राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई अन्य राज्यों में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 वायरस का संक्रमण देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द और शरीर दर्द की समस्याओं के साथ अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। वैसे तो डॉक्टरों का कहना है कि एच1एन1 वायरस हमेशा हल्के स्तर का संक्रमण करता है, हालांकि कुछ लोगों में इससे गंभीर रोग होने और जान जाने तक का भी जोखिम हो सकता है। मध्य प्रदेश के उज्जैन और केरल में इससे मौत के भी मामले सामने आए हैं, हालांकि मृतक अधिक उम्र वाले थे।
H1N1 Outbreak: स्वाइन फ्लू के बढ़ते खतरे के बीच डॉक्टर की जरूरी सलाह, ये दो सावधानियां बन सकती हैं आपका कवच
स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 में हर मरीज के गंभीर होने की आशंका नहीं होती, लेकिन कुछ लक्षण खतरे का संकेत हो सकते हैं। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, डिहाइड्रेशन या ठीक होकर फिर बिगड़ना दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
क्या है डॉक्टर की सलाह?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर उत्कर्ष सिन्हा कहते हैं, स्वाइन फ्लू कोरोना जैसा कोई नया वायरस नहीं है, ये पहले भी फैलता रहा है। ये इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक सबटाइप है। मानसून के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में भी बढ़ोतरी होती रही है। पर इस बार थोड़ी ज्यादा चिंता देखी जा रही है।
हालांकि इस संक्रमण से बचाव करना बहुत आसान है। हमें कोरोना से बचाव वाले तरीकों को फिर से दोहराना है। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, मास्क लगाएं, नियमित रूप से हाथ धोते-सेनेटाइज करते रहे और संक्रमित लोगों से दूरी बनाकर रखें।
इसके अलावा स्वाइन फ्लू को लेकर दो गलतियां नहीं करनी चाहिए। अगर हम थोड़ी सी सावधानी बरतें से आसानी से इस प्रकोप को खत्म कर सकते हैं।
- पहली, हर मरीज को घबराकर गंभीर मान लेना
- और दूसरी, गंभीर लक्षणों को सामान्य फ्लू समझकर टाल देना।
हर बुखार और खांसी का मतलब गंभीर एच1एन1 नहीं
एच1एन1 या स्वाइन फ्लू में अचानक तेज बुखार, खांसी-गले में खराश के साथ सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों की स्थिति हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। इसलिए इन दिनों सिर्फ तेज बुखार और सर्दी-खांसी देखकर घबरा जाना ठीक नहीं है।
- ज्यादातर लोग फ्लू से बिना किसी गंभीर जटिलता के ठीक हो जाते हैं। ज्यादातर लोगों में बीमारी लगभग एक सप्ताह तक रह सकती है।
- अगर मरीज को बुखार और खांसी है लेकिन सांस सामान्य है, पानी पी पा रहा है, होश है और हालत लगातार बिगड़ नहीं रही, तो घबराने की जरूरत नहीं होती।
गंभीर लक्षणों को सामान्य फ्लू समझकर टालें नहीं
एच1एन1 में सबसे गंभीर संकेतों में सांस लेने में परेशानी होना माना जाता है। अगर मरीज की सांस फूल रही है, सामान्य से बहुत तेज सांस चल रही है या सीने में दर्द महसूस हो रहा है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। ये आपात स्थिति मानी जाती है जिसमें तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
- कई मरीजों में होंठ या चेहरा नीला पड़ने, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेहोशी जैसी स्थिति, भ्रम या सामान्य रूप से प्रतिक्रिया न देने जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती है।
- फ्लू के दौरान शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है। तेज बुखार, पसीना, उल्टी या कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन बढ़ सकती है।
क्या है डॉक्टर की सलाह?
डॉक्टर कहते हैं, एच1एन1 किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सभी लोगों में गंभीर बीमारी का जोखिम एक जैसा नहीं होता।
छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और पहले से अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी के शिकार लोगों में खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है। ऐसे लोगों में फ्लू के लक्षण आने या दिक्कत बढ़ने पर केवल घरेलू उपचार के भरोसे रहना ठीक नहीं है। समय रहते डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव संक्रमण के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं, इसलिए लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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