ज्योति मौर्या
Parenting Tips: बच्चा अगर विकलांग दोस्त की करें बात तो माता पिता को करने चाहिए ये चार काम
आपको अपने बच्चे को शारीरिक विकलांगता के बारे में सही ज्ञान देना होगा, ताकि वह उस बच्चे के साथ कोई गलत व्यवहार न करे, क्योंकि सही जानकारी और समझ के अभाव में बच्चे अक्सर अक्षमता को लेकर गलत धारणाएं बना लेते हैं, जो भेदभाव को बढ़ावा दे सकती हैं।
कैसे समझाएं
बच्चे से आपको खुले मन से बातचीत करनी होगी। आप बच्चे से उसके दोस्त के बारे में पूछें कि उसे उस बच्चे में क्या पसंद है और क्या नहीं। आप धैर्य से बच्चे की बात सुनें। ऐसा करके ही आप उसके मन की बात को समझ पाएंगी और उसे सही ज्ञान दे पाएंगी। आपका सही मार्गदर्शन बच्चे को दोस्त बनाने और उस बच्चे के साथ एक मजबूत बंधन बनाने में मदद कर सकता है।
एक उदाहरण
जब आप बच्चे को समझाने का प्रयास कर रही हों तो उससे सरल भाषा में बात करें और उदाहरणों का उपयोग करें। विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं की तुलना करके उसे समझाएं कि हर व्यक्ति अलग होता है। कुछ सफल व्यक्तियों के उदाहरण दें, जिन्होंने अक्षमता को चुनौती दी और जीवन में आगे बढ़े।
मदद के लिए प्रेरित करें
अपने बच्चे को शारीरिक रूप से असक्षम बच्चे के साथ खेलने और गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। उसे उस बच्चे की मदद करने के तरीके बताएं, जैसे कि सामान उठाना या वॉशरूम लेकर जाना। आप बच्चे के सभी सवालों का जवाब ईमानदारी और स्पष्टता से दें, लेकिन गलत जानकारी कभी न दें।
आपकी भाषा
आप खुद ‘विकलांग’ जैसे शब्दों के बजाय ‘विशेष आवश्यकता वाले’ या ‘अलग क्षमता वाले’ जैसे शब्दों का उपयोग करें, क्योंकि आप जो भी शब्द ऐसे बच्चों के लिए इस्तेमाल करेंगी, वह उनको ही सीखेगा और उनका उपयोग करेगा। खराब भाषा का उपयोग शारीरिक रूप से अक्षम बच्चे के मन को चोट पहुंचा सकता है। इसलिए आप बच्चे को ऐसी किताबें और कहानियां पढ़कर सुनाएं, जिनमें विभिन्न प्रकार की अक्षमता वाले लोग हों।
मन को बनाएं निर्मल
बच्चे में सहानुभूति और सहिष्णुता विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण है। माता-पिता के रूप में आपकी भूमिका है कि आप अपने बच्चे को एक ऐसे समाज के लिए तैयार करें, जहां सभी को समान रूप से स्वीकार किया जाता है। स्कूल काउंसलर आपके बच्चे को समझने और उसे मार्गदर्शन देने में मदद कर सकते हैं। वहीं कई ऑनलाइन संसाधन भी उपलब्ध हैं, जो आपको इस विषय पर अधिक जानकारी प्रदान कर सकते हैं।
दुखी हो तो सहारा बने
बाल मनोवैज्ञानिक गार्गी मालगुडी कहती हैं, माता-पिता को अपने बच्चे को समझाने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाना चाहिए। यदि आपके बच्चे का दोस्त शारीरिक रूप से अक्षम है तो उसे समझाना चाहिए कि उस बच्चे का दोस्त बनकर रहे और उसकी हर वक्त मदद करने के लिए तैयार रहे। माता-पिता को अपने बच्चे को थोड़ा संवेदनशील बनाने पर फोकस करना चाहिए।
आप अपने बच्चे से कहें कि क्लास में अक्षम दोस्त के साथ बैठे, उसकी पढ़ाई में मदद करे। आप उसे सिखाएं कि वह किसी भी बच्चे की शारीरिक बनावट का मजाक न उड़ाए और अगर कोई अन्य ऐसा करे तो उसे भी रोके। छुट्टी के समय बस तक पहुंचाकर उसको सीट पर बैठने में मदद करे। कभी वह दुखी हो तो उसे भावनात्मक सहारा दे। टीजिंग या गलत शब्दावली का उपयोग कभी न करे, न ही किसी अन्य को बोलने दे।0