'बहरे' हो सकते हैं बाइक चलाने वाले मर्द, और भी सेहत से जुड़े खतरे
मर्दों और लड़कों को मोटरसाइकिल का न सिर्फ शौक होता है बल्कि वो उनकी जरूरत भी होती है। एक से बढ़ कर एक बाइक खरीदने के चक्कर में लड़के ये नहीं समझ पाते कि इसका उनकी सेहत पर कितना गहरा असर पड़ रहा है।
'बहरे' हो सकते हैं बाइक चलाने वाले मर्द, और भी सेहत से जुड़े खतरे
ज्यादातर लोग तेज आवाज करने वाली और ज्यादा धुआं छोड़ने वाली बाइक खरीदते हैं। या उसे मॉडिफाई करवा कर, साइलेंसर-मफलर हटवा कर तेज घुर्राने वाली बना देते हैं। ऐसी बाइकों से होने वाली आवाज निर्धारित की गई आवाज से बहुत ज्यादा होती है। 80 डेसीबल तक की आवाज की अनुमति मिलती है जबकि ऐसी बाइकें 125 डेसीवल का शोर करती हैं।
'बहरे' हो सकते हैं बाइक चलाने वाले मर्द, और भी सेहत से जुड़े खतरे
बहुत तेज आवाज के करीब रहने से कान के अंदर के बालों के सेल को नुकसान पहुंचता है। इसके कारण सुनने की शक्ति भी कमजोर होने लगती है। अमूमन एक बाइक 1-2 घंटे तो चलती ही है यानी इतनी देर ऐसे शोर में रहना किसी भी व्यक्ति के लिए हानिकारक है।
'बहरे' हो सकते हैं बाइक चलाने वाले मर्द, और भी सेहत से जुड़े खतरे
ध्वनि प्रदूषण के कारण टिटिनेस भी हो जाता है। यह वो स्थिति होती है जब कानों में लगातार भिनभिनाने या कुछ गूंजने जैसी आवाज आती रहती है। जबकि असल में आस पास ऐसा कुछ हो भी नहीं रहा होता। लंबे वक्त तक ये परेशानी बनी रहे तो इंसान थकान और तनाव का शिकार हो जाता है।
'बहरे' हो सकते हैं बाइक चलाने वाले मर्द, और भी सेहत से जुड़े खतरे
लगातार ऐसे शोर में रहने से इंसान ऊंचा भी सुनने लगता है। जैसे कभी किसी म्यूजिक कॉनसर्ट में जाने पर कुछ देर के लिए आपको ऊंचा ही सुनाई देता है लेकिन यह इतना खतरनाक नहीं होता और सही हो जाता है। लेकिन बाइक का शोर लंबे वक्त तक कानों में पड़ता है। इसे समय रहते सही न किया जाए तो इंसान पूरी तरह बहरा भी हो सकता है।