देशभर में होली के पांचवे दिन को रंग पंचमी और कृष्ण पंचमी के रूप में मनाया जाता है। रंग पंचमी को भी होली की ही तरह मनाया जाता है बल्कि कई जगहों पर इस दिन होली से अधिक रंग खेला जाता है। लोग भगवान राधा- कृष्ण को अबीर- गुलाल लगाते हैं। यह त्योहार चैत्रमास की कृष्णपक्ष की पंचमी को पड़ता है। इस दिन देवी-देवताओं को भी रंग लगाया जाता है। कई लोग घर में गमी होने के कारण होली नहीं मना पाते हैं, ऐसे लोगों को रंगपंचमी पर रंग खेलने का मौका मिल जाता है। अगली स्लाइड्स से जानिए रंगपंचमी से जुड़ी अन्य जानकारी।
Happy Rangpanchami 2021: जानिए होली के पांचवे दिन मनाई जाने वाली रंगपंचमी क्यों होती है खास
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गुलाल उड़ाकर मनाई जाती है रंग पंचमी
अधिकतर जगहों पर रंग पंचमी खेलने को लेकर यह संस्कृति है कि इसे भीड़ में खेला जाता है अर्थात किसी चौक-चौराहे पर बहुत सारे लोग रंग उड़ा-उड़ाकर इसे मनाते हैं। इसमें जान- पहचान वाले और अनजान, हर तरह के लोग शामिल होते हैं। गुलाल उड़ाने को लेकर यह भी मान्यता होती है कि ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक गुण प्रवेश करते हैं।
घरों में बनती है पूरन पोली
यह त्योहार खासतौर पर महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश में धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग पकवान, जिसमें मुख्य रूप से पूरन पोली बनाकर इस पर्व को मनाते हैं। पूरनपोली बनाने की संस्कृति का प्रचार- प्रसार महाराष्ट्र से ही हुआ है। राजस्थान में जिस तरह जयपुर, उदयपुर और पुष्कर में होली की धूम होती है, उसी तरह जैसलमैर में रंगपंचमी का उत्साह अधिक होता है।
विवाह होते हैं तय
महाराष्ट्र के पूरे एक समुदाय के लिए रंग पंचमी के मायने बिल्कुल अलग हैं। महाराष्ट्र में रंग पंचमी के दिन मछुआरों की बस्ती में खास आयोजन होता है। सबके लिए नाच-गाने से लेकर खाने-पीने तक के बंदोबस्त किए जाते हैं। इस दिन मछुआरे एक-दूसरे के घर पर मिलने जाते हैं और शादी तय करने के लिए इस दिन को सर्वोत्तम मानते हैं।
मध्यप्रदेश में रंग पंचमी खेलने की परंपरा काफी पुरानी है। इंदौर में रंग पंचमी को लेकर बहुत उत्साह रहता है। लाखों की संख्या में लोग राजबाड़ा पर एकत्रित होते हैं। इस दिन यहां पर एक विशेष जुलूस निकलता है जिसे कि ‘गेर’ कहा जाता है। यह जुलूस सभी के ऊपर ‘रामरज’ नामक एक विशेष रंग उड़ाता चलता है। शहर में रंगपंचमी के दिन सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है।