"मैच्योरिटी" का मतलब होता है परिपक्वता, यानी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से समझदार और जिम्मेदार बनना। जब कोई व्यक्ति सही-गलत में फर्क कर सके, अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सके और जीवन के फैसले समझदारी से ले सके, तो उसे मेच्योर माना जाता है। वहीं, कानून मानता है कि 18 साल की उम्र के बाद लड़का और लड़की दोनों की बालिग हो जाते हैं। हालांकि, अभी भी यह गुत्थी नहीं सुलझी है कि 17 साल के बाद आखिर उस एक साल में ऐसा क्या हो जाता है कि आपकी गिनती मैच्योर लोगों में होने लगती है। कई लोगों का कहना है कि जरूरी नहीं कि अगर आप 18 साल के हो गए हैं तो मैच्योर भी हो गए हो। यह दोनों बातें काफी अलग है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन बातों से पता चलता है कि आप सच में मैच्योर हो गए हैं। आइए जानते हैं।
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Maturity Age Of Girls And Boys: कितने साल में मैच्योर हो जाते हैं लड़के और लड़कियां? दिखने लगते हैं ये बदलाव
Tue, 18 Feb 2025 12:49 PM IST
दीक्षा पाठक
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Tue, 18 Feb 2025 12:49 PM IST
सार
Exact Maturitry Age: कई लोगों का कहना है कि जरूरी नहीं कि अगर आप 18 साल के हो गए हैं तो मैच्योर भी हो गए हो। यह दोनों बातें काफी अलग है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन बातों से पता चलता है कि आप सच में मैच्योर हो गए हैं। आइए जानते हैं।
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इस उम्र में मैच्योर होते हैं लड़के और लड़कियां
- फोटो : Adobe stock
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मैच्योरिटी के प्रकार
शारीरिक मैच्योरिटी
शारीरिक मैच्योरिटी
- जब शरीर पूरी तरह विकसित हो जाता है, तो इसे शारीरिक मेच्योरिटी कहा जाता है।
- लड़कियों में: 18-20 साल
- लड़कों में: 21-25 साल
इस उम्र में मैच्योर होते हैं लड़के और लड़कियां
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मानसिक मैच्योरिटी
भावनात्मक मैच्योरिटी
सामाजिक मैच्योरिटी
- जब व्यक्ति सोचने, समझने और सही निर्णय लेने में सक्षम हो जाता है।
- लड़कियां: 21-23 साल में मानसिक रूप से परिपक्व हो जाती हैं।
- लड़के: 25-27 साल में पूरी तरह मानसिक रूप से मेच्योर होते हैं।
भावनात्मक मैच्योरिटी
- जब व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रख सके, गुस्से, दुख, खुशी या निराशा में संतुलन बनाए रख सके।
- यह अनुभव और उम्र के साथ बढ़ती है।
सामाजिक मैच्योरिटी
- जब व्यक्ति समाज में सही व्यवहार करे, रिश्तों की अहमियत समझे और जिम्मेदार नागरिक बने।
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इस उम्र में मैच्योर होते हैं लड़के और लड़कियां
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कैसे समझें कि आप मैच्योर हो गए हैं?
1. आप अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना सीख गए हैं
2. समस्याओं का सामना करने की क्षमता आ गई है
3. आपको खुद की जिम्मेदारी का अहसास हो गया है
1. आप अपनी भावनाओं को कंट्रोल करना सीख गए हैं
- छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करते।
- भावनाओं में बहकर गलत फैसले नहीं लेते।
- दूसरों की बातों को बिना सोचे-समझे दिल पर नहीं लेते।
2. समस्याओं का सामना करने की क्षमता आ गई है
- भागने की बजाय समस्या का हल निकालने की कोशिश करते हैं।
- अपनी गलतियों को स्वीकार करके उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं।
- हर चीज के लिए दूसरों को दोष नहीं देते।
3. आपको खुद की जिम्मेदारी का अहसास हो गया है
- पैसों और समय का सही इस्तेमाल करने लगे हैं।
- खुद के भविष्य को लेकर सोचने लगे हैं।
- माता-पिता और परिवार की जिम्मेदारियों को समझने लगे हैं।
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इस उम्र में मैच्योर होते हैं लड़के और लड़कियां
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4. आपको सही और गलत में फर्क समझ में आने लगा है
5. लोगों और रिश्तों को बेहतर समझने लगे हैं
6. असफलता से डरना बंद कर दिया है
- कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेते।
- दूसरों की सलाह को नजरअंदाज नहीं करते, लेकिन खुद भी सोचते हैं।
- किसी भी मुद्दे पर लॉजिकल और बैलेंस तरीके से सोचते हैं।
5. लोगों और रिश्तों को बेहतर समझने लगे हैं
- सिर्फ अपने फायदे की नहीं, बल्कि दूसरों की भी सोचते हैं।
- रिश्तों में ईगो की बजाय समझदारी और सम्मान को अहमियत देते हैं।
- दोस्ती और रिश्तों में गुणवत्ता को महत्व देने लगे हैं, न कि संख्या को।
6. असफलता से डरना बंद कर दिया है
- फेल होने पर हार नहीं मानते, बल्कि सीखने की कोशिश करते हैं।
- दूसरों की आलोचना (Criticism) को सुधार का मौका मानते हैं।
- खुद को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत करते हैं।