Parenting Tips: वो कहावत है न कि जहां चार बर्तन होते हैं, वो खटकते ही हैं। ऐसे ही जिस घर में चार लोग रहते हैं, वहां लड़ाई-झगड़ा होना भी बेहद आम बात है। खासतौर पर शादीशुदा कपल्स के बीच तो लड़ाई-बहस होना बेहद आम बात है। इस दौरान परिवार के बड़े-बुजुर्ग अक्सर हस्तक्षेप करने का सोचते हैं। पर, ऐसा नहीं करना चाहिए। खासतौर पर जब लड़ाई आपके बेटे-बहू में हो रही हो तो।
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Parenting Tips: बेटा-बहू के झगड़े में कैसे न टूटे घर की शांति? माता-पिता जरूर अपनाएं ये 5 टिप्स
Sun, 06 Jul 2025 10:55 AM IST
श्रुति गौड़
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Sun, 06 Jul 2025 10:55 AM IST
सार
Parenting Tips: लड़ाई-झगड़े तो हर घर में होते हैं। ऐसे समय में घर के बड़ों को समझदारी से काम लेना चाहिए। यहां हम उनके लिए कुछ टिप्स देने जा रहे हैं।
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बेटा-बहू को लड़ता देख माता-पिता को क्या करना चाहिए
- फोटो : Adobe stock
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हस्तक्षेप करने से बचें
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हस्तक्षेप करने से बचें
जब तक झगड़ा गंभीर न हो, तब तक अपने बेटे-बहू के झगड़े में हस्तक्षेप करने से बचें। अगर आप बीच में बोलेंगे तो हो सकता है कि ये बात आपके बच्चों को अच्छा न लगे। उन्हें अपना झगड़ा खुद से ही सुलझाने दें। क्योंकि झगड़ा क्यों हो रहा है, इस बारे में सिर्फ उन्हें पता होता है। इसीलिए उन्हें अपना झगड़ा खुद ही सुलझाने दें।
जब तक झगड़ा गंभीर न हो, तब तक अपने बेटे-बहू के झगड़े में हस्तक्षेप करने से बचें। अगर आप बीच में बोलेंगे तो हो सकता है कि ये बात आपके बच्चों को अच्छा न लगे। उन्हें अपना झगड़ा खुद से ही सुलझाने दें। क्योंकि झगड़ा क्यों हो रहा है, इस बारे में सिर्फ उन्हें पता होता है। इसीलिए उन्हें अपना झगड़ा खुद ही सुलझाने दें।
पक्षपाती वाक्य तो कतई न बोलें
- फोटो : Adobe stock
पक्षपाती वाक्य तो कतई न बोलें
कभी भी "तुमने मेरी बहू से ऐसा क्यों कहा?" या "हमारे बेटे की गलती नहीं है" जैसे पक्षपाती वाक्य न बोलें। ऐसा बोलना आपके बच्चों के बीच के झगड़े को भी बढ़ा सकता सकता है। यदि आप ऐसा बोलेंगे तो इससे आपके प्रति भी आपके बेटे या बहू के मन में गलत भावना पैदा हो सकती है। इसलिए कभी भी एक व्यक्ति का पक्ष लेकर झगड़े के बीच में न बोलें।
कभी भी "तुमने मेरी बहू से ऐसा क्यों कहा?" या "हमारे बेटे की गलती नहीं है" जैसे पक्षपाती वाक्य न बोलें। ऐसा बोलना आपके बच्चों के बीच के झगड़े को भी बढ़ा सकता सकता है। यदि आप ऐसा बोलेंगे तो इससे आपके प्रति भी आपके बेटे या बहू के मन में गलत भावना पैदा हो सकती है। इसलिए कभी भी एक व्यक्ति का पक्ष लेकर झगड़े के बीच में न बोलें।
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समझदार मार्गदर्शक बनें
- फोटो : Freepik
समझदार मार्गदर्शक बनें
झगड़े के बाद किसी एक पर हावी तो कतई न हों। इसकी बजाय दोनों को शांत दिमाग से बैठाकर न्यायप्रिय दृष्टिकोण से बात करें। उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि आप किसी का पक्ष नहीं ले रहे, बल्कि पूरे परिवार की भलाई चाहते हैं। पूरी बात को सुनें और फिर उन्हें मार्गदर्शन दें।
झगड़े के बाद किसी एक पर हावी तो कतई न हों। इसकी बजाय दोनों को शांत दिमाग से बैठाकर न्यायप्रिय दृष्टिकोण से बात करें। उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि आप किसी का पक्ष नहीं ले रहे, बल्कि पूरे परिवार की भलाई चाहते हैं। पूरी बात को सुनें और फिर उन्हें मार्गदर्शन दें।
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संवाद को बढ़ावा दें
- फोटो : Adobe stock
संवाद को बढ़ावा दें
लड़ाई-झगड़े के बीच में ही तुरंत अपने बेटे-बहू को समझाने न लग जाएं। हमेशा झगड़े के बाद बहू और बेटे दोनों से अलग-अलग बात करें और दोनों की बातों को शांतिपूर्वक सुनें। जैसे कभी-कभी बहू को लगता है कि उसे सिर्फ बाहरी सदस्य समझा जाता है, ऐसे में उन्हें समझाएं। इसी तरह बेटे से भी समझदारी से ही बात करें।
लड़ाई-झगड़े के बीच में ही तुरंत अपने बेटे-बहू को समझाने न लग जाएं। हमेशा झगड़े के बाद बहू और बेटे दोनों से अलग-अलग बात करें और दोनों की बातों को शांतिपूर्वक सुनें। जैसे कभी-कभी बहू को लगता है कि उसे सिर्फ बाहरी सदस्य समझा जाता है, ऐसे में उन्हें समझाएं। इसी तरह बेटे से भी समझदारी से ही बात करें।