स्ट्रोक, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आंकड़ों के मुताबिक हर 3.5 मिनट में एक व्यक्ति की स्ट्रोक से मौत हो जाती है। हर साल, संयुक्त राज्य में 8 लाख से अधिक लोगों को स्ट्रोक होता है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यह बड़ी समस्या बनी हुई है। ब्रेन स्ट्रोक, भारत में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) के बाद मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है।
World Stroke Day: जानलेवा हो सकती है ये समस्या, आहार और दिनचर्या में ऐसे बदलाव रखेंगे आपको सुरक्षित
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आहार की पौष्टिकता का रखें ध्यान
रांची स्थित राजेन्द्र चिकित्सा विज्ञान संस्थान (रिम्स) में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ विकास कुमार बताते हैं कि संतुलित आहार के माध्यम से आप शरीर को स्वस्थ और फिट रख सकते हैं। आहार में फल और सब्जियां, साबुत अनाज, फाइबर, प्रोटीन और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों वाली चीजों को शामिल करने से क्रोनिक बीमारी का प्रबंधन करना और धमनियों को स्वस्थ रखना आसान हो सकता है। पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ आपके रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करते हैं, ऐसे में इसे स्ट्रोक के जोखिमों को कम करने वाला माना जा सकता है।
ओमेगा-3 और लो फैट वाली चीजें लाभकारी
ओमेगा -3 फैटी एसिड में उच्च आहार आपके रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मददगार हो सकते हैं, मछली का सेवन करना इसमें आपके लिए सहायक है। इसके अलावा कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का विकल्प चुनें। बिना फैट वाला दूध, दही और पनीर उच्च रक्तचाप और स्ट्रोक के जोखिम को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं। स्ट्रोक के कई कारकों को, आहार पर ध्यान रखकर कम किया जा सकता है।
स्ट्रोक से बचाव के लिए शारीरिक गतिविधि जरूरी
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और तनाव जैसी स्थितियां स्ट्रोक के खतरे को बढ़ावा देने वाली मानी जाती हैं। इससे बचाव के लिए शारीरिक रूप से सक्रियता पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम स्तरीय व्यायाम जरूर सुनिश्चित करें। व्यायाम की मदद से ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या को कम करने में विशेष मदद मिल सकती है।
शराब-धूम्रपान को कहें न
शराब पीना स्ट्रोक के खतरे को कई गुना तक बढ़ा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि शराब का अधिक सेवन करने वालों में अन्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक का खतरा अधिक हो सकता है। इसी तरह धूम्रपान के कारण धमनियां कमजोर होने लगती है, जिससे स्ट्रोक हो सकता है। इन दोनों से दूरी बनाकर स्ट्रोक के खतरे से आसानी से बचाव किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।