शकील खान
जब हम ट्रेन में सफर कर रहे होते हैं तो सामान्यतः: सहयात्रियों से बातचीत हो जाती है। उतरने के बाद इनमें से कुछ हमारे ज़ेहन में गहरे बैठ जाते हैं बाकी हवा हो जाते हैं। ट्रेन के छोटे से सफर में अगर हम किसी से बहुत ज्यादा प्रभावित हो जाएं तो उसके पीछे जो कारण होता है, वो है उनके तर्क करने की बेहतर क्षमता। असल में ट्रेन में सफर के दौरान जो गुफ्तगू होती है इसी के चलते हम किसी की बुद्धिमत्ता को नाप पाते हैं। अब आप किसी से ऐसी छोटी मुलाकात में उसकी वाकपटुता के चलते उससे प्रभावित हो जाएं, तो ये ध्यान देना कि वो कहीं ‘लेफ्टी’ तो नहीं?
कहने का ये मतलब कतई नहीं है कि हर लेफ्ट हैंडेड बुद्धिमान होता है और न ये कहा जा रहा है कि दायें हाथ से काम करने वालों के पास तर्क करने की क्षमता नहीं होती। हम बस इतना कहना चाह रहे हैं कि बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों को गणना में लें तो उनमें जटिल तर्क करने की क्षमता वाले लोग ज्यादा मिलेंगे। इसी के चलते लेफ्ट हेंडर्स में नोबेल पुरस्कार विजेताओं, लेखकों, कलाकारों, संगीतकारों, वास्तुकारों और गणितज्ञों की संख्या अधिक होती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकोलॉजी में प्रकाशित शोध के अनुसार, लेफ्ट हैंडर्स अलग-अलग सोच रखने के मामले में बेहतर होते हैं। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि लेफ्टी या खब्बू क्रिएटिविटी, फिक्शन, दिवास्वप्न और अंतर्ज्ञान के मामले में सामान्य लोगों से आगे होते हैं।
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Left Handers Day
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13 अगस्त को लेफ्ट हैंडर्स डे
बात आगे बढ़े इससे पहले बता दें कि लेफ्टीज़ की बात हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि 13 अगस्त को इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स डे है। लेफ्ट हैंडर्स को सामान्य बोलचाल की भाषा में बाएं हाथ से काम करने वाला या उल्टे हाथ से काम करने वाला कहा जाता है।दुनिया में लगभग दस फीसदी लोग ही ऐसे हैं जो सामान्य लोगों से हाथ के मामले में अलग ट्रैक पर चलते हैं। एक जानकारी यह भी कहती है कुल आबादी का 15 प्रतिशत हिस्सा लेफ्टी है और 84 प्रतिशत हिस्सा सामान्य लोगों का है। लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा उभयलिंगी है यानी जो बाएं और दाएं दोनों हाथों से समान रूप से काम कर सकता है। लेफ्ट हैंडर्स को खब्बू, लेफ्टी, वामहस्त जैसे विशेषणों से भी नवाजे जाने की परंपरा है। बता दें इन लोगों के लिए उल्टा हाथ ही सीधा है।
लेफ्ट हैंडर्स डे का इतिहास
‘लेफ्ट हैंडर्स डे’ क्लब द्वारा पहली बार 13 अगस्त 1992 को किसी इवेंट का आयोजन किया गया था। लेफ्ट हैंडर्स क्लब का गठन सदस्यों के साथ संपर्क में रहने के लिए किया गया था। लेफ्ट हैंडर्स इंटरनेशनल के संस्थापक डीन आर कैंपबेल ने पहली बार लेफ्टी होने के नुकसान और फायदे बताने के लिए पहली बार 1976 में इस दिवस को मनाया था।
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युवराज सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
महात्मा गांधी समेत ये दिग्गज लेफ्टी
दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी खब्बू थे। जीनियसों के जीनियस लियोनार्डो द विंची भी लेफ्टी थे। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, बिल क्लिंटन, रोनाल्ड रीगन, दुनिया के दौलतमंदों में शुमार बिल गेट्स, पूर्व ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरून, दुनिया को ग्रेविटी का नियम बताने वाले आइज़क न्यूटन, स्टीव फोर्ब्स, संघर्ष और बुद्धिमत्ता के दम पर अलग पहचान बनाने वाली ओफ्रा विनफ्रे आदि लेफ्ट हैंडर ही थे। प्रिटी वुमन जूलिया रॉबर्ट, बेंजामिन फ्रेंकलिन और हैनरी फोर्ड भी लेफ्टी थे।
अभिनेताओं से लेकर खिलाड़ी तक लेफ्टी
कॉमेडी के सुप्रीम स्टार चार्ली चैपलिन भी इसी श्रेणी में आते हैं। बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन, क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, हॉलीवुड अदाकारा और एक्शन-रोमांस की मलिका एंजेलिना जोली, खब्बू बल्लेबाज सौरव गांगुली, शिखर धवन, युवराज आदि भी लेफ्ट हैंडर थे। इसके अलावा करण जौहर, अभिषेक बच्चन, सोनाक्षी सिन्हा, सनी लियोनी, आदित्य रॉय कपूर और कपिल शर्मा भी लेफ्टी हैं।
मशहूर स्पेनिश टेनिस स्टार राफेल नडाल उल्टे हाथ से टेनिस खेलते हैं और सफल भी हैं लेकिन ये जानना दिलचस्प होगा कि नडाल पहले राइट हैंडर ही थे, बाद में उन्होंने लेफ्ट हैंड से खेलना शुरू किया और फिर जो कमाल हुआ हमारे सामने है। एक खबर तो ये भी कहती है कि एप्पल कंप्यूटर के पांच मूल डिजाइन में चार की पहचान लेफ्टी है।
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Left Handers Day
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कला और रचनात्मकता में लेफ्टी औरों से आगे क्यों?
सवाल ये है कला और रचनात्मकता में लेफ्टी औरों से आगे क्यों होते हैं ? तो वो इसलिए क्योंकि ये लोग अपने मस्तिष्क के दाहिने हिस्से का प्रयोग ज्यादा करते हैं और दिमाग का दाहिना भाग ही आर्ट और क्रिएटिविटी संबंधी मामलों का मैनेजमेंट संभालता है।
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Left Handers Day
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लेफ्ट हैंडर्स को नुकसान
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं यहां भी हैं, लाभ है तो हानि भी। रिसर्च बुक ‘सेरेब्रल डोमिनेंस : द बॉयोलॉलिकल फाउंडेशन’ के अनुसार उल्टे हाथ के लोगों में सीधे हाथ वालों की तुलना में एलर्जी से पीड़ित होने की संभावना 11 गुना ज्यादा होती है। ऐसे लोगों को माइग्रेन होने का खतरा भी ज्यादा रहता है। एक और अध्ययन कहता है कि लेफ्टी सोते समय अपने हाथ पैर बहुत हिलाते हैं। इससे नींद में कमी हो सकती है. इनमें हकलाने और डिस्लेक्सिया की बीमारी होने की दर ज्यादा होती है। मिथक के अनुसार 18वीं और 19वीं सदी के दौरान बाएं हाथ के लोगों के साथ कठोर भेदभाव किया जाता था और अक्सर उनकी पिटाई हो जाया करती थी।