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Kasturba Gandhi Death Anniversary: कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें

Wed, 22 Feb 2023 11:47 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Wed, 22 Feb 2023 11:47 AM IST
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Kasturba Gandhi Death Anniversary Know Interesting Facts About Her Life
कस्तूरबा गांधी - फोटो : Twitter

भारत से लेकर विदेशों तक महात्मा गांधी की लोकप्रियता है। महात्मा गांधी का पूरा जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर गुजरा और उनकी यह सीख आज भी लोग अपने जीवन में अपनाते हैं। मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी, राष्ट्रपिता और बापू कहा जाता है, लेकिन देश को आजादी दिलाने में उनके प्रयासों के पीछे एक महिला का हाथ था। कहते हैं कि अगर यह महिला न होती, तो गांधी जी महात्मा न बन पाते। इस महिला का नाम कस्तूरबा गांधी था, जो कि मोहनदास करमचंद गांधी की पत्नी थीं। कस्तूरबा एक संपन्न परिवार की बेटी थीं, जिनकी कम उम्र में ही गांधी जी से शादी हो गई और उसके बाद उनका जीवन संघर्षों में गुजरा। गांधी जी के साथ वह हमेशा खड़ी रहीं, देश सेवा के काम में जुट गईं। साधारण सूती धोती पहन आश्रम में रहने लगीं। हालांकि गांधी की पत्नी होने के अलावा वह अपने व्यक्तित्व के कारण देश की बा बन गईं। आज कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि है। आइए उनकी पुण्यतिथि पर जानें कस्तूरबा गांधी के जीवन से जुड़ी खास बातें।

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कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि - फोटो : amar ujala

कस्तूरबा गांधी का शादी से पहले जीवन

कस्तूरबा गांधी का जन्म गुजरात के काठियावाड़ जिले में 11 अप्रैल 1869 को हुआ था। उनके पिता पेशे से व्यापारी थे और परिवार संपन्न था। जब कस्तूरबा महज 13 साल की थीं तो उनकी शादी कर दी गई। सात साल की उम्र में उनकी सगाई मोहनदास करमचंद गांधी से कर दी गई, जो उनके पिता के दोस्त के बेटे थे। गांधी जी कस्तूरबा से एक साल छोटे थे।

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कस्तूरबा गांधी - फोटो : Facebook

गांधी जी और कस्तूरबा की शिक्षा

कस्तूरबा की शादी के बाद उनकी पढ़ाई बंद हो गई। वह स्कूल नहीं जा सकीं लेकिन मोहनदास ने विदेश तक जाकर शिक्षा हासिल की। जब गांधी जी को इंग्लैंड में वकालत की पढ़ाई के लिए जाना था, तो कस्तूरबा ने अपने गहने तक बेचकर पैसे जुटाए थे। कहते हैं कि विदेश जाने से पहले तक गांधी जी घर पर ही कस्तूरबा को पढ़ाया करते थे।

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कस्तूरबा गांधी - फोटो : Facebook

हमेशा दिया पति का साथ

आम पत्नियों की तरह कस्तूरबा ने भी सोचा होगा कि जब पति विदेश से पढ़कर वापस आएंगे तो वह आराम की जिंदगी गुजारेंगी। लेकिन गांधीजी ने खुद को देश सेवा में लगाया। भारत की आजादी के लिए आंदोलनों में शामिल हुए, जेल गए। इस पर कस्तूरबा भी उनके कदम से कदम मिलाकर चलती रहीं। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में गांधी जी के साथ रहीं। जब गांधी जी धरना प्रदर्शन के दौरान उपवास करते तो कस्तूरबा उनकी देखभाल करतीं।

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कस्तूरबा गांधी बनीं बा - फोटो : facebook

कस्तूरबा गांधी बनीं बा

ऐसा नहीं कि सिर्फ पति का साथ देने के लिए ही वह देश सेवा में शामिल हुईं। उन्होंने खुद भी स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अत्याचार पर पहली बार ध्यान कस्तूरबा गांधी का ही गया था। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई। उन्हें तीन महीने की जेल की सजा हुई। लेकिन जेल में वह लोगों को प्रार्थना का महत्व सिखाया करतीं। कैदियों के दुख दर्द को सुनती, समझतीं। उनके इस मातृत्व भावना के कारण ही देशवासी उन्हें 'बा' कहकर संबोधित करने लगे।

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