किसी से प्यार करना एक खूबसूरत चीज है लेकिन प्यार अगर हद से पार कर जाए तो बीमारी भी बन जाती है। अगर आप किसी और से मोहब्बत करते हैं और सामने वाला व्यक्ति आपको मना कर रहा हो फिर भी आप उससे बेपनाह मोहब्बत कर रहे हैं तो आप ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर के शिकार हो गए हैं। अमेरिकी हेल्थ वेबसाइट हेल्थलाइन के मुताबिक, ‘ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर’ एक तरह की मानसिक अवस्था है, जिसमें युवा किसी अन्य शख्स पर असामान्य रूप से फिदा हो जाते हैं। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उस शख्स पर सिर्फ उनका अधिकार है और उसे भी बदले में उनसे प्यार करना चाहिए। अगर दूसरा शख्स उनसे प्यार नहीं करता तो वो इसे स्वीकार नहीं कर पाते। ऐसे में वे सामने वाले की भावनाओं पर भी पूरी तरह से अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं।
जरूरत से ज्यादा प्यार भी है एक बीमारी, इन लक्षणों से जानें लव एडिक्शन शिकार तो नहीं आप
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ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर लक्षण
- किसी के प्रति जबरदस्त और असाधारण आकर्षण का होना।
- उस शख्स के बारे में लगातार आने वाले विचार, जिसके चलते पीड़ित का खुद का कोई नियंत्रण न रह पाए।
- दूसरे शख्स और उसकी भावनाओं को काबू में करने की इच्छा। सामने वाले के द्वारा प्रस्ताव पर दी गई अस्वीकृति को स्वीकार न कर पाना।
- दूसरों से भी उसकी ही बातें करना, अक्सर उसका जिक्र करने का कोई बहाना ढूंढना।
- किसी एक व्यक्ति की वजह से ही बाकी रिश्तों को भूल जाना।
- जिस व्यक्ति की और आकर्षण बढ़ रहा हो उसे बार-बार मैसेज या कॉल करना, उसका पीछा करना, सोशल मीडिया पर उसे स्टॉक करना।
- ब्लैकमेल करना, किसी भी तरह अपना प्रस्ताव मनवाने की कोशिश करना। ये सब ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर लक्षण हैं।
क्यों होता है
साइकियाट्रिक के अनुसार ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर की कोई एक ही वजह हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार इसका संबंध कई तरह की अन्य मानसिक तकलीफों से भी होता है। आत्मविश्वास की कमी और असुरक्षा की भावना भी ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर की बड़ी वजहों में शामिल हैं। कई बार ऐसा भी देखने में आया है कि जिन लोगों को बचपन और किशोरावस्था में परिवार या करीबियों का प्यार नहीं मिलता बाद में वो कभी न कभी ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर से गुजरते हैं। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति न सिर्फ स्वयं को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि दूसरे इंसान को भी मुश्किल में डाल रहा होता है।
अटैचमेंट डिसऑर्डर से आशंका ज्यादा
इसकी वजह से लोगों में अपनी भावनाओं और किसी से जुड़ाव को काबू करने में परेशानी होती है। कई बार वो दूसरों से जरूरत से ज्यादा दूर हो जाते हैं और कई बार दूसरों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर। ऐसा बचपन या किशोरवास्था के बुरे पारिवारिक रिश्तों या कड़वे अनुभवों की वजह से भी हो सकता है।बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी भड़काती है भावनाएं
इसे ‘इमोशनली अनस्टेबल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ भी कहा जाता है। इसमें लोग अपनी भावनाओं को समझने में कठिनाई का अनुभव करते हैं। उनमें रिश्तों को लेकर डर और असुरक्षा की भावना भी होती है। बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी वाले व्यक्ति को इस बीमारी की आशंका ज्यादा होती है।
इरोटोमेनिया मतलब एकतरफा प्यार
इरोटोमेनिया बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को अक्सर ऐसा भ्रम होता है कि सामने वाला उससे प्यार करता है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। इरोटोमेनिया की वजह से भी ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति ज्यादातर मामलों में आपराधिक हथकंडे अपनाता है।
कब लें डॉक्टर की मदद?
काउंसलिंग और थैरेपी के जरिए ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आमतौर पर काउंसलिंग या थैरेपी के शुरुआती पांच-छह सेशन में ही इसका असर कम होने लगता है और धीरे-धीरे इंसान सामान्य अवस्था में लौटने लगता है। आपको लगे कि कोई शख्स आपको हद से ज्यादा प्रभावित कर रहा है और आपको दिक्कत हो रही है तो फौरन ही डॉक्टर या किसी नजदीकी व्यक्ति की मदद लेनी चाहिए।
अगर आपके रोजमर्रा के कामों जैसे कि खाने-पीने और नींद में किसी एक व्यक्ति की वजह से खलल पड़ रहा है, तो किसी सलाहकार की आवश्यकता है।