मलेरिया, वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनने वाली बीमारी है। भारत भी इससे प्रभाविक देशों में से एक रहा है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में व्यापक कैंपेन और जागरूकता अभियान के चलते भारत में इसके मामलों में विशेष सुधार देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक देश में मलेरिया के मामले साल 2020 में 45 प्रतिशत और 2021 में 13 प्रतिशत की गिरावट के साथ लगातार कम हो रहे हैं।
World Malaria Day: भारत ने मलेरिया रोकथाम में किया विशेष सुधार, जानिए इस रोग के लक्षण से लेकर बचाव तक सबकुछ
मच्छरों के काटने से होने वाला रोग
मलेरिया, एक जानलेवा बीमारी है, जोकि संक्रमित एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलती है। संक्रमित मच्छरों में प्लाज्मोडियम परजीवी होते हैं। जब यह मच्छर काटता है, तो परजीवी आपके खून में मिल जाते हैं। ये परजीवी लिवर में पहुंचकर वहीं पर बढ़ते हैं। इसके बाद परिपक्व परजीवी रक्तप्रवाह में प्रवेश करते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करना शुरू कर देते हैं।
संक्रमण के बाद इसके लक्षण दिखने में 10-15 दिनों का समय लग सकता है। मलेरिया का संक्रमण बरसात के दिनों में अधिक होता है पर यह अन्य मौसमों में भी आपको शिकार बना सकता है।
मलेरिया के लक्षण कैसे होते हैं?
मलेरिया के लक्षणों में बुखार के साथ ठंड लगने की दिक्कत होना सबसे सामान्य है। मलेरिया परजीवी शरीर में प्रवेश करने के लंबे समय तक निष्क्रिय रह सकते हैं, यही कारण है कि कई बार इसके लक्षण दिखने में काफी वक्त भी लग सकता है। समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर रोग का इलाज प्राप्त करना चाहिए, ऐसा करके गंभीर जोखिमों को कम किया जा सकता है।
- कंपकंपी वाली ठंड लगने के साथ बुखार की दिक्कत।
- सिर दर्द।
- जी मिचलाना-उल्टी।
- पेट-मांसपेशियों में दर्द
- मल से रक्त आने की समस्या।
जानलेवा भी हो सकती है मलेरिया
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ स्थितियों में मलेरिया जानलेवा समस्याओं का भी कारण बन सकती है।
- मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूजन, सेरेब्रल मलेरिया।
- फेफड़ों में तरल पदार्थ का जमाव जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
- किडनी, लिवर फेलियर का खतरा।
- लाल रक्त कोशिकाओं में अधिक क्षति के कारण एनीमिया का खतरा।
- लो ब्लड शुगर की स्थिति, जो डायबिटीज रोगियों के लिए दिक्कतें बढ़ा सकती है।
मलेरिया का इलाज और बचाव
यदि रक्त की जांच में आपमें मलेरिया का निदान होता है तो डॉक्टर की सलाह पर इसके दवा का कोर्स पूरा करें। लक्षण कम होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के दवा बंद न करें। मलेरिया से बचाव के लिए प्रयास करना बहुत आवश्यक है।
मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए पानी को जमा न होने दें, दवाइयों को छिड़काव कराएं। सोने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें जिससे मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। अगर आपमें लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत जांच और इलाज प्राप्त करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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