीं होता तो तुम शाम को सात बजे मेरे ऑफिस में आकर मिल सकती हो। लोकेशन मैं शेयर कर दूंगा।” कॉल डिस्कनेक्ट हो गई। नेहा इस बारे में सोचती रही, फिर उसने अपनी सहेली से यह बात शेयर की। दोनों जब इस बात की तह तक पहुंचीं तो पता चला कि कुछ दिन पहले उसकी मम्मी ने अपने इंस्टाग्राम पर नेहा की कॉलेज एनुअल फंक्शन की फोटो डालते हुए लिखा था- “फ्यूचर की फेमस मॉडल।”

देखा आपने शेयरेंटिंग आपके बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से आप अपने बच्चे की सभी जानकारियां, जैसे- उम्र, स्कूल, शौक, फ्रेंड सर्कल और रूटीन शेयर कर देती हैं। ऐसे में यह अपराधियों को न्योता देने जैसा हो सकता है।

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शेयरेंटिंग के नुकसान - फोटो : istock

बुलिंग का खतरा

आपको जानकर हैरानी होगी कि शेयरिंग से कई बच्चे इस चिंता में रहते हैं कि उनके माता-पिता उनकी कैसी तस्वीरें या जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट करेंगे। 13 साल की निक्की की मम्मी ने उसकी गुस्से में जिद करते हुए एक छोटी-सी वीडियो अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दी, जो कि तेजी से वायरल भी हो गई। निक्की जब स्कूल गई तो उसके दोस्त उसे छेड़ने लगे और उसकी तरह एक्टिंग करके दिखाने लगे। निक्की को ये सब बहुत बुरा लगा और वह घर आकर काफी देर तक रोती रही।

असल में, आज के समय में बच्चे अपनी सोशल इमेज को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं। उन्हें एक स्पेस चाहिए और वे अपनी छवि को खुद गढ़ना चाहते हैं, लेकिन अगर पेरेंट्स शेयरेंटिंग के आदी हैं तो इससे बच्चे पर नकारात्मक असर पड़ता है। कई बार बच्चे ग्रुप में ये फोटोज शेयर कर मजाक बनाते हैं, जिससे पीड़ित बच्चा अपमानित महसूस करता है। निक्की के साथ जो हुआ, वह आपके बच्चे के साथ न हो, इसके लिए आपको अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कुछ भी शेयर करने से पहले विचार करना चाहिए।

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शेयरेंटिंग के नुकसान - फोटो : Adobe Stock

खो सकता है बचपन

अब माही की बात देख लीजिए! उसका आधा दिन तो इंस्टाग्राम पर अपनी फोटोज और वीडियो शेयर करने में बीत जाता है। अगर वह शॉपिंग करने के लिए मॉल भी जाती है तो अलग-अलग स्टाइल की फोटोज और वीडियो बनाना नहीं भूलती। इस चक्कर में उसका पढ़ाई पर कम और सोशल मीडिया पर आकर्षक दिखने के प्रति ज्यादा फोकस रहता है।

जानकारों के अनुसार, इससे बच्चे का बचपन तक छिन सकता है। जब बच्चा यह बात जानने लगता है कि माता-पिता सोशल मीडिया पर उसकी फोटो या वीडियो शेयर करेंगे तो वह खुद को ज्यादा आकर्षक दिखाने की कोशिश करने लगता है, क्योंकि बच्चे हमेशा सबकी तारीफ चाहते हैं। ऐसे में वे खुद पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने लगते हैं। धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन जाती है। ऐसे में उनका बचपन कहीं खो जाता है। छुट्टियों में किसी हिल स्टेशन पर गए हों या त्योहारों का सेलिब्रेशन हो, कुछ बच्चों का पूरा फोकस आस-पास का माहौल महसूस करने की जगह फोटो खिंचवाने में रहता है। यह इस बात का संकेत है कि बच्चा सोशल मीडिया से अत्यधिक प्रभावित है। कई बार पोस्ट की गई फोटो पर लाइक्स और कमेंट कम आने पर बच्चे तनाव में आ जाते हैं और खुद को आकर्षक दिखाने की और अधिक कोशिशों में लग जाते हैं।

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