प्रज्ञा तिवारी
बरसात का मौसम आते ही हमारे आस-पास के परिवेश में हरियाली छा जाती है। ऐसे में क्यों न आप भी इस मौसम में अपने बगीचे को फूलों के रंगों और खुशबू से भर दें।
मानसून ने दस्तक दे दी है। क्या जानवर, क्या इंसान, माटी के हर कण में जान आ गई है। मगर अब आपके ऊपर अपनी बगिया के पेड़-पौधों को बचाने के साथ उन्हें रंगीन करने की भी जिम्मेदारी आ गई है, क्योंकि इसी मौसम में ज्यादातर पौधे या तो पानी की अधिकता से सड़ जाते हैं या धूप की कमी में दम तोड़ देते हैं। वहीं, यह मौसम आपको नए पेड़-पौधे और तरह-तरह के फूलों को उगाने की भी अनुमति देता है तो क्यों न आप अपनी बगिया को बरसात के इस मौसम में रंगों से भरने का काम करें।
पोर्टुलाका
इस फूल को मॉस रोज या सन रोज के नाम से जाना जाता है, जो कि मुख्यतः बरसात के मौसम में ही खिलता है। यह बेहद खूबसूरत और मन को मोह लेने वाला फूल है। पोर्टुलाका की खासियत है कि यह अपने जीवंत और आकर्षण से आपके पूरे बगीचे को रंगों से भर देता है।
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इक्सोरा का फूल
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गेंदा
गेंदे का फूल तो लगभग हर घर में मिलता है, जिसका सुंदरता और धार्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पोलिनेटर्स को अपनी ओर आकर्षित करता है और पौधों में कीड़े लगने से रोकता है। इसे लगाने का सबसे उपयुक्त मौसम जून से जुलाई के मध्य होता है। गेंदे के फूलों में विविधता पाई जाती है। इसे आप अपनी पसंद के अनुसार लगा सकती हैं।
इक्सोरा
इसे वेस्ट इंडियन जैस्मीन भी कहा जाता है। यह इस मौसम के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। देखने में यह छोटे-छोटे फूलों के गुच्छों से भरी झाड़ी जैसा होता है। इसमें लाल, नारंगी, गुलाबी, पीले आदि फूलों की विविधता मिलती है। इन फूलों की उपस्थिति आपके बगीचे को खूबसूरत बना देती है।
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बल्सम का फूल
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मोगरा
मोगरे की दीवानगी तो हमेशा से ही रही है। यह अपनी उपस्थिति दूर-दूर तक महसूस करा देता है। इस पौधे को दो-तीन घंटे की धूप जरूरी होती है। साथ ही मिट्टी में पानी का बहाव होते रहना भी जरूरी है, वरना यह खराब हो सकता है। वहीं, मोगरा अपनी जिजीविषा के लिए भी जाना जाता है। यह थोड़ी-सी खाद और मामूली देखभाल के साथ गमले में भी उगाया जा सकता है।
बाल्सम
ये फूल लाल, गुलाबी, बैंगनी आदि खूबसूरत रंगों में पाए जाते हैं। इनके लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी, थोड़ी छाया और आरामदायक ठंडा मौसम आवश्यक है।
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बारिश के लिए गार्डनिंग टिप्स
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जल भराव में पौधे सांस नहीं ले पाते
दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में वनस्पति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोमिला रावत बिष्ट कहते हैं, समय पर कटाई-छंटाई पौधों बढ़ने में मदद करती है। लेकिन बरसात में पौधों को कम पानी देना चाहिए, क्योंकि इस समय मौसम में नमी बनी रहती है। जरूरत से ज्यादा पानी पौधों में वाष्पीकरण की क्रिया को अवरुद्ध करता है। बरसात का समय कुछ सुप्तावस्था में पड़े बीजों की वृद्धि का भी समय होता है। इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करती रहें, ताकि पोषक तत्वों का संतुलन बना रहे। पौधों को ऐसी जगह लगाएं, जहां से जल निकासी आसान हो, क्योंकि जलभराव में पौधे सांस नहीं ले पाते और दम तोड़ देते है। चूंकि यह मौसम नमी वाला होता है, इसलिए गुड़हल, गुलाब, बोगनवेलिया और प्लूमेरिया ड्रेकेना जैसे पौधे बगीचे में आसानी से लगाए जा सकते हैं।