क्या सुबह उठने के बाद आप भी थकान का शिकार रहते हैं, काम करने का मन न करता और वजन बढ़ता जा रहा है? इन समस्याओं को अक्सर लोग तनाव, नींद की कमी और खराब दिनचर्या मान लेते हैं। कई बार ऐसा होता भी है, लेकिन यही लक्षण बार-बार ये समस्याएं हो रही है तो सावधान हो जाएं। कहीं ये थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी का संकेत तो नहीं है।
Thyroid Disease: लगातार थकान और सुस्ती कहीं थायरॉइड की बीमारी की तरफ संकेत तो नहीं? हो जाएं अलर्ट
थायरॉइड की बीमारी के कई संकेत तनाव और सामान्य थकान जैसे लगते हैं। लगातार थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, बाल-त्वचा में बदलाव, बेचैनी या तेज धड़कन को पैटर्न के साथ देखना जरूरी है। कई लक्षण एक साथ हों और लंबे समय तक बने रहें तो थायरॉइड जांच के लिए डॉक्टर से मिलें।
लगातार थकान और सुस्ती
- अगर पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर भारी और थका हुआ लगता है, तो इसे सिर्फ तनाव मानकर अनदेखा न करें। हाइपोथायरॉइडिज्म में थकान और सुस्ती आम हो सकती है। अगर थकान के साथ वजन बढ़ने, ठंड लगने, कब्ज, सूखी त्वचा या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हों, तो थायरॉइड की जांच के बारे में डॉक्टर से बात करें।
बिना वजह वजन बढ़ना या कम होना
- बिना खानपान में बड़ा बदलाव किए वजन लगातार बढ़ रहा है तो थायरॉइड भी एक वजह हो सकती है। हाइपोथायरॉइडिज्म में वजन बढ़ सकता है।हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड हार्मोन कम बनते हैं, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसके कारण शरीर कम कैलोरी बर्न कर पाता है और वजन बढ़ने लगता है।
चिड़चिड़ापन-बेचैनी
- हर समय तनाव या चिड़चिड़ापन महसूस होना भी कई बार थायरॉइड से जुड़ा हो सकता है। खासकर थायरॉइड ज्यादा सक्रिय होने पर बेचैनी, हाथ कांपना, तेज धड़कन और नींद की परेशानी हो सकती है।लेकिन केवल चिड़चिड़ापन या नींद खराब होने का मतलब थायरॉइड नहीं है। दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
बाल झड़ने की दिक्कत
- बाल पतले होना, त्वचा का सूखना और कब्ज हाइपोथायरॉइडिज्म के लक्षण हो सकते हैं। लेकिन इन समस्याओं की दूसरी वजहें भी होती हैं। अगर इनके साथ थकान, वजन बढ़ना और ठंड ज्यादा लगना भी लंबे समय से हो रहा है, तो डॉक्टर से थायरॉइड की जांच कराएं।
डॉक्टर कहते हैं, अगर ये लक्षण कई हफ्तों से बने हुए हैं और रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं तो डॉक्टर से मिलें। गर्दन में सूजन या गांठ, निगलने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत या धड़कन अनियमित हो तो जांच में देरी न करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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