पोलियो वायरस से संक्रमण के कारण होने वाला पोलियो रोग वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट रहा है। इस रोग के टीके और जागरूकता के चलते ज्यादातर देशों ने संक्रमण को रोकने में जीत हासिल कर ली है। भारत भी पोलियो मुक्त देशों में है, 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में संक्रमण का आखिरी केस रिपोर्ट किया गया था। इस रोग के प्रति प्रतिरक्षा को बढ़ाने के लिए भारत सरकार 5 साल से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की ओरल वैक्सीन मुफ्त देती है।
World Polio Day 2023: पोलियो मुक्त है भारत पर पड़ोसी देशों में अब भी खतरा, जानिए इस रोग के बारे में विस्तार से
पोलियो संक्रमण के बारे में जानिए
पोलियो रोग, पोलियोवायरस के कारण होने वाली बीमारी है जो मुख्यरूप से रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क के स्टेम में नसों को प्रभावित करती है। पोलियो संक्रमण के कारण अपंगता का खतरा हो सकता है, इसके लक्षण लकवा जैसे दिखते हैं। कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है, इसके कारण मौत का भी जोखिम रहता है।
दुनियाभर में टीकाकरण के प्रयासों के चलते हाल के वर्षों में संक्रमण के मामले काफी कम हुए हैं। हालांकि कुछ देश अब भी इस समस्या के शिकार हैं।
कैसे होता है ये संक्रमण?
पोलियोवायरस, मुख्यरूप से रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क स्टेम में तंत्रिका कोशिकाओं को लक्षित करता है जो मांसपेशियों की गति को नियंत्रित करते हैं।
पोलियो वायरस से संक्रमित लोग जिनमें इसके लक्षण नहीं भी हैं, उनके कारण भी अन्य लोगों में संक्रमण का जोखिम हो सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शौच, छींकने या खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट के माध्यम से दूसरों में आसानी से फैल सकता है।
पोलियो संक्रमण के लक्षणों के बारे में जानिए
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पोलियोवायरस से संक्रमित 70 से 95 फीसदी लोगों में इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं।
शुरुआती लक्षणों में बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न और हाथ-पैर में दर्द की समस्या होती है। 200 में से एक संक्रमित में लकवा (आमतौर पर पैरों में) हो सकता है। लकवाग्रस्त व्यक्तियों को यदि सांस लेने में कठिनाई है तो ऐसे 5-10% की मृत्यु का भी खतरा रहता है। पोलियो मुख्यरूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है।
पोलियो का इलाज और बचाव
पोलियो का कोई इलाज मौजूद नहीं है, इसलिए संक्रमितों में इसके लक्षणों और जटिलताओं को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। इसके लिए दर्द निवारक दवाइयां, मांसपेशियों में दर्द-ऐंठन को नियंत्रित करने के लिए सेकाईं करने, रोगियों को आराम करने और पौष्टिकता पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। हड्डी की विकृति और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में सुधार के लिए फिजियोथेरेपी से लाभ मिल सकता है।
पोलियो के टीके बच्चों के शरीर को पोलियो वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद करते हैं। इसके अलावा हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखना भी संक्रमण के जोखिमों को कम करने में मददगार है।
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स्रोत और संदर्भ
Poliomyelitis (polio)
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