कैंसर, सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। हर साल तमाम तरह के कैंसर के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। लोगों में इस गंभीर रोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 4 फरवरी को 'वर्ल्ड कैंसर डे' मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कैंसर निश्चित ही काफी घातक बीमारी है, पर अगर इसके बारे में लोगों को सही जानकारी हो तो स्थिति का समय से निदान किया जा सकता है। कैंसर की समय से पहचान हो जाने पर इलाज और इसके कारण होने वाली गंभीरता और मौत के खतरे को कम किया जा सकता है।
World Cancer Day: कैंसर को लेकर समाज में फैली हैं कई मिथ और गलत जानकारियां, जानिए क्या सच-क्या अफवाह?
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मिथ- कैंसर को मतलब मौत निश्चित है।
कैंसर का इलाज संभव है यदि शुरुआत में ही इसकी पहचान हो सके। #WorldCancerDay #SwasthaBharat #beatNCDs
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लोगों के बीच कैंसर को लेकर फैली यह मिथ काफी गंभीर है। कैंसर हमेशा लाइलाज नहीं होता है। कैंसर के कारण होने वाली मौत का खतरा, रोग के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। कैंसर का पता लगाने और उपचार के क्षेत्र में तकनीकी प्रगति ने इस दिशा में काफी बेहतर काम किया है। प्रारंभिक पहचान और उपचार के साथ, अधिकांश रोगियों की जान बचाई जा सकती है। युवराज सिंह, संजय दत्त जैसे स्टार इसके उदाहरण हैं।
मिथ: कैंसर संक्रामक है, यह रोगी से दूसरों को भी हो सकता है
लोगों के बीच कैंसर की संक्रामकता को लेकर भी काफी भ्रम की स्थिति है। अक्सर लोग कैंसर रोगियों से मिलने या उनके निकट संपर्क में आने से कतराते हैं। पर ध्यान देने वाली बात यह है कि कैंसर छूत की बीमारी नहीं है। एकमात्र स्थिति जिसमें कैंसर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, वह है अंग या ऊतकों का ट्रांसप्लांटेशन। हालांकि वर्तमान में अंग प्रत्यारोपण को लेकर नियम बहुत कड़े हैं, इसमें डोनर की अच्छे से जांच की जाती है इसलिए यह भी एक दुर्लभ है।
मिथ: स्तन में गांठ होने का मतलब स्तन कैंसर है।
नेशनल ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन के अनुसार, स्तन में गांठ होने का मतलब जरूर नहीं है कि यह कैंसर ही हो। फाइब्रोएडीनोमा जैसी कई अन्य स्थितियां भी स्तन में गांठ का कारण बन सकती हैं। लेकिन अगर आपको स्तन में गांठ या स्तन के ऊतकों में कोई बदलाव दिखाई देता है, तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेकर स्थिति का सही निदान और उपचार अवश्य करा लेना चाहिए।
मिथ: बाल झड़ रहे हैं तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है।
अक्सर कैंसर रोगियों की तस्वीरों में उन्हें आपने गंजा देखा होगा, इसी आधार पर लोगों ने मानना शुरू कर दिया है कि बाल झड़ना, कैंसर का संकेत हो सकता है। हालांकि, इसे डॉक्टर पूरी तरह से अफवाह ही मानते हैं। डॉक्टर बताते हैं, बाल झड़ने की समस्या केवल कुछ कीमोथेरेपी दवाओं से संबंधित होती है। कैंसर के उपचार के दौरान प्रयोग में लाए जाने वाले तरीकों के कारण बाल झड़ सकते हैं, लेकिन सिर्फ बाल झड़ने को कैंसर का संकेत नहीं माना जा सकता है।