चॉकलेट का इतिहास
चॉकलेट डे 2018: पहले तीखा होता था इसका स्वाद, एक एक्सपेरिमेंट ने बना दिया 'लव फूड'
अमेरिका से यूरोप ऐसे पहुंची चॉकलेट
1528 में मैक्सिको पर कब्जा करने के बाद स्पेन के शासक ने कोको के बीच और चाकलेट बनाने की मशीन अपने देश भेजी
जल्दी ही स्पेन में चॉकलेट रईसों की एक पसंदीदा ड्रिंक बन गई। 1606 तक इटली में भी चॉकलेट लोकप्रिय हो गई। माना जाता है कि इटली के एक यात्री फ्रेंसिस्को कारलेटी ने चॉकलेट पर स्पेन के एकाधिकार को खत्म किया और चॉकलेट को इटली ले गया।
फ्रेंसिस्को ने मध्य अमेरिका के लोगों को चॉकलेट बनाते देखा और अपने देश इटली में भी चॉकलेट का प्रचार-प्रसार किया। 1615 में फ्रांस ने ड्रिंकिंग चॉकलेट का स्वाद चखा। फ्रांस के लोगों को मानना था कि चॉकलेट स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक पदार्थ है।
लग्जरी फूड थी चॉकलेट
चॉकलेट एक वक्त में लग्जरी आइटम मानी जाती थी। यूरोप में जब इसे मीठा स्वाद दिया गया तो देखते-देखते यह व्यापार का जरिया भी बन गई। 16वीं शताब्दी में लोग त्योहारों पर इसका सेवन करते थे और घर आए खास मेहमान को भी यह दी जाने लगी। धीरे-धीरे चॉकलेट इतनी प्रचलित हो गई कि लोग एक दूसरों को यह भेंट स्वरूप देने लगे। जब अध्ययनों ने साबित किया कि चॉकलेट सेहत और इंटीमेट रिश्तों के लिए भी बढ़िया है तो इसके नाम से जश्न मनाए जाने की शुरुआत हुई।
ऐसे पड़ा चॉकलेट का नाम
वैसे तो चॉकलेट के नामकरण को लेकर अलग-अलग बातें कही गई हैं। एक विचार के मुताबिक चॉकलेट एक स्पैनिश शब्द है। वहीं, अमेरिका में एजटेक सभ्यता के दौरान भी 'चॉकलेट' का जिक्र मिला है। वहां प्रयोग होने वाली नेहुटल भाषा में चॉकलेट का अर्थ खट्टा या कड़वा होता था।
30 साल में खत्म हो जाएगी चॉकलेट
आज के हालातों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि चॉकलेट के सर्वाधिक उत्पादन वाले मुख्य भागों में तापमान अधिक हो जाएगा और साथ ही इन इलाकों को सूखा भी झेलना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इन कारणों से अगले तीस सालों में चॉकलेट की फसलों को फलने-फूलने के लिए के लिए अनुकूल पर्यावरण नहीं मिलेगा। कोकोआ पेड़ से कोको बींस मिलती हैं, जिससे चॉकलेट बनाई जाती है। यह केवल ह्यूमिड वर्षा वनों में उगाए जा सकते हैं।