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World Vitiligo Day 2019: सफेद दाग को लेकर समाज में फैले मिथक को तोड़ने की जरुरत 

Tue, 25 Jun 2019 12:16 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Tue, 25 Jun 2019 12:16 PM IST
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world vitiligo day 2019 time to break stereotypes about white spot disease
अगली बार जब आप किसी को उनकी त्वचा पर सफेद पैच के साथ देखें, तो उनका हाथ पकड़ें, सात चलें और विटिलिगो नामक बीमारी के आसपास की रूढ़िवादी सोच को तोड़ने का प्रयास करें। विश्व विटिलिगो दिवस 25 जून को मनाया जाता है, विशेषज्ञों का कहना है कि नए उपचार रोगियों को आशा दे रहे हैं और इस बीमारी के बारे में फैली सोच को तोड़ना एक सामाजिक जिम्मेदारी है।विटिलिगो को ल्यूकोडर्मा के रूप में भी जाना जाता है, विटिलिगो एक ऑटोइम्यून विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है। जिससे त्वचा पर सफेद धब्बे हो जाते हैं जो त्वचा के भीतर मेलेनोसाइट्स के परिणामस्वरूप विकसित होती है।

 
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एक धारणा है कि विटिलिगो खाद्य पदार्थों के गलत संयोजन का एक परिणाम है, उदाहरण के लिए, मछली खाने के तुरंत बाद दूध का सेवन से विटिलिगो हो सकता है। मधुमेह के लिए बीजीआर-34 के बाद अब सफेद दाग को लेकर ल्यूकोस्किन दवा के रूप में सरकार को बड़ी कामयाबी मिली है। रक्षा वैज्ञानिकों की इस खोज ने न सिर्फ चिकित्सा को नई दिशा दी है। बल्कि शोध करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक डॉ. हेमंत पांडे को विज्ञान पुरुस्कार से सम्मानित भी किया है। 
 
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अब तक 1 लाख मरीजों में सफल परिणाम मिलने के बाद अब सरकार ग्रामीण अंचलों तक इसे ले जाने की तैयारी में है। आयुर्वेद शोधों को लेकर ऐसा पहली बार है जब सरकार को सीएसआईआर के अध्ययन बीजीआर-34 और ल्यूकोस्किन के रुप में बड़ी कामयाबी मिली हो। वर्ष 1958 से भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में संचालित डीआरडीओ इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण के अलावा चिकित्सीय क्षेत्र में भी कई अध्ययन कर चुका है। यहां राडार, प्रक्षेपास्त्र के अलावा देशी जड़ी बूटियों से संबंधित कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं।
 
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दरअसल शरीर पर उभरने वाले सफेद दाग के पीड़ित देश में करीब 4 से 5 फीसदी हैं। राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में तो 5 से 8 फीसदी लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। भारत में इस त्वचा रोग को ले कर लोगों को समाज में बहुत परेशानी झेलनी होती है, क्योंकि अक्सर लोग इसे कुष्ठ रोग समझ लेते हैं जो जीवाणु संक्रमण है। इसके लिए जागरुकता लाने के लिए ही 25 जून को दुनिया भर में विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जा रहा है। 
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सरकार ने इसी दिवस पर अपनी ये उपलब्धि भी साझा की है। उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ स्थित डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ बायो एनर्जी रिसर्च (डिबियर) के हर्बल औषधि विभाग के प्रमुख डॉ. हेमंत पांडे ने बताया कि सफेद दाग को लेकर लोगों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हिमाचल की करीब एक दर्जन जड़ी बूटियों पर गहन अध्ययन के बाद ल्यूकोस्किन दवा का निर्माण हुआ। ल्यूकोस्किन मलहम और मुंह से ली जाने वाली ओरल लिक्विड दोनों ही स्वरूप में उपलब्ध है। समय के साथ ल्यूकोस्किन की सफलता दर उम्मीद से कई गुना ज्यादा मिली। इसीलिए अब एक बार फिर से ल्यूकोस्किन के नए रुप में लाने के लिए भी वे प्रयास कर रहे हैं। 
 
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