आज के समय में युवा पीढ़ी के लिए बिकनी फैशन स्टेटमेंट बन गया है। एक्ट्रेसेस और मॉडल्स के आए दिन बिकनी में हॉट फोटोशूट देखने को मिलते हैं, पर क्या आप यह जानते हैं कि इसकी पहनने की शुरुआत कब और कैसे हुई। आइए जानते हैं कब और किसने किया बिकनी को डिजाइन और क्यों रखा गया इसका नाम बिकनी...
वैसे तो कोई ड्रेस जब कभी कोई डिजाइन करता है तो वह फैशन डिजाइनर करता है, लेकिन बिकनी को किसी फैशन डिजाइनर ने नहीं ब्लकि मूल रूप से फ्रांस के एक इंजीनियर लुईस लेअर्द ने डिजाइन किया था। पहली बार बिकनी 5 जुलाई 1946 को बनाई गई थी। जिस वजह से 5 जुलाई को बिकनी डे के रूप में मनाया जाता हैं।
बिकिनी का नाम पड़ने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। दरअसल पहली बार जिस जगह पर बिकनी बनाई गई थी उस उस जगह का नाम बिकिनी अटोल था, जो कि प्रशांत महासागर में स्थित है। उस समय वह जगह अमेरिका की न्यूक्लियर एटम और हथियारों का परीक्षण साईट हुआ करती थी और 'लुईस रियर्ड' के इस आविष्कार को भी किसी बम से कम नहीं माना जाता था जिस वजह से इसका नाम बिकिनी रखा गया।
बिकनी के आने के बाद बहुत टाइम तक बिकिनी का कोई एड नहीं हुआ। कोई भी मॉडल इसके एड के लिए तैयार नहीं होती थी, लेकिन फिर कुछ समय के बाद 19 साल की एक डांसर मिशेलाइन इसका एड करने के लिए तैयार हो गईं। जैसे ही उनका एड सामने आया तो उन्हें उनके फैन्स के 50 हजार लेटर मिले।
एक समय ऐसा भी आया था जब स्पेन और इटली में बिकनी पर बैन लगा दिया गया था, लेकिन कुछ समय के बाद बैन हटा दिया गया और साल 1950 तक यहां के बाजारों में बिकनी ने अपनी पकड़ मजबूत बना ली थी। जिसके बाद अमरीका में भी इसका चलन बढ़ने लगा। 1960 में अमेरिका ने जैसे ही बिकनी से बैन हटाया तो वहां पर लोगों ने इसे बहुत पसंद किया।