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फादर्स डे- किसान पिता का बेटे के नाम एक खत

Mon, 19 Jun 2017 01:59 AM IST
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी Updated Mon, 19 Jun 2017 01:59 AM IST
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a farmer letter to son
farmer - फोटो : किसान

प्यारे बिशन


हम सब यहां ठीक-ठाक हैं। तुम्हारी अम्मा बहुत याद करती हैं, तुम्हें। अभी कुछ दिन पहले भइसिया बियाई थी तो पेवसी बनी थी। अम्मा पेवसी देखकर खूब फूट-फूटकर रोईं। कहने लगीं हमाये शिवा को खूब अच्छी लगती थी पेवसी। फिर खूब गुस्साईं मुझ पर कि काहे हमने तुम्हें दिल्ली भेज दिया।
    बेटा का बतायें, तुम्हाई अम्मा तो हमसे खूब गुस्सा हैं। रोज लड़ती हैं कि बिशना को काहे नहीं रोका दिल्ली जाने से। पर हमने तुमसे कबहूं नहीं कही। पर सच्ची तुम्हाई याद रोज आती है। हमऊ खूब रोये थे जब तुम गये थे। बस तुम्हाई अम्मा के सामने नहीं रोये थे। पर का करें। और कुछ चारा भी तो नहीं था। चार बरस से सूखा झेलते-झेलते हमारी कमर टूट गई थी। ऊपर से बैंक और शाहूकार का कर्जा। सोचा दिल्ली में काम मिल जायेगा। तो कर्ज चुकाने में कुछ मदद मिलेगी।

a farmer letter to son
farmer - फोटो : किसान
वैसे भी का करते गांव में। सूखे ने तो तुम्हाई पढ़ाई भी खा ली। 2013 में पहली बार सूखा पड़ा था। उस समय तुम सातवीं कक्षा में थे। खाने के लाले पड़ गये थे। पढ़ाई कहां से कराते। पहले सुनीता और अनीता की पढ़ाई छुड़ाई फिर तुम्हाई। मस्साब तो खूब बरसे थे, हमाये ऊपर कि काहे तुम्हें स्कूल नहीं भेज रहे।
   सरकार भी हमसे मजाक करती है। पिछली बार तुम्हारे सामने ही मुआवजे का 150 रुपइया का चेक मिला था। भगवान भी सरकार से लगता है मिल गया है। कभी ओले कभी सूखा। बस किसान की किस्मत मे यही बचा है। तो अब तुम्हई बताओ हम का करते। पइसा तो था नहीं कि कुछ धंधा पानी करवा पाते। सो हरिकिशन ने कही कि उनका लड़का दिल्ली में है। कुछ धंधा पानी में लगवा देगा।
 
a farmer letter to son
far - फोटो : किसान
तुमने जो पिछले महीने 2000 रुपये भेजे थे उससे बड़ी राहत मिली थी। सुनीता के ससुराल गये थे तो 500 रुपइया में सबके पैर छू लिये। और अस्सी रुपया के तीन आम और खरबूजा ले गये थे। बाकी तुम्हाई अम्मा के इलाज में खर्च हो गये। छुटके को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है। कहते तो नहीं बन रहा, लेकिन अगर कुछ और पैसे भेज पाओ तो विनीता की शादी के लिये इंतजाम हो पायेगा।
 
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a farmer letter to son
farmer - फोटो : किसान
बिशना हमे माफ कर देना। हम तुम्हाये बाप होने का फर्ज अदा नहीं कर पाये। न पढ़ा पाये न ढंग से खिला पाये। ऊपर से घर का बोझ तुम्हाये कंधों में डाल दिया। पर का करें। हम ये नहीं चाहते थे कि तुम किसान बनो। छुटके को भी तुम किसान न बनने देना।
 
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a farmer letter to son
farmer - फोटो : किसान
यहां तो मनरेगा की मजदूरी का भी कोई भरोसा नहीं। अरे हां, शिवनारायण चच्चा ने फांसी लगा ली पिछले सोमवार को। उनके बच्चों को पांच लाख रुपइय मिले। हम भी कुछ रुपइया का इंतजाम करेंगे। रामनरेश के घर टी.बी. देख रहे थे तो पता चला कि मध्यप्रदेश में भी परसों एक किसान ने फांसी लगा ली। महाराष्ट्र में भी कोई मरा है। और प्रधानमंत्री भरोसा दे रहे थे कि ‘अन्नदाता’ के लिये सरकार आगे आएगी।
                                                                                                                                                                  तुम्हारा बदनसीब पिता 
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