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हेल्थ अलर्ट: एक ही बीमारी के महिला और पुरुषों में दिख सकते हैं अलग-अलग लक्षण, जानिए कैसे करें पहचान

Sun, 30 Aug 2026 07:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 30 Aug 2026 07:10 PM IST
सार

महिलाओं और पुरुषों में हृदय रोग के लक्षण पूरी तरह एक जैसे नहीं होते। सीने में दर्द दोनों में प्रमुख संकेत है, लेकिन महिलाओं में सांस फूलने, असामान्य थकान, मतली, उल्टी और पीठ या जबड़े में दर्द जैसे लक्षण अधिक देखे जाते हैं।

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Heart Attack Symptoms in Men and Women know How They are Differ
बीमारियों के लक्षण - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आप जानते हैं कि एक ही बीमारी लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकती है और इसके लक्षण भी लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं? महिलाओं-पुरुषों में ये अंतर और भी स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है।



हृदय रोग इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। हार्ट अटैक का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में सीने में तेज दर्द की तस्वीर सामने आती है। लेकिन महिलाओं में हर बार हार्ट अटैक में सीने में दर्द हो ये जरूरी नहीं है। कई बार महिलाओं में दिल के दौरे के समय कई अन्य लक्षण हो सकते हैं, जिनके बारे में लोग अक्सर अनजान रह जाते हैं। 

सिर्फ दिल की बीमारी ही नहीं ऑटोइम्यून बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में भी कई बार महिला-पुरुषों के लक्षण अलग-अलग तरीके के हो सकते हैं। यानी बीमारी पहचानने का सही तरीका सिर्फ यह देखना नहीं है कि लक्षण क्या है, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि किस व्यक्ति में यह लक्षण किस तरह सामने आ रहा है?

Heart Attack Symptoms in Men and Women know How They are Differ
हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले - फोटो : Freepik.com

पहले महिला-पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षण जान लेते हैं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिला और पुरुष दोनों में हार्ट अटैक होने पर सीने में दबाव, जकड़न या दर्द हो सकता है। पर हर बार यही लक्षण दिखें ये भी जरूरी नहीं है।
 

  • महिलाओं में हार्ट अटैक में कई बार सांस फूलने, गंभीर थकान, मतली-उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • पुरुषों में भी ये लक्षण हो सकते हैं, पर महिलाओं में ये ज्यादा देखे जाते रहे हैं। 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं कई बार हार्ट अटैक के सामान्य माने जाने वाले लक्षण न दिखने के कारण हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान में देरी हो सकती है।
  • किसी में भी अचानक शुरू हुई सीने की परेशानी, सांस फूलने, ठंडे पसीने जैसी दिक्कतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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ऑटोइम्यून बीमारियों के मामले - फोटो : Freepik.com

ऑटोइम्यून बीमारियों के खतरे

ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है। ल्यूपस, रूमेटाइड आर्थराइटिस और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी कई बीमारियां महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखी जाती हैं। 

अध्ययनों के अनुसार, ऑटोइम्यून बीमारी से निदान किए गए लोगों में लगभग पांच में से चार महिलाएं होती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ल्यूपस, रुमेटॉयड आर्थराइटिस और सोग्रेन सिंड्रोम जैसी बीमारियों का खतरा चार गुना तक ज़्यादा होता है।

महिलाओं का इम्यून सिस्टम जेनेटिक्स, हार्मोन और मॉलिक्यूलर कारकों की वजह से स्वाभाविक रूप से ज्यादा सक्रिय और प्रतिक्रियाशील होता है जिससे जोखिम अधिक हो सकता है।

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स्ट्रेस-डिप्रेशन की समस्याएं - फोटो : adobe stock images

मानसिक बीमारी के मामले

मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में लक्षण केवल भावनाओं तक सीमित नहीं रहते। डिप्रेशन में उदासी, रुचि कम होना, शरीर की ऊर्जा में कमी, नींद और भूख में बदलाव तथा एकाग्रता में परेशानी हो सकती है।
 

  • पुरुषों में डिप्रेशन अक्सर चिड़चिड़ापन, गुस्सा, जोखिम भरे व्यवहार या शराब के गलत इस्तेमाल के रूप में भी दिखाई दे सकता है। जबकि महिलाओं में ये उदासी, चिंता, लोगों से दूरी, थकान और नींद में बदलाव जैसे लक्षणों के साथ देखा जा सकता है। कई बार दोनों के में लक्षण एक जैसे भी हो सकते हैं।
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समय पर डॉक्टरी सलाह भी जरूरी - फोटो : Freepik

क्या कहते हैं डॉक्टर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिला और पुरुषों के बीच बीमारियों के लक्षणों के अंतर को समझना जरूरी है। एक ही बीमारी में भी दो महिलाओं या दो पुरुषों के लक्षण अलग हो सकते हैं। कई बार उम्र, आनुवंशिकता, अन्य बीमारियां, दवाएं भी लक्षणों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए लगातार या अचानक आने वाले असामान्य लक्षणों के साथ पूरी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। हर बार बीमारियों का घर पर ही निदान करना ठीक नहीं है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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