सुमन अग्रवाल
Parenting Tips: मेलजोल से होता है बच्चों का विकास, जानिए कैसे सिखाएं घुलना-मिलना
आस-पास क्या चल रहा है
कई बच्चे पहले से ही सोशल होते हैं। उन्हें लोगों से मिलना अच्छा लगता है। कई बच्चे घर में रिश्तेदार आते ही कमरे में चले जाते हैं। ऐसे में माता-पिता उनको सामाजिक गतिविधियों में शामिल करें, जैसे कि उन्हें पानी का ग्लास लाने को कहें या बड़ों का अभिवादन करना सिखाएं, ताकि उन्हें पता रहे कि आस-पास क्या चल रहा है। सामाजिक होने से बच्चे खुद को खुलकर अभिव्यक्त कर पाते हैं, जिससे आस-पास के लोग भी उनसे हमेशा खुश रहते हैं।
नए लोगों से बातचीत
कई बच्चे माता-पिता या नजदीकी लोगों के अलावा किसी अन्य से ज्यादा खुलते नहीं हैं। ऐसे में वे अंतर्मुखी रह जाते हैं और बाहरी दुनिया से उनका जुड़ाव नहीं हो पाता। आज के समय में बच्चों को एक्टिव और इंटरेक्ट होना बेहद जरूरी है। इसलिए माता-पिता, बच्चों को बात करना सिखाएं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और अकेलापन दूर होगा। बच्चों को दूसरे लोगों के साथ खुलने के लिए दोस्त बनाना सिखाएं। इसके लिए उन्हें सांस्कृतिक, एथलेटिक, धार्मिक और मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने को प्रेरित करें।
शेयरिंग-केयरिंग
बच्चों का मन कोरा होता है और सरल भी, मगर कई बच्चों का स्वभाव शेयरिंग-केयरिंग का नहीं होता। ऐसे में माता-पिता उन्हें दोस्तों के बीच शेयरिंग- केयरिंग करना सिखाएं। बुरे वक़्त में दोस्तों की मदद करने से बच्चों में सहयोग, सद्भावना की भावना पनपेगी। बच्चों को दोस्ती की प्रेरक कहानियां सुनाएं।
सवाल करना
कई बच्चे जो सुनते हैं, चुपचाप उसे अंदर समा लेते हैं। लेकिन अगर वे सवाल नहीं करेंगे तो उनका विकास रुक जाएगा। इसलिए माता-पिता, बच्चों को सवाल करना सिखाएं। इससे उनके अंदर जिज्ञासा उत्पन्न होगी और वे नई चीजें जान पाएंगे, किसी भी प्रतियोगिता में भाग ले पाएंगे।
ताकत को पहचानें
हर बच्चे के अंदर एक खास गुण होता है। वही उसकी ताकत है। इसलिए बच्चों से जबरदस्ती कुछ भी न कराएं। उनकी प्रतिभा को समझकर, बच्चे की ताकत क्या है, उसे जानकर ही आगे बढ़ें। माता-पिता बच्चे के गुणों को पहचानें।