दीप्ति अंगरीश
उपहार जादुई असर दिखाते हैं। आपके संबंधों की दास्तां सुनाते हैं। ये रिश्तों में मिठास बढ़ाने का एक बेहतरीन जरिया हैं, तो गिले-शिकवे दूर करने का खूबसूरत बहाना भी हैं। दीपावली आ गई है, ऐसे में आप अपनों को कौन-सा उपहार देने का मन बना रही हैं?
फेस्टिव सीजन हमेशा कुछ नया करने का अवसर लेकर आता है। त्योहार ही हैं, जो अपनों को करीब लाते हैं और परायों को अपना बनाने का मौका देते हैं। बस मन में स्नेह की भावना होनी चाहिए। त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। रुठों को मनाने और परायों को अपनाने का एक तरीका है उपहार, जो हर ओर खुशियां बिखेरता है। उपहार का कोई मूल्य नहीं होता, मूल्य होता है देने वाले की भावनाओं का। आप भौतिकवादी हैं, जो कि मानते हैं कि प्रकृति में बस पदार्थों का ही मूल्य है तो अपने स्वभाव को बदलिए।
अगर आप उपहारों को उसके मूल्य या उपयोगिता से तौलेंगी तो उसकी सौंधी खुशबू को महसूस नहीं कर पाएंगी। उपहार अपनों के प्रति प्यार के इजहार का बेहद खूबसूरत तरीका है। जब हम किसी को कोई भी उपहार देते हैं तो उसके चेहरे की खुशी देखकर हमारी खुशी दोगुनी हो जाती है और वह उपहार हमें जिंदगी भर याद रहता है। हमेशा आपको वह पल खुशी देता है और उसकी मुस्कान हमेशा आपके दिल में बस जाती है। रिश्तों में भी उपहार के अपने अलग मायने हैं।
मां की दी गई कान की बालियां आप आज भी बड़े प्यार से संजो कर रखती हैं, पापा की दी गई पायल बेशक अब छोटी हो गई है, लेकिन किसी को देने का आपका मन आज भी नहीं करता है। यह रिश्तों की मधुरता ही है, जो आज भी बनी हुई है। उपहार रिश्तों में मधुरता बनाए रखने का एक बेहतरीन माध्यम हैं, तो गिले-शिकवे दूर करने का खूबसूरत बहाना भी हैं। आप बेशक इसे रिश्तों में एक औपचारिकता का नाम दें, लेकिन ये पुराने हों या नए, रिश्तों में चाशनी का काम करते हैं।
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दिवाली पर तोहफे
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कहते हैं मन की बात
कई बार आप अपने माता-पिता बहन-भाई या पति से बहुत कुछ कहना चाहती हैं, मगर झिझक या मजबूरियों के चलते दिल की बात जुबां पर नहीं ला पातीं। ऐसे में मन की बात बोलने के लिए आपको कुछ मीठे बोल और उपहार की जरूरत होती है। उपहार एक ऐसी चीज है, जिसके लिए आपको किसी दिन या मौके की तलाश करने की जरूरत नहीं है, आपका जब मन करें, आप अपने रिश्तों को इसके माध्यम से खुशनुमा बना सकती हैं। बस, उपहार और मीठी-सी मुस्कान के साथ अपने दिल की बात बोल दें।
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दिवाली पर तोहफे
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परायों को भी देकर देखें
जब आप किसी पराये को उपहार देंगी, तो खुशी सिर्फ आपको ही नहीं, सामने वाले को भी मिलेगी। कभी-कभी कोई काम बिना मतलब के भी करना चाहिए। आप ऐसा करके तो देखिए, सामने वाले को अचानक मिले उपहार की खुशी उसके चेहरे पर तो दिखेगी ही, साथ में आपके चेहरे पर भी दिखेगी और सुकून वाली होगी। यह खुशी बेशकीमती होती है, इसलिए हर चीज में नफा-नुकसान न देखें। कई बार ऐसे उपहार आपके साथ जीवन भर दुआओं के रूप में साथ चलते हैं। जरूरी नहीं कि यह उपहार कोई वस्तु ही हो, चंद रुपये, कपड़े, खाने की वस्तु या किसी मजबूर की फीस भी गिफ्ट हो सकती है।
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नाराज हैं तो मान जाएंगे
आपसे कोई नाराज है तो उसे यूं ही न छोड़ दें, क्योंकि नाराजगी ज्यादा बढ़ेगी, तो दूरियां बढ़ती जाएंगी। ये दूरियां ज्यादा बढ़ेंगी तो रिश्ते में कभी जोड़ नहीं आ पाएगा और आपका रिश्ता चरमरा जाएगा। रिश्ता कैसा भी हो, उसमें ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए। इसके लिए कौन पहल करेगा, इस मुद्दे पर दिमाग पर ज्यादा जोर न डालें। आपके अपने जो आपसे नाराज है, जिन्हें अपने शब्दों, प्यार और कभी-कभी गुस्से से बहुत बार मनाने की कोशिश की है, लेकिन सफल नहीं पाईं, उनसे नाराजगी आपको खलती है, तो खुद को परेशान न करें। बस, उन्हें उपहार देकर तो देखिए, तुरंत सब ठीक हो जाएगा।
आप उन्हें कुछ ऐसा उपहार दें, जो उनके दिल को छू जाए और सारी नाराजगी छू-मंतर हो जाए। हां, उपहार देते समय आपके हाव-भाव में क्षमा का भाव जरूर हो, जो जुबां पर माफी के नाम पर ही आए। यहां उपहार का मूल्य महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि उपहार में यादें हों आपकी और उसकी। ध्यान रखें, उपहार देने के लिए किसी खास दिन अथवा अवसर की तलाश न करें और जल्द से जल्द उसे मना लें। आप आगे बढ़िए और प्यारे से उपहार के साथ ‘सॉरी’ बोल दीजिए।
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भावनाओं का पिटारा
किसी ने आपके लिए बहुत कुछ किया है, मगर आप उसे थैंक्यू कुछ अलग तरीके से बोलना चाहती हैं। इसके लिए उपहार देना बेहतरीन तरीका हो सकता है। माना कि आपके लिए उनके अच्छे कामों को आपने समझा और थैंक्यू भी कहा, लेकिन कई बार यह भी कम लगता है, तो इसके लिए मन की ‘एकस्ट्रा’ बातों को उपहार देकर कहिए। देखिए, कैसे उपहार मन की बातों को सामने ला देगा। एक बात और याद रखिए कि कोई किसी चीज का भूखा नहीं होता, लेकिन एक उपहार देकर आप उसे अपनी जिंदगी में उसकी अहमियत का अहसास करा सकती हैं। लेकिन आप त्योहारों के मौसम में जबरन किसी को उपहार न दें, उपहार में अपनापन होना चाहिए। किसी ने आपको कॉल या मैसेज करके तो नहीं कहा है कि मुझे उपहार दो ही। आपके मन में विचार आया, सामने वाला अच्छा लगा, उसका आपके प्रति अनुराग बेहतर है, तो आप उसे उपहार दे सकतीं हैं। इसलिए जरूरी है कि उपहार में अपनत्व दिखे।