करीब ढाई महीने लंबे लॉकडाउन के बाद देश अब धीरे-धीरे अनलॉक होता जा रहा है। हालांकि, कोविड-19 से बचने के लिए अभी भी लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा। मगर, जैसे जैसे रियायतें मिल रही हैं, बाजार फिर से गुलजार हो रहे हैं। जल्द ही लोग घर से बाहर निकल कर चाट पकौड़ों का मजा लेते नजर आएंगे। गोल-गप्पे और चाट वालों की दुकानों पर फिर से भीड़ जुटेगी। लॉकडाउन में लोगों ने अगर सबसे ज्यादा किसी चीज की कमी महसूस की, तो वो थे गोल-गप्पे।
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पानी-पूरी
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गोल-गप्पे भारत का सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड है। मुंबइया जुबान में बोलें तो पानी-पूरी। उत्तर प्रदेश में इन्हें पानी के बताशे कहते हैं, तो कोलकाता में फुचका। द हिंदू अखबार में छपी खबर के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान भारत में गूगल पर सबसे ज्यादा गोल-गप्पे बनाने की विधि सर्च की गई। इसकी सर्च में 107 फीसद का उछाल देखा गया। पिछले कुछ हफ्तों में देखा गया कि कुछ सोशल मीडिया भी पानी-पूरी का गुणगान कर रहे थे।
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पानी-पूरी
- फोटो : अमर उजाला
लोग बता रहे थे कि उन्हें पानी-पूरी की कमी कितनी खल रही है। गोल-गप्पे खाने का मजा भी ठेले वाले के पास खड़े होकर खाने में ही है। आप उसके पास प्लेट लेकर खड़े रहिए और वो आपको कुरकुरे गोल-गप्पे में मटर या आलू भर कर खट्टा, मीठा और मिर्च वाला पानी भर कर देता रहे।
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पानी-पूरी
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मुंह में रखते ही गोल-गप्पा फूटता है और खट्टे-मीठे पानी और कुरकुरे गोल-गप्पे का जो स्वाद मुंह में गुलता है वो अद्भुत होता है। उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। वैसे बहुत से लोग घर पर भी बहुत स्वादिष्ट पानी-पूरी बना लेते हैं। लॉकडाउन में तो लोगों के पास इसे घर में बनाने के सिवा कोई विकल्प नहीं था।
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पानी-पूरी
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पानी-पूरी या गोल-गप्पे कहां से आए? कैसे आए? इसके बारे में भी कई तरह की दिलचस्प कहानियां हैं। खान-पान के इतिहासकार डॉक्टर कुरुश दलाल का कहना है कि उत्तर भारत में सबसे पहले सत्रहवीं सदी में मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में चाट तैयार की गई थी।