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International Nurses Day: फ्लोरेंस नाइटिंगेल के 'लेडी विद द लैंप' बनने और मिसाल कायम करने की कहानी

Tue, 12 May 2020 01:07 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Tue, 12 May 2020 01:07 AM IST
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International Nurses Day 2020: Who was Florence Nightingale and how she became 'Lady with the Lamp'
अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस: फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social Media

देश और दुनिया में चल रहे कोरोना संकट के बीच स्वास्थ्यकर्मियों और खासकर नर्सों की बड़ी भूमिका है। साल 2020 को अंतरराष्ट्रीय नर्स वर्ष के तौर पर मनाया जा रहा है, क्योंकि 200 साल पहले 12 मई 1820 को फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था। आज के दिन उन्हीं की याद में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को सैनिक 'लेडी विद लैंप' कह के पुकारते थे। 





नर्सिंग और सेवा के क्षेत्र में फ्लोरेंस के योगदान को दुनिया आज भी याद करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के दौरान देशवासियों को संबोधित करते हुए फ्लोरेंस नाइटिंगेल को याद किया था और कहा था कि दुनियाभर के नर्सिंग समुदाय के लिए कोरोना संकट परीक्षा का समय है और दुनियाभर की नर्स इस परीक्षा में सफल होंगी। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर हम आपको बता रहे हैं नर्सिंग के क्षेत्र में मिसाल कायम करने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल के बारे में। 

International Nurses Day 2020: Who was Florence Nightingale and how she became 'Lady with the Lamp'
फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social media

12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस में विलियम नाइटिंगेल और फेनी के घर जन्मीं फ्लोरेंस नाइटिंगेल इंग्लैंड पली-बढ़ीं। धनी परिवार की फ्लोरेंस को 16 साल की उम्र में एहसास हो गया था कि उनका जन्म सेवा के लिए हुआ है। गणित, विज्ञान और इतिहास की पढ़ाई करने वाली फ्लोरेंस नर्स बनना चाहती थीं। वह मरीजों, गरीबों और पीड़ितों की मदद करना चाहती थीं। 

धनवान पिता विलियम फ्लोरेंस की इस इच्छा के खिलाफ थे, क्योंकि नर्सिंग को उस वक्त सम्मानित पेशा नहीं माना जाता था। अस्पताल भी गंदे होते थे और बीमारों के मर जाने से डरावना जैसा लगता था। फ्लोरेंस ने सेवा की अपनी जिद मनवा ली और साल 1851 में उन्होंने नर्सिंग की पढ़ाई शुरू कर दी। 1853 में उन्होंने लंदन में महिलाओं का अस्पताल खोला। 

International Nurses Day 2020: Who was Florence Nightingale and how she became 'Lady with the Lamp'
युद्ध (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

साल 1854 में जब क्रीमिया का युद्ध हुआ तब ब्रिटिश सैनिकों को रूस के दक्षिण स्थित क्रीमिया में लड़ने को भेजा गया। ब्रिटेन, फ्रांस और तुर्की की लड़ाई रूस से थी। युद्ध से जब सैनिकों के जख्मी होने और मरने की खबर आई तो फ्लोरेंस नर्सों को लेकर वहां पहुंची। बहुत ही बुरे हालात थे। गंदगी, दुर्गंध, उपकरणों की कमी, बेड, पेयजल आदि तमाम असुविधाओं के बीच काफी तेजी से बीमारी फैली और सैनिकों की संक्रमण से मौत हो गई। फ्लोरेंस ने अस्पताल की हालत सुधारने के साथ मरीजों के नहाने, खाने, जख्मों की ड्रेसिंग आदि पर ध्यान दिया। सैनिकों की हालत में काफी सुधार हुआ।

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International Nurses Day 2020: Who was Florence Nightingale and how she became 'Lady with the Lamp'
फ्लोरेंस नाइटिंगेल - फोटो : Social Media

लेडी विद लैंप नाम से नायिका के तौर उभरीं 
युद्ध काल में फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल में दिन-रात एक कर दी। रात में जब सब सो रहे होते थे, वह सैनिकों के पास जाकर देखती थीं कि कहीं उन्हें कोई तकलीफ तो नहीं। सैनिक आराम से सो सकें, इसके लिए वह सेवा में लगी रहती थीं। सैनिकों की ओर से उनके घरवालों को फ्लोरेंस चिट्ठियां भी लिखकर भेजती थीं। रात में हाथ में लालटेन लेकर वह मरीजों को देखने जाती थीं और इसी कारण सैनिक आदर और प्यार से उन्हें 'लेडी विद लैंप' कहने लगे। साल 1856 में वह युद्ध के बाद लौटीं, तो उनका यह नाम प्रसिद्ध हो गया था।

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International Nurses Day 2020: Who was Florence Nightingale and how she became 'Lady with the Lamp'
पत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

अखबारों में खबरें प्रकाशित हुई और नायिका के तौर पर उभरीं फ्लोरेंस को रानी विक्टोरिया ने पत्र लिखकर उनका धन्यवाद अदा किया। इसी साल सितंबर 1856 में रानी विक्टोरिया ने उनसे मुलाकात भी की और चर्चा के बाद सैन्य चिकित्सा प्रणाली में बड़े पैमाने पर सुधार संभव हुआ। सेना की ओर से डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने की शुरुआत हुई। अस्पतालों की सफाई व्यवस्था पर ध्यान देना शुरू हुआ। सैनिकों को बेहतर खाना, कपड़े और देखभाल की सुविधा मुहैया कराई जाने लगी। 

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