भारत से लेकर विदेशों तक महात्मा गांधी की लोकप्रियता है। महात्मा गांधी का पूरा जीवन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर गुजरा और उनकी यह सीख आज भी लोग अपने जीवन में अपनाते हैं। मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी, राष्ट्रपिता और बापू कहा जाता है, लेकिन देश को आजादी दिलाने में उनके प्रयासों के पीछे एक महिला का हाथ था। कहते हैं कि अगर यह महिला न होती, तो गांधी जी महात्मा न बन पाते। इस महिला का नाम कस्तूरबा गांधी था, जो कि मोहनदास करमचंद गांधी की पत्नी थीं। कस्तूरबा एक संपन्न परिवार की बेटी थीं, जिनकी कम उम्र में ही गांधी जी से शादी हो गई और उसके बाद उनका जीवन संघर्षों में गुजरा। गांधी जी के साथ वह हमेशा खड़ी रहीं, देश सेवा के काम में जुट गईं। साधारण सूती धोती पहन आश्रम में रहने लगीं। हालांकि गांधी की पत्नी होने के अलावा वह अपने व्यक्तित्व के कारण देश की बा बन गईं। आज कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि है। आइए उनकी पुण्यतिथि पर जानें कस्तूरबा गांधी के जीवन से जुड़ी खास बातें।
Kasturba Gandhi Death Anniversary: कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें
कस्तूरबा गांधी का शादी से पहले जीवन
कस्तूरबा गांधी का जन्म गुजरात के काठियावाड़ जिले में 11 अप्रैल 1869 को हुआ था। उनके पिता पेशे से व्यापारी थे और परिवार संपन्न था। जब कस्तूरबा महज 13 साल की थीं तो उनकी शादी कर दी गई। सात साल की उम्र में उनकी सगाई मोहनदास करमचंद गांधी से कर दी गई, जो उनके पिता के दोस्त के बेटे थे। गांधी जी कस्तूरबा से एक साल छोटे थे।
गांधी जी और कस्तूरबा की शिक्षा
कस्तूरबा की शादी के बाद उनकी पढ़ाई बंद हो गई। वह स्कूल नहीं जा सकीं लेकिन मोहनदास ने विदेश तक जाकर शिक्षा हासिल की। जब गांधी जी को इंग्लैंड में वकालत की पढ़ाई के लिए जाना था, तो कस्तूरबा ने अपने गहने तक बेचकर पैसे जुटाए थे। कहते हैं कि विदेश जाने से पहले तक गांधी जी घर पर ही कस्तूरबा को पढ़ाया करते थे।
हमेशा दिया पति का साथ
आम पत्नियों की तरह कस्तूरबा ने भी सोचा होगा कि जब पति विदेश से पढ़कर वापस आएंगे तो वह आराम की जिंदगी गुजारेंगी। लेकिन गांधीजी ने खुद को देश सेवा में लगाया। भारत की आजादी के लिए आंदोलनों में शामिल हुए, जेल गए। इस पर कस्तूरबा भी उनके कदम से कदम मिलाकर चलती रहीं। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में गांधी जी के साथ रहीं। जब गांधी जी धरना प्रदर्शन के दौरान उपवास करते तो कस्तूरबा उनकी देखभाल करतीं।
कस्तूरबा गांधी बनीं बा
ऐसा नहीं कि सिर्फ पति का साथ देने के लिए ही वह देश सेवा में शामिल हुईं। उन्होंने खुद भी स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों पर हो रहे अत्याचार पर पहली बार ध्यान कस्तूरबा गांधी का ही गया था। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई। उन्हें तीन महीने की जेल की सजा हुई। लेकिन जेल में वह लोगों को प्रार्थना का महत्व सिखाया करतीं। कैदियों के दुख दर्द को सुनती, समझतीं। उनके इस मातृत्व भावना के कारण ही देशवासी उन्हें 'बा' कहकर संबोधित करने लगे।