वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रदूषण का खतरा सभी के लिए बहुत हानिकारक है। समय के साथ यह जोखिम और भी बढ़ता जा रहा है। लिहाजा न सिर्फ कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा है साथ ही लाइफ एक्सपेक्टेंसी भी अब पहले की तुलना में कम हुई है। वायु और जल प्रदूषण को स्वास्थ्य विशेषज्ञ इंसानी सेहत के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण मानते हैं। ये दोनों स्थितियां कैंसर जैसी कई प्रकार का गंभीर-जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही हैं।
World Environment Day: वायु प्रदूषण से 10 में से एक को फेफड़े के कैंसर का खतरा, श्वसन रोग बढ़ा रही चिंता
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वायु प्रदूषण से बढ़ रहा है फेफड़ों के कैंसर का खतरा
वायु प्रदूषण का मतलब हवा में छोटे धूल जैसे कणों और हानिकारक पदार्थों-रसायनों का मिश्रण है। यह मानव निर्मित हो सकता है, जैसे वाहनों या कारखानों से निकलने वाला धुआं और लकड़ी या कोयले जैसे जलने वाले ईंधन से निकलने वाला धुआं। आमतौर पर सबसे छोटे कणों को वैज्ञानिक भाषा में 'पार्टिकुलेट मैटर' कहा जाता है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहना फेफड़ों के कैंसर के जोखिमों को कई गुना बढ़ा देता है। अकेले वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर के लगभग 10 मामलों में से 1 का कारण बनता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक
वायु प्रदूषण को कई अध्ययनों में गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा गया है। शोध बताते हैं जो लोग अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहते हैं जिनमें स्ट्रेस, डिप्रेशन और न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों के होने का जोखिम अधिक हो सकता है। संज्ञानात्मक स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि बढ़े हुए प्रदूषण के स्तर के संपर्क में रहने वाले लोगों में संज्ञानात्मक गिरावट की समस्या का जोखिम भी अधिक हो सकता है।
जल प्रदूषण से बढ़ रहा जोखिम
वायु प्रदूषण की ही तरह जल प्रदूषण भी बड़ा जोखिम कारक है जिसके कारण की गंभीर बीमारियां वैश्विक स्तर पर बढ़ रही हैं। जल प्रदूषण को दस्त और पेट की समस्याओं से लेकर त्वचा रोग, कुपोषण और यहां तक कि कई प्रकार के कैंसर का कारण भी पाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि लगभग 3 में से 1 व्यक्ति को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जो हैजा, पेचिश और टाइफाइड जैसी बीमारियों का कारण बन रहा है।
भविष्य के लिए चिंता
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हर साल पांच साल से कम उम्र के लगभग तीन लाख बच्चे हाइजीन की समस्याओं या असुरक्षित पेयजल से जुड़ी बीमारियों से मर जाते हैं। जिस प्रकार से पेयजल में प्रदूषकों की वृद्धि हो रही है यह भविष्य के लिए और भी खतरनाक है।
जल-वायु दोनों प्रदूषणों पर अगर समय रहते कंट्रोल न किया गया तो इसके कारण भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का खतरा काफी आम हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।