आयुर्वेद, एलोपैथ और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों की तरह होम्योपैथी की भी अपनी विशेषताएं होती है। हर साल 10 अप्रैल को सैमुअल हैनीमैन की याद में विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी के जनक माने जाने वाले जर्मन मूल के ईसाई फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन का जन्म 10 अप्रैल को ही हुआ था। इस साल उनकी 265वीं जयंती है। भारत में भी हर साल आयुष मंत्रालय इसकी थीम निर्धारित करता है और देशभर में यह विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल की थीम, सार्वजनिक स्वास्थ्य में होम्योपैथी का बढ़ता दायरा है।
होम्योपैथी को वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में जाना जाता है। इसकी दवाओं का असर भले ही धीरे होता है, लेकिन यह रोगों को जड़ से दूर करता है। सबसे खास बात यह कि होम्योपैथी दवाओं के साइडइफेक्ट नहीं के बराबर होते हैं। प्रैक्टो पर प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की रोकथाम करने और मैमोरी पॉवर बढ़ाने में अन्य दवाओं की अपेक्षा होम्योपैथी की दवाएं ज्यादा कारगर होती हैं।
डायरिया, सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी बीमारियों में होम्योपैथी की दवा एलोपैथी की तरह ही तेजी से काम करती है। गठिया, अस्थमा, त्वचा संबंधी रोग आदि को ठीक करने में होम्योपैथी पूरा समय लेती है लेकिन इसे जड़ से खत्म करने का काम भी करती है। प्रैक्टो की रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी तरह के तनाव और दर्द में आराम के लिए होम्योपैथी की दवा रहुस्टॉक्स 200 बेहतर साबित हुई है। इसकी डोज जल्दी काम करती है और साइडइफेक्ट नहीं होता है।
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माइग्रेन
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शुरुआत से ही होम्योपैथी की आदत लगाने वाले लोग माइग्रेन जैसी परेशानियों से दूर रहते हैं। गठिया जैसी बीमारी को यह 82 फीसदी तक कम रकता है। वहीं नींद से जुड़ी समस्याओं को होम्योपैथी की दवा से 60 फीसदी कम करता है। होम्योपैथी की दवाएं दिखने में एक जैसी लगती है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य हो सकता है कि दुनिया में चार हजार से ज्यादा तरह की होम्योपैथी की दवाएं हैं।
होम्योपैथी की सीमाएं:
- अगर शरीर में किसी विटामिन की कमी हो जाए तो होम्योपैथी में उनके लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं।
- हर व्यक्ति पर होम्योपैथी अलग तरीके से काम करती है और इसका असर भी अलग-अलग व्यक्तियों पर अलग होता है।
- होम्योपैथी में डाइट कंट्रोल की तो बहुत जरूरत नहीं होती, लेकिन लहसुन, अदरक, कच्चा प्याज खाने की मनाही होती है।