प्याज और लहसुन को भी और सब्जियों की तरह उगाया जाता है, और ये कई गुणों से भरपूर होते हैं। लहसुन और प्याज का प्रयोग देश से लेकर विदेश तक के व्यंजनो में किया जाता है। फिर भी व्रत में या कई धर्मों में प्याज और लहसुन के प्रयोग को वर्जित माना गया है। लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है? आइए जानते हैं इसके बारे में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खाने को उनेक स्वाद और गुणों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। जैसे मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कसैला आदि। इसी तरह से आयुर्वेद में भी खाने को तीन श्रेणियों में रखा गया है - सात्विक, तामसिक और राजसिक प्याज और लहसुन को उनके गुणों को कारण तामसिक और राजसिक श्रेणी में रखा जाता है।
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प्याज और लहसुन
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आयुर्वेद के अनुसार प्याज और लहसुन को उनके गुणों के आधार पर तामसिक और राजसिक श्रेणी में रखा जाता है। क्योंकि इनको खाने से शरीर में उत्तेजना बढ़ती है। साथ ही इनका स्वाद बहुत तेज होता है। ये शरीर के तापमान को भी बढ़ाते हैं।
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प्याज और लहसुन एक ही प्रकृति के हैं। दोनों ही सब्जियां जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां हैं और दोनों में ही चिकित्सीय गुण पाए जाते हैं। लेकिन इनके गुणों में अंतर होता है। कुछ आयुर्वेदिक चिक्तिसक सलाह देते हैं कि प्याज और लहसुन का प्रयोग खाने में नहीं करना चाहिए। जबकि लहसुन के अर्क का उपयोग कई दवाईयों में किया जाता है, जिसके कारण इसे राजसिक कहा जाता है।
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लहसुन और प्याज में एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर में ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। मौसम की वजह से होने वाले वायरल और फ्लू से बचने में भी हमारी मदद करते हैं। अगर रोज के खाने में प्याज, लहसुन को शामिल किया जाए तो यह हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।