स्ट्रोक का खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ता जा रहा है। कुछ दशकों पहले तक इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब युवा आबादी भी इसकी शिकार होती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक हर साल डेढ़ करोड़ से अधिक लोग स्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं और करीब 50 लाख लोगों की मौत हो जाती है। आंकड़ों के मुताबिक 45 वर्ष से कम उम्र के लगभग 70,000 अमेरिकियों को स्ट्रोक होता है। लगभग 10 से 15 प्रतिशत वयस्कों में समय के साथ ये जोखिम बढ़ रहा है।
World Stroke Day: माइग्रेन रोगियों में स्ट्रोक का खतरा होता है अधिक? इन स्वास्थ्य समस्या वाले भी रहें सावधान
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दो प्रकार के होते हैं स्ट्रोक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं: इस्केमिक और हेमोरेजिक। सबसे अधिक मामले इस्केमिक स्ट्रोक के रिपोर्ट किए जाते हैं जो मस्तिष्क तक जाने वाली धमनी में रक्त के थक्कों के निर्माण के परिणामस्वरूप होती है। वहीं हेमोरेजिक स्ट्रोक, तब होता है जब मस्तिष्क में या उसके पास रक्त वाहिका फट जाती है।
हमारे जीवनशैली की कई गड़बड़ आदतों के कारण रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध हो सकती हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
युवाओं में स्ट्रोक के कारण
युवा वयस्कों में स्ट्रोक के बढ़ते खतरे के लिए जिन जोखिम कारकों को प्रमुख माना जा रहा है उनमें गड़बड़ लाइफस्टाइल, धूम्रपान-शराब का सेवन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है। जिन लोगों के परिवार में किसी को स्ट्रोक हो चुका है उनमें भी इसका खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं जैसे माइग्रेन और हार्ट की बीमारी वाले लोगों में भी स्ट्रोक होने का खतरा अधिक हो सकता है।
माइग्रेन रोगियों को बरतनी चाहिए सावधानी
अध्ययनकर्ता कहते हैं, यह प्रमाणित नहीं होता है कि माइग्रेन की समस्या सीधे तौर पर स्ट्रोक का कारण बनती है, हालांकि अगर आपको माइग्रेन है तो आपको स्ट्रोक का खतरा थोड़ा अधिक हो सकता है। स्ट्रोक और माइग्रेन दोनों मस्तिष्क की ही समस्याएं हैं और कभी-कभी माइग्रेन के लक्षण स्ट्रोक की तरह ही हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति जो धूम्रपान भी करते हैं उन्हें स्ट्रोक का जोखिम अधिक होता है।
हार्ट की समस्या है तो भी रहें अलर्ट
जिन लोगों को हृदय की समस्या है या जिनको जन्मजात ये परेशानी रहती है, उनमें भी स्ट्रोक होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। रक्त के थक्के हृदय और मस्तिष्क दोनों रक्त वाहिकाओं के लिए समस्या बढ़ाने वाले हो सकते हैं और इससे हार्ट अटैक का भी खतरा रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को हार्ट की समस्या रही है उन्हें स्ट्रोक को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।