स्ट्रोक, वैश्विक स्तर से मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में हर साल 15 मिलियन लोगों को स्ट्रोक होता है इनमें से 5 मिलियन (50 लाख) की मृत्यु हो जाती है और अन्य स्थायी रूप से विकलांगता के शिकार हो जाते हैं। 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक को कुछ दशकों पहले तक असामान्य माना जाता था हालांकि समय के साथ इस आयु वर्ग वालों में भी जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को लाइफस्टाइल-आहार को ठीक रखकर स्ट्रोक से बचाव के लिए प्रयास करते रहने की सलाह देते हैं।
World Stroke Day: साल 2050 तक 50% बढ़ सकते हैं स्ट्रोक से मौत के मामले, अभी हर साल 50 लाख लोगों की जाती है जान
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स्ट्रोक से मौत का जोखिम
लैंसेट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अगले कुछ दशकों में वैश्विक स्तर पर स्ट्रोक से मरने वाले लोगों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि आने की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युवा लोगों और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में इसका जोखिम और भी अधिक देखा जा रहा है।
आज के समय में स्ट्रोक दुनियाभर में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है इतना ही नहीं स्ट्रोक के कारण हर साल लाखों लोगों में विकलांगता, डिमेंशिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी अधिक होता है, जिससे क्वालिटी ऑफ लाइफ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
युवा आबादी में बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अभी तक 55 साल की आयु वालों में इसका खतरा अधिक देखा जा रहा था, पर जिस तरह से लाइफस्टाइल और आहार से संबंधित समस्याएं बढ़ी हैं, 30-40 की उम्र वाले भी इस जानलेवा समस्या की चपेट में आ रहे हैं।
रोकथाम कार्यक्रमों की कमी, बढ़ता प्रदूषण, जीवनशैली की गड़बड़ी इस समस्या के प्रमुख कारक हैं। कम आयु में ही ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के चलते युवा आबादी स्ट्रोक की चपेट में आ रही है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
न्यूजीलैंड में ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के सह-अध्यक्ष वालेरी एल. फ़िगिन कहते हैं, स्ट्रोक दुनिया की आबादी पर भारी असर डालता है, जिससे हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है और जो बच जाते हैं उनमें स्थाई विकलांगता का खतरा रहता है। ये स्थिति हर साल अरबों डॉलर का नुकसान कर रही है।
स्ट्रोक की रोकथाम के लिए अगर बेहतर प्रबंधन न किए गए तो हम आने वाले वर्षों में और भी गंभीर परिणाम देखे जा सकते हैं।
लाइफस्टाइल में सुधार करना जरूरी
सेचुरेटेड और ट्रांस फैट के साथ कोलेस्ट्रॉल से भरपूर आहार खाने से स्ट्रोक और हृदय रोगों से मृ्त्यु का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा, आहार में बहुत अधिक नमक (सोडियम) के कारण भी रक्तचाप का स्तर बढ़ता जा रहा है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जो लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं, दिन का अधिकतर समय बैठे-बैठे बिता देते हैं, उन लोगों में स्ट्रोक होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। स्ट्रोक से बचाव के लिए इन आदतो में सुधार करना बहुत आवश्यक है।
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स्रोत और संदर्भ
Pragmatic solutions to reduce the global burden of stroke: a World Stroke Organization–Lancet Neurology Commission
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