Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi
जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष
देश में कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की रफ्तार के धीमा पड़ते ही, तीसरी लहर को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। तीसरा लहर अब आएगी, यह कितनी गंभीर होगी और किन लोगों को इससे विशेष सावधान रहने की जरूरत है, सभी लोगों के दिमाग में इस तरह के सवाल चल रहे हैं। तीसरी लहर को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ रिपोर्टस का दावा है कि कोरोना की तीसरी लहर डेल्टा वेरिएंट के कारण आ सकती है। यह वेरिएंट अब म्यूटेशन के साथ डेल्टा प्लस में बदल गया है, जोकि और भी खतरनाक हो सकता है। ऐसे में तीसरी लहर से बचाव के उपायों को अभी से प्रयोग में लाना बेहद आवश्यक हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना की पहली दो लहरों की तरह इस बार भी खतरा उन लोगों में ज्यादा होगा, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है। फिलहाल वैक्सीनेशन के कारण काफी लोगों को सुरक्षित माना जा सकता है, हालांकि संक्रमण का खतरा टला नहीं है। ऐसे में तीसरी लहर से बचाव की तैयारियों को अभी से शुरू कर देना चाहिए। आइए इस लेख में ऐसे ही व्यायाम और योग के बारे में जानते हैं जिनका रोजाना अभ्यास कोरोना से सुरक्षा दे सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह: कोरोना की तीसरी लहर से बचना चाहते हैं तो अभी से शुरू कर दें यह उपाय
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सभी लोगों के लिए गहरी सांस वाले व्यायाम करना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर के दौरान वायरस का फेफड़ों पर गंभीर असर देखने को मिला था। अगर आपके फेफड़े मजबूत हैं तो वायरस के गंभीर प्रभावों से बचा जा सकता है। फेफड़ों को मजबूत करने में गहरी सांस वाले व्यायाम काफी फायदेमंद हो सकते हैं। यह व्यायाम डायाफ्राम फ़ंक्शन को बेहतर बनाने के साथ सांस लेने की क्षमता में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं। कई नैदानिक अध्ययनों में विशेषज्ञों ने पाया है कि ऐसे व्यायाम सांस लेने में तकलीफ को कम करने के साथ इससे संबंधित अन्य जटिलताओं को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा सभी लोगों को नियमित रूप से योग का अभ्यास करना चाहिए। आगे की स्लाइडों में बताए जा रहे आसन काफी फायदेमंद माने जा सकते हैं।
प्राणायाम
प्राणायाम को फेफड़ों की क्षमता में सुधार करने, प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के साथ श्वसन क्रिया में प्रयुक्त नसों को आराम देने वाले सबसे प्रभावी व्यायामों में से एक माना जाता है। विशेषज्ञ इस आसन को खाली पेट करने की सलाह देते हैं। प्राणायाम करने के लिए शांत मुद्रा में बैठ जाएं। शरीर को एकदम सीधा रखें। अब गहरी सांस लें और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें। रोजाना कम से कम 10 मिनट तक इस व्यायाम को जरूर करना चाहिए।
अनुलोम विलोम
अनुलोम विलोम व्यायाम को फेफड़ों से विषाक्त पदार्थों को निकालर उन्हें शुद्ध करने, फेफड़ों में जमा अतिरिक्त द्रव को कम करने के साथ फेफड़ों में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बढ़ावा देने में काफी प्रभावी माना जाता है। इतना ही नहीं यह प्रतिरक्षा और फेफड़ों की क्षमता को बढ़ावा देने में भी सहायक है। इस व्यायाम को करने के लिए शांत मुद्रा में बैठ जाएं। अपनी आंखें बंद करें और दाहिने अंगूठे को नाक के दाहिने छिद्र पर रखें। अब बाईं तरफ से गहरी सांस लें औऱ दाहिनी ओर से छोड़ें। इसी तरह से नाक की दूसरी तरफ से भी सांस लें और छोड़ें।
लिप ब्रीदिंग व्यायाम
शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाने और वायुमार्ग को खुला रखने के लिए लिप ब्रीदिंग व्यायाम को सबसे बेहतर उपायों में से एक माना जाता है। इस व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले आराम की स्थिति में बैठ जाएं। अब नाक के माध्यम से धीरे-धीरे सांस लें, इस दौरान मुंह बंद रहना चाहिए। साँस छोड़ने से पहले अपने होठों को सिकोड़ लें और फिर धीरे-धीरे फेफड़ों की सारी हवा बाहर निकाल दें।
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नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
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