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Coronavirus: आखिर कौन थी वह महिला, जिसने सबसे पहले कोरोना वायरस का पता लगाया था?

Fri, 01 Jan 2021 02:27 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 01 Jan 2021 02:27 PM IST
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women scientist june almeida who identified first human coronavirus
कोरोना वायरस की खोज करने वाली महिला - फोटो : Facebook/Axelle Tessandier

कोविड-19 से दुनियाभर में अब तक आठ करोड़ 38 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 18 लाख से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। चूंकि कोविड-19 एक नया वायरस है, लेकिन यह कोरोना वायरस का ही एक प्रकार है, जो काफी समय से अस्तित्व में है। क्या आप जानते हैं कि इंसानों में पहली बार कोरोना वायरस की खोज किसने की थी? उस महिला का नाम है जून अलमेडा। उनका जन्म वर्ष 1930 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित एक बस्ती में रहने वाले बेहद साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक बस ड्राइवर थे। सबसे खास बात ये है कि जून अलमेडा ने महज 16 साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था, लेकिन फिर भी वह एक मशहूर वायरोलॉजिस्ट कैसे बनीं? आइए जानते हैं इसके बारे में... 

women scientist june almeida who identified first human coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

स्कूल छोड़ने के बाद जून ने स्कॉटलैंड के सबसे बड़े शहर ग्लासगो की एक लैब (प्रयोगशाला) में बतौर तकनीशियन नौकरी की शुरुआत की थी। हालांकि कुछ दिन काम करने के बाद वह नई संभावनाओं की तलाश में लंदन चली गईं। साल 1954 में उन्होंने एनरीके अलमेडा नाम के शख्स से शादी कर ली, जो कि वेनेजुएला के एक कलाकार थे। 

women scientist june almeida who identified first human coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

1954 में ही अलमेडा को ओंटारियो कैंसर इंस्टीट्यूट में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी तकनीशियन के रूप में काम पर रखा गया, जहां उन्होंने करीब 10 साल तक काम किया। साल 1963 में, वह 'साइंस' नामक पत्रिका में छपे एक लेख के तीन लेखकों में से एक थीं, जिसमें उन्होंने कैंसर के रोगियों के खून में वायरस जैसे कणों की पहचान की थी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

बाद में जून अलमेडा ने डॉ. डेविड टायरेल के साथ रिसर्च का काम शुरू किया। दरअसल, डेविड टायरेल उन दिनों सामान्य सर्दी-जुकाम पर शोध कर रहे थे। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. टायरेल ने जुकाम के दौरान नाक से बहने वाले तरल के कई नमूने एकत्र किए थे, जिसमें लगभग सभी नमूनों में सामान्य सर्दी-जुकाम के दौरान पाए जाने वाले वायरस दिख रहे थे, एक को छोड़कर, क्योंकि वो बाकी सबसे अलग था। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

डॉ. टायरेल ने एकत्र किए हुए उन नमूनों को जांच के लिए जून अलमेडा के पास भेज दिया। वहां उन्होंने परीक्षण के बाद बताया कि ये वायरस इनफ्लूएंजा की तरह दिखता है, लेकिन उससे अलग है। दरअसल, इसी वायरस को आज कोरोना वायरस के तौर पर जाना जाता है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वायरस की ऊंची-नीची बनावट को देखते हुए ही इस वायरस का नाम कोरोना वायरस रखा गया था। 

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