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लोहड़ी 2019 : इस बार खास तरीके से मनाएं लोहड़ी, इन बड़े गुरुद्वारे में टेकें मत्था
Thu, 10 Jan 2019 12:50 AM IST
kapil kumar
लाइफ स्टाइल डेस्क,अमर उजाला
लाइफ स्टाइल डेस्क,अमर उजाला
Published by: kapil kumar
Updated Thu, 10 Jan 2019 12:50 AM IST
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lohri festival
पूरे देशभर में लोहड़ी को लेकर लोगों के बीच काफी उत्साह है। लोग पहले से ही तैयारी करना शुरू कर दिए हैं। खान-पान से लेकर कपड़ों तक की तैयारी जोरो-शोरों पर हैं, लेकिन क्यों ने इस बार लोहड़ी कुछ अलग तरीके से मनाएं। देश के कई बड़े गुरुद्वारे हैं, जहां आप लोहड़ी मना सकते हैं। अलग-अलग जगहों से आए लोगों के साथ मिलकर लोहड़ी मनाएं और इस बार की लोहड़ी को यादगार बनाएं। तो हम आपको बताते हैं कि इन पांच गुरुद्वारों के बारे में जहां आप अपनी लोहड़ी को यादगार बना सकते हैं।
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श्री हरिमन्दिर साहिब गुरुद्वारा
पंजाब के अमृतसर में बना श्री हरिमन्दिर साहिब गुरुद्वारा यानी स्थित स्वर्ण मंदिर में सिखों का पवित्र स्थल है। यहां पर लोहड़ी के दिन काफी धूम-धाम रहती है। पूरे मंदिर परिसर को सजाया जाता है, लंगर बांटा जाता है। इस दौरान काफी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
पंजाब के अमृतसर में बना श्री हरिमन्दिर साहिब गुरुद्वारा यानी स्थित स्वर्ण मंदिर में सिखों का पवित्र स्थल है। यहां पर लोहड़ी के दिन काफी धूम-धाम रहती है। पूरे मंदिर परिसर को सजाया जाता है, लंगर बांटा जाता है। इस दौरान काफी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
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पटना साहिब, बिहार
सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म यहीं 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था. सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब हैं। सिखों के आखिरी गुरु का न केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी यहीं गुजरा था. यही नहीं सिखों के तीन गुरुओं के चरण इस धरती पर पड़े हैं। इस कारण दुनिय भर के सिख संप्रदाय के लिए पटना साहिब आस्था का केंद्र है। लोहड़ी के दिन पूरे पटना में रौनक रहती है। इस दिन काफी संख्या में लोग गुरुद्वारे पहुंचते हैं।
सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म यहीं 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था. सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब हैं। सिखों के आखिरी गुरु का न केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी यहीं गुजरा था. यही नहीं सिखों के तीन गुरुओं के चरण इस धरती पर पड़े हैं। इस कारण दुनिय भर के सिख संप्रदाय के लिए पटना साहिब आस्था का केंद्र है। लोहड़ी के दिन पूरे पटना में रौनक रहती है। इस दिन काफी संख्या में लोग गुरुद्वारे पहुंचते हैं।
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केशगढ़ साहिब, पंजाब
पंजाब के रुद्रपुर जिले में केशगढ़ साहिब गुरुद्वारा मौजूद है। आनन्दपुर साहिब शहर की स्थापना नौंवे गुरु तेग बहादुर जी द्वारा सन् 1664 में की गई थी। उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने लगभग 28 वर्षों तक यहां निवास किया था। आनन्दपुर साहिब के तख्त श्री केसगढ़ साहिब में ही गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 में पंज प्यारों की उपाधि दी थी और खालसा पंथ की शुरुआत हुई थी। यहां पर लोहड़ी के साथ-साथ होली भी बहुत धूम-धाम ले मनाई जाती है।
पंजाब के रुद्रपुर जिले में केशगढ़ साहिब गुरुद्वारा मौजूद है। आनन्दपुर साहिब शहर की स्थापना नौंवे गुरु तेग बहादुर जी द्वारा सन् 1664 में की गई थी। उसके बाद गुरु गोबिंद सिंह जी ने लगभग 28 वर्षों तक यहां निवास किया था। आनन्दपुर साहिब के तख्त श्री केसगढ़ साहिब में ही गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 में पंज प्यारों की उपाधि दी थी और खालसा पंथ की शुरुआत हुई थी। यहां पर लोहड़ी के साथ-साथ होली भी बहुत धूम-धाम ले मनाई जाती है।
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गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब
हिमालय में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है. यहाँ पर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पिछले जीवन में ध्यान साधना की थी और वर्तमान जीवन लिया था. यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड के चमोली जिले में मौजूद है। लोहड़ी के वक्त यहां पर काफी संख्या में लोग आते हैं और त्यौहार मनाते हैं। पूरे साज्जो-सज्जा के साथ इस त्यौहार को मनाया जाता है।
हिमालय में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है. यहाँ पर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पिछले जीवन में ध्यान साधना की थी और वर्तमान जीवन लिया था. यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड के चमोली जिले में मौजूद है। लोहड़ी के वक्त यहां पर काफी संख्या में लोग आते हैं और त्यौहार मनाते हैं। पूरे साज्जो-सज्जा के साथ इस त्यौहार को मनाया जाता है।