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International Nurses Day: आधुनिक नर्सिंग की जनक थी फ्लोरेंस नाइटिंगेल, जानिए इनके बारे में

Tue, 12 May 2020 07:56 AM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 12 May 2020 07:56 AM IST
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International Nurses Day know about Florence Nightingale father of modern nursing
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस - फोटो : अमर उजाला

12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस में विलियम नाइटिंगेल और फेनी के घर जन्मीं फ्लोरेंस नाइटिंगेल इंग्लैंड में पली-बढ़ीं। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को आधुनिक नर्सिंग की जनक के तौर पर जाना जाता है।उनके जन्मदिवस के खास मौके पर अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। धनी परिवार की फ्लोरेंस को 16 साल की उम्र में एहसास हो गया था कि उनका जन्म सेवा के लिए हुआ है। गणित, विज्ञान और इतिहास की पढ़ाई करने वाली फ्लोरेंस नर्स बनना चाहती थीं। वह मरीजों, गरीबों और पीड़ितों की मदद करना चाहती थी।

International Nurses Day know about Florence Nightingale father of modern nursing
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस - फोटो : अमर उजाला

धनवान पिता विलियम फ्लोरेंस की इस इच्छा के खिलाफ थे, क्योंकि नर्सिंग को उस वक्त सम्मानित पेशा नहीं माना जाता था। अस्पताल भी गंदे होते थे और बीमारों के मर जाने से डरावना जैसा लगता था। फ्लोरेंस ने सेवा की अपनी जिद मनवा ली और साल 1851 में उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई शुरू कर दी। 1853 में उन्होंने लंदन में महिलाओं का अस्पताल खोला।

International Nurses Day know about Florence Nightingale father of modern nursing
अंंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस - फोटो : अमर उजाला

साल 1854 में जब क्रीमिया का युद्ध हुआ तब ब्रिटिश सैनिकों को रूस के दक्षिण स्थित क्रीमिया में लड़ने को भेजा गया। ब्रिटेन, फ्रांस और तुर्की की लड़ाई रूस से थी। युद्ध से जब सैनिकों के जख्मी होने और मरने की खबर आई तो फ्लोरेंस नर्सों को लेकर वहां पहुंची। बहुत ही बुरे हालात थे। गंदगी, दुर्गंध, उपकरणों की कमी, बेड, पेयजल आदि तमाम असुविधाओं के बीच काफी तेजी से बीमारी फैली और सैनिकों की संक्रमण से मौत हो गई। फ्लोरेंस ने अस्पताल की हालत सुधारने के साथ मरीजों के नहाने, खाने, जख्मों की ड्रेसिंग आदि पर ध्यान दिया। सैनिकों की हालत में काफी सुधार हुआ।

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अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस - फोटो : अमर उजाला

युद्ध काल में फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल में दिन-रात एक कर दी। रात में जब सब सो रहे होते थे, वह सैनिकों के पास जाकर देखती थीं कि कहीं उन्हें कोई तकलीफ तो नहीं। सैनिक आराम से सो सकें, इसके लिए वह सेवा में लगी रहती थीं। सैनिकों की ओर से उनके घरवालों को फ्लोरेंस चिट्ठियां भी लिखकर भेजती थीं। रात में हाथ में लालटेन लेकर वह मरीजों को देखने जाती थीं और इसी कारण सैनिक आदर और प्यार से उन्हें 'लेडी विद लैंप' कहने लगे। साल 1856 में वह युद्ध के बाद लौटीं, तो उनका यह नाम प्रसिद्ध हो गया था।

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अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस - फोटो : अमर उजाला

13 अगस्त, 1919 को फ्लोरेंस नाइटिंगेल का निधन हो गया। फ्लोरेंस नाइटिंगेल के सम्मान में उनके जन्मदिन को नर्स दिवस के तौर पर मनाने की शुरुआत की गई। इस खास मौके पर नर्सिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली नर्सों को फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाता है।

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